इंग्लिश चैनल
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प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली ब्रिटेन सरकार अब अवैध प्रवासियों पर नकेल कसने की तैयारी में है। दरअसल, यूरोप से छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन आने वाले प्रवासियों को रोकने के लिए सरकार एक कानून बनाने जा रही है। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने अवैध प्रवासन के मुद्दे पर बोलते हुए कहा, 'अब बहुत हो गया।'
आइये जानते हैं अवैध प्रवास विधेयक क्या है? विधेयक कब लाया जाएगा? कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? विधेयक पर सरकार का क्या रुख है? क्या इसका विरोध भी हो रहा है?
Suella Braverman, सुएला ब्रेवरमैन
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अवैध प्रवास विधेयक क्या है?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक छोटी नावों पर देश में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को रोकने वाले कानून की घोषणा करने वाले हैं। कानून लागू होने के बाद छोटी नावों पर यूके आने वाले शरण का दावा नहीं कर पाएंगे। इस विधेयक को लेकर देश की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने बताया कि जो कोई भी छोटी नाव पर आता है उसे जल्द से जल्द एक 'सुरक्षित तीसरे देश' में भेज दिया जाएगा।
नावों को यूके में शरण का दावा करने से रोका जाएगा। विधेयक में एक बार हटाए जाने के बाद उन्हें लौटने पर प्रतिबंध लगाने की भी योजना है। हालांकि, वर्तमान में शरण चाहने वालों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए देश में रहने का अधिकार होगा।
नया विधेयक कब आएगा?
ब्रिटिश मीडिया के मुताबकि प्रस्तावित कानून का विवरण मंगलवार को प्रकाशित किया जाएगा। गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन इसी दिन संसद में नए कानून को पेश करेंगी। इसे 'अवैध प्रवास विधेयक' नाम दिया गया है।
इंग्लिश चैनल
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कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में इंग्लिश चैनल के तट पर आने वाले प्रवासियों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। गृह मंत्रालय के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि इस साल के शुरुआती दो महीनों में ही 2,950 प्रवासियों ने छोटी नावों पर इंग्लिश चैनल पार किया। 2022 में 45 हजार से अधिक लोग ब्रिटेन में इस तरह पहुंचे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 28,000 थी। इसके अलावा ब्रिटेन में 1.6 लाख से अधिक लोग शरण के लिए अपने आवेदनों पर निर्णय के इंतजार में हैं। इस तरह से क्रॉसिंग की संख्या बढ़ने के बाद ब्रिटिश सरकार इस मुद्दे से निपटने के लिए कानून ला रही है।
लंदन हाईकोर्ट
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अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के मामलों पर कानूनी रोड़ा
ब्रिटिश सरकार पहले भी अवैध प्रवासन के खिलाफ रही है और नया विधेयक उसी कड़ी का हिस्सा है। पिछले साल, पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने हजारों प्रवासियों को भेजने के लिए एक समझौता किया था। हालांकि, इनमें से कई लोग 6,400 किमी दूर रवांडा चले गए।
पिछले साल जून में इन प्रवासियों को लेकर जाने के लिए एक उड़ान तैयार थी लेकिन अंतिम समय में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ईसीएचआर) ने निषेधाज्ञा द्वारा इसे रोक दिया। बाद में फैसले की वैधता को लंदन के उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने दिसंबर में इसे वैध ठहराया, लेकिन इस फैसले को अदालतों में और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विरोधी फैसले की अपील सर्वोच्च न्यायालय में करना चाह रहे हैं। जानकारों की मानें तो यह कानूनी लड़ाई अब ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में ही खत्म होगी।
विधेयक का विरोध भी शुरू
कानून लागू होने से पहले ही इस नीति का विरोध शुरू हो गया है। कई मानवाधिकार समूहों ने विधेयक की निंदा की है। रेड क्रॉस में रणनीतिक मामलों के कार्यकारी निदेशक क्रिस्टीना मैरियट ने योजनाओं को बेहद चिंताजनक करार दिया है। उन्होंने कहा, 'गृह मंत्रालय जानता है कि यह लोगों को सुरक्षा के लिए काम नहीं कर पाएगा।' वहीं फ्रीडम फ्रॉम टॉर्चर की मुख्य कार्यकारी सोन्या स्केट्स ने कहा कि प्रस्तावों को बदले की भावना के तहत लाया गया है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक
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विधेयक पर सरकार का क्या रुख है?
अवैध प्रवासन के मुद्दे से निपटना प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा जनवरी में घोषित पांच प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक था। सुनक ने कहा था कि यह स्पष्ट है कि यदि आप अवैध रूप से यूके में प्रवेश करते हैं, तो आप यहां नहीं रह सकते। वहीं, गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने एक हालिया बयान में कहा, 'बस बहुत हो गया। ब्रिटिश लोग इस मुद्दे का हल चाहते हैं। वो पर्याप्त कार्रवाई न होने से परेशान हैं। हमें नावों को रोकना चाहिए।'