Australia: ऑस्ट्रेलिया में फिर हिंदू मंदिर निशाने पर क्यों, भारत विरोधी नारे और तोड़फोड़ की घटनाएं क्यों बढ़ीं?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 06 Mar 2023 12:20 PM IST
सार
विदेशी धरती पर हिंदू आस्था पर चोट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले फरवरी मध्य में ऑस्ट्रेलिया में दो हिंदू मंदिरों को धमकियां दी गईं थीं।
निशाने पर मंदिर
- फोटो : AMAR UJALA
पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर में हिंदू मंदिर कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर एक हिंदू मंदिर में हमले की घटना सामने आई है। अबकी बार ब्रिस्बेन स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि देश में रह रहे हिंदुओं को डराने के लिए किया गया है। ऑस्ट्रेलिया में हिंदू धर्म स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई हैं। इससे पहले विक्टोरिया, ब्रिस्बेन और मेलबोर्न जैसे बड़े शहरों में कई मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आईं थीं।
निशाने पर मंदिर
- फोटो : AMAR UJALA
पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर में हिंदू मंदिर कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर एक हिंदू मंदिर में हमले की घटना सामने आई है। अबकी बार ब्रिस्बेन स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि देश में रह रहे हिंदुओं को डराने के लिए किया गया है। ऑस्ट्रेलिया में हिंदू धर्म स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई हैं। इससे पहले विक्टोरिया, ब्रिस्बेन और मेलबोर्न जैसे बड़े शहरों में कई मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आईं थीं।
ब्रिस्बेन में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़
- फोटो : SOCIAL MEDIA
ताजा घटना क्या है?
ताजा मामला ब्रिस्बेन से आया है जहां शनिवार को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में खालिस्तान समर्थकों ने तोड़फोड़ की। मंदिर के अध्यक्ष सतिंदर शुक्ला ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए बताया कि सुबह के समय श्रद्धालु मंदिर में पूजा-पाठ के लिए पहुंचे थे, इसी दौरान उन्होंने देखा कि मंदिर की दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।
इस घटना पर मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नाराजगी व्यक्त की है। हिंदू ह्युमन राइट्स की निदेशक सारा गेट्स ने एक बयान में कहा कि सिख फॉर जस्टिस की तर्ज पर इस घृणा अपराध को अंजाम दिया गया है। यह ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हिंदुओं को भयभीत करने के लिए किया गया है।
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ऑस्ट्रेलिया में क्या पहले भी इस तरह के हमले हुए हैं?
विदेशी धरती पर हिंदू आस्था पर चोट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले फरवरी मध्य में ऑस्ट्रेलिया में दो हिंदू मंदिरों को धमकियां दी गईं थीं। पहला मामला ब्रिस्बेन स्थित गायत्री मंदिर का था। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के अध्यक्ष जय राम और उपाध्यक्ष धर्मेश प्रसाद को शुक्रवार को अलग-अलग फोन आए, फोन करने वाले ने खुद की पहचान 'गुरुवादेश सिंह' के रूप में बताई। फोन करने वाले ने शिवरात्रि पर मंदिर में खालिस्तान समर्थक नारे लगवाने का दबाव डाला। बाद में मंदिर की जनसंपर्क अधिकारी नीलिमा ने भी कहा कि उन्हें एक अमेरिकी नंबर से कई फोन आए। वहीं इन फोन कॉल के बाद मंदिर प्रबंधन ने वहां सुरक्षा बढ़ा दी थी।
दूसरा मामला ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में काली माता मंदिर का था जिसके पुजारी को फोन पर धमकी दी गई। पुजारी भावना को फोन कॉल करके धमकी में दी गई थी कि यदि भजन कार्यक्रम रद्द नहीं हुए तो नतीजे गंभीर होंगे। उस वक्त मंदिर का प्रबंधन आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी कर रहा था।
23 जनवरी को सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में इस्कॉन मंदिर में खालिस्तानी समर्थकों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की थी। इतना ही नहीं, मंदिर में भारत विरोधी नारे भी लिखे गए थे।
इससे पहले 16 जनवरी को कैरम डाउन इलाके में स्थित श्री शिवा विष्णु मंदिर पर भी भारत विरोधी नारे लिख दिए गए थे। मंदिर में जब भारत विरोधी नारे लिखे गए, उस वक्त मंदिर में तमिल हिंदुओं द्वारा तीन दिन का थाई पोंगल त्योहार मनाया जा रहा था। 15 जनवरी को खालिस्तान समर्थकों ने मेलबर्न में एक कार रैली निकालकर खालिस्तान पर जनमत के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें समर्थन नहीं मिल सका और मेलबर्न में भारतीय मूल की करीब 60 हजार आबादी रहती है लेकिन रैली के दौरान कुछ सौ लोग ही मौजूद रहे। माना जा रहा है कि इसी गुस्से में हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया था।
वहीं, 12 जनवरी को, मेलबर्न में स्वामीनारायण मंदिर में 'असामाजिक तत्वों' द्वारा भारत विरोधी चित्र और नारे लिखे गए थे।
टेंपल, ऑस्ट्रेलिया
- फोटो : Social Media
मंदिर क्यों बन रहे हैं निशाना?
विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल कहते हैं, 'ऑस्ट्रेलिया-कनाडा में तोड़फोड़ करने वाले खालिस्तान समर्थक हैं। ये स्पष्ट हो चुका है। इस तरह की हरकत करके यह लोग दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। वह अपनी नाजायज मांगों के समर्थन में बाकी देशों में भी समर्थन चाहते हैं।'
इसके पीछे पाकिस्तान जैसे देशों की शह भी शामिल है। ये भारत में अस्थिरता लाने के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। जब कश्मीर में आतंकी घटनाओं पर सरकार ने सख्त कदम उठाना शुरू किया तो इन लोगों ने दूसरे तरह से अपनी मुहिम को तेज करना शुरू कर दिया है। अब ये खालिस्तानी समर्थकों का सहारा ले रहे हैं।