पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। कई मामलों में जेल की सजा काट रहे इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध का संकट छाया हुआ है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अतातुल्लाह तरार ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध लगाने के अपने रुख पर फिर से जोर दिया।
कई दल प्रतिबंध का कर रहे समर्थन- अतातुल्लाह तरार
सूचना मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की सत्तारूढ़ सरकार इमरान खान की पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के सैद्धांतिक फैसले पर आगे बढ़ेगी और प्रासंगिक कानूनी परामर्श के बाद इसमें बदलाव किया जाएगा। उनका कहना है कि हमने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के मामले में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से परामर्श किया है और वर्तमान में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रहे हैं। लोग पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के विचार का दृढ़ता से समर्थन कर रहे हैं।
'पीटीआई और पाकिस्तान एक साथ नहीं रह सकते'
पाकिस्तान की एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोषणा इमरान खान की तरफ से अदियाला जेल में पत्रकारों के समक्ष यह स्वीकार किए जाने के बाद की गई कि उन्होंने गिरफ्तारी की स्थिति में मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पाकिस्तान के मंत्री तरार का यह बयान पिछले हफ्ते पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के बारे में उनकी टिप्पणियों के बाद आया है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा था कि पीटीआई और पाकिस्तान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि यह फैसला 9 मई के दंगों में इमरान खान की संलिप्तता और अन्य पीटीआई नेताओं की तरफ से आईएमएफ सौदे को विफल करने के प्रयासों के कारण लिया गया।
आम सहमति की इंतजार में शहबाज सरकार
मंत्री अतातुल्लाह तरार के हवाले से एक समाचार चैनल ने कहा, हमने सैद्धांतिक रूप से पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, लेकिन प्रतिबंध लगाने के लिए (सत्तारूढ़ सहयोगियों के बीच) व्यापक आम सहमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इमरान खान ने की थी सरकार के फैसले की आलोचना
इससे पहले रविवार को, इमरान खान ने सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र की हत्या के बराबर है। हमारी पार्टी पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया था, इसे चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं थी, और पार्टी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष पहले से ही जेल में थे।
यहां तक कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) भी सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं है, जबकि अन्य सहयोगी पीएमएल-क्यू ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। नागरिक समाज ने तुरंत आपत्ति जताई, पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद ने इस फैसले पर चिंता व्यक्त की और इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।