हर विमान में अलग होती है सीटों की व्यवस्था
विश्व कुमार रमेश ने बताया कि लंदन जा रहे एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान में उनकी सीट 11ए आपातकालीन दरवाजे के पास थी। विमान गुरुवार दोपहर अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुआ और वह बाहर निकलने में सफल रहे। फिर चलकर वह एंबुलेंस के पास पहुंचे। आपातकालीन दरवाजे के पास बैठना दुर्घटना में आपकी जना बचा सकते हैं। लेकिन हर बार सीट 11ए ही आपातकालीन दरवाजे पास नहीं होती, क्योंकि विमानों में सीट की व्यवस्था अलग-अलग होती है।
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पिछले साल जनवरी में एक बोइंग 737 मैक्स की उड़ान के दौरान कई पेंच (बोल्ट) गायब होने के कारण विमान की एक दीवार (जिससे प्लेन की खिड़कियां लगी होती हैं या जो प्लेन को हवा और दबाव से बचाता है) उड़ गई थी, जिससे उस सीट को नुकसान हुआ जो उसके पास थी। सौभाग्य से, उस समय वहां कोई नहीं बैठा था और किसी की जान नहीं गई।गलियारे के पास बैठने से आपको जल्दी निकलने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे आपके सिर पर ऊपर से गिरने वाले सामान से चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है और यह घटना बड़ी दुर्घटनाओं की तुलना में कहीं ज्यादा आम है।
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वह एयरबस ए350 विमान टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पर एक कोस्ट गार्ड विमान से टकरा गया था, जिसमें छोटे विमान के चालक दल के छह में से पांच सदस्यों की मौत हो गई थी। सुरक्षा निर्देशों में आमतौर पर यह सिखाया जाता है कि सीट बेल्ट कैसे बांधनी है। आपात हालात में शरीर की स्थिति कैसे होनी चाहिए और बाहर निकलने का रास्ता कैसे तय करना है। एक आम सलाह यह होती है कि अपनी सीट से सबसे नजदीकी दरवाजे तक कितनी पंक्तियां हैं, यह गिन लें। यह जानकारी तब बहुत काम आती है, जब विमान के अंदर धुआं भर जाए और कुछ दिखाई न दे।
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हालांकि, एयर इंडिया जैसी दुर्घटनाएं भी होती हैं। मिशेल फॉक्स का कहना है कि आज के विमान ऐसे बनाए जाते हैं कि कोई दुर्घटना हो भी जाए तो यात्री सुरक्षित बाहर निकल सकें। इनमें जमीन पर दिखाई देने वाली रोशनी, आग पकड़ने और बुझाने की तकनीकें, कम जलने वाली सामग्री और आपातकालीन दरवाजों तक बेहतर पहुंच शामिल हैं। फॉक्स ने कहा, हवाई जहाज के अंदरूनी हिस्सों के डिजाइन में बहुत तरक्की हुई है। जिससे जमीन पर या जमीन के पा दुर्घटना होने पर भी यात्रियों की जान बचाई जा सके।