शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दहशतगर्दों को पनाह देने वाले देशों को ‘अलग-थलग’ और ‘बेनकाब’ करें। विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन जैसे ज्वलंत मुद्दे पर बात की। जयशंकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए एक प्रमुख चिंता है और भारत प्रतिबद्धता के साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में काम कर रहा है।
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन देशों को ‘अलग-थलग और ‘बेनकाब’ करने को कहा जो आतंकवादियों को प्रश्रय देते हैं। कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में उन्होंने चीन और पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर आतंकवाद को बेलगाम छोड़ दिया गया तो यह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हुए।
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भारत ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी बात की
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन को ज्वलंत मुद्दा बताते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के सामने आज जलवायु परिवर्तन गंभीर चुनौती बन चुकी है। भारत कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए प्रतिबद्ध है और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़ा। उन्होंने पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल का जिक्र करते हुए बधाई संदेशों के लिए एससीओ परिषद के सदस्य देशों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि भारत वैकल्पिक ईंधन में बदलाव, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने को प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्री ने कनेक्टिविटी बढ़ाने पर दिया जोर, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अस्ताना के कार्यक्रम की तस्वीरें शेयर करते हुए जयशंकर ने कहा, आर्थिक विकास के लिए मजबूत कनेक्टिविटी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बेहतर संपर्क से हमारे समाज के बीच सहयोग और विश्वास का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजना और कनेक्टिविटी के लिए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी जरूरी है।
अस्ताना में एससीओ सम्मेलन के दौरान जयशंकर और अन्य राष्ट्राध्यक्ष
- फोटो : पीटीआई
कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर ने जोर देकर कहा, एससीओ एक सिद्धांत आधारित संगठन है। संगठन की सर्वसम्मति इसके सदस्य देशों का दृष्टिकोण भी तय करती है। उन्होंने कहा, इस समय, विशेष रूप से गौर करने वाली बात यह है कि एससीओ के सदस्य देश अपनी विदेश नीतियों के आधार के रूप में संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता, समानता, पारस्परिक लाभ, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने, बल का प्रयोग न करने या बल प्रयोग की धमकी न देने के प्रयास करें। हमने राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों के विपरीत कोई भी कदम न उठाने पर भी सहमति जताई है।
भारत चीन की सीपीईसी परियोजना के खिलाफ
गौरतलब है कि चीन ने 65 अरब अमेरिकी डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के तहत पाकिस्तान में विभिन्न बिजली परियोजनाओं और सड़क नेटवर्क में अरबों डॉलर का निवेश किया है। सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) की प्रमुख परियोजना है। बीआरआई को चीन द्वारा दुनिया भर में चीनी निवेश से विदेश में अपना प्रभाव बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जाता है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली इस परियोजना का भारत विरोध कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजर रहा है।
चीनी नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां भी हिंद महासागर में सक्रिय
बता दें कि चीन अपनी बीआरआई परियोजना के माध्यम से एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप के देशों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भारी मात्रा में धनराशि खर्च कर रहा है। अमेरिका के पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने बीआरआई की कड़ी आलोचना की थी और उसका मानना था कि चीन के "वित्तपोषण" के कारण छोटे देश भारी कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं, जिससे उनकी संप्रभुता खतरे में पड़ रही है। चीन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और दक्षिण चीन सागर (एससीएस) और पूर्वी चीन सागर (ईसीएस) दोनों में ही क्षेत्रीय विवादों में उलझा हुआ है। चीनी नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां भी हिंद महासागर में सक्रिय हैं।