Russia: रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने कहा कि भारत को तेल, कोयला और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रहेगी और एलएनजी निर्यात की संभावनाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत-रूस के बीच 90% से अधिक व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है और दोनों देश परमाणु, बैंकिंग व बीमा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
रूस के पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने बुधवार को कहा कि रूस से भारत को तेल और ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति लगातार जारी है और साथ ही रूस भारत को तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यात करने की संभावनाएं भी देख रहा है। उन्होंने कहा, हम ईंधन की आपूर्ति जारी रखे हुए हैं, जिसमें कच्चा तेल और तेल उत्पाद, थर्मल और कोकिंग कोयला शामिल हैं। हम रूसी एलएनजी के निर्यात की संभावनाएं भी देख रहे हैं। मांतुरोव ने यह बात भारत और रूस के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक-प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर गठित अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) के 26वें सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही।
भारतीय पक्ष से इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की, जो मंगलवार को तीन दिवसीय यात्रा पर मॉस्को पहुंचे थे। रूसी उप प्रधानमंत्री ने कहा, हम कुडनकुलम परमाणु परियोजना की सफलता के अनुभव के आधार पर शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं। मांतुरोव ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच व्यापार अब 90 फीसदी से अधिक राष्ट्रीय मुद्राओं (रूबल और रुपया) में हो रहा है।उन्होंने कहा, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आपसी भुगतान को आसान और निर्बाध बनाना एक और महत्वपूर्ण काम है। हमने अब तक रूस और भारत के बीच 90 फीसदी से अधिक भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में करना शुरू कर दिया है।
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस बैंकिंग क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेंगे और बीमा क्षेत्र में भी आपसी सहयोग को बढ़ावा देंगे। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, हमने व्यापार, अर्थव्यवस्था, कृषि, ऊर्जा, उद्योग, कौशल विकास, शिक्षा और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आगे कहा, हम वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं और हमें भरोसा है कि आज की आईआरआईजीसी-टीईसी बैठक के नतीजे भारत-रूस की समय-परीक्षित (टाइम-टेस्टेड) साझेदारी को और आगे बढ़ाएंगे।
जयशंकर और मांतुरोव ने आईआरआईजीसी-टीईसी सत्रों के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। इनकी विस्तार से जानकारी बाद में नई दिल्ली और मॉस्को की सरकारें साझा करेंगी। इससे पहले जयशंकर ने द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए सोवियत नागरिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने रूस के प्रमुख थिंक टैंक के विशेषज्ञों से भी मुलाकात की और भारत की विदेश नीति में हाल के विकास पर चर्चा की।