रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल)
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रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच अभूतपूर्व मानवीय संकट पैदा हुआ। अंतरराष्ट्री समस्या के खिलाफ कई देशों ने आवाज उठाई। देश में भी कई लोगों ने विरोध का स्वर बुलंद किया, लेकिन दो लोगों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रूस के दो नागरिकों को युद्ध के खिलाफ कलम उठाने की सजा मिली है। रूस ने दोनों को लंबे समय के लिए जेल भेज दिया है। एक को साढ़े पांच साल, जबकि दूसरे को सात साल जेल की सजा हुई है।
कोर्ट रूम में सजा के खिलाफ 'शर्म करो' का नारा
खबरों के मुताबिक मॉस्को की एक अदालत ने गुरुवार को यूक्रेन पर हमले के खिलाफ कविताएं पढ़ने के लिए अर्टोम कामार्डिन को सात साल जेल की सजा और येगोर शतोवबा को पांच साल और छह महीने की सजा सुनाई गई। एएफपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सजा का एलान होने के बाद कोर्ट रूम में मौजूद समर्थकों ने 'शर्म करो!' का नारा भी लगाया।
रूस में युद्ध नीति का विरोध गैरकानूनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन में हमले के खिलाफ रूसी सेना और प्रशासन का विरोध करने के आरोप में हजारों लोगों को हिरासत में लिया है। रूस में सैन्य कार्रवाई का विरोध और युद्ध से जुड़ी नीतियों आलोचना को गैरकानूनी घोषित किया गया है।
मॉस्को चौराहे पर कविता पाठ
सजा पाने वाले 33 वर्षीय कामर्डिन ने कहा कि उनकी हिरासत विशेष रूप से हिंसक थी। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने उनके साथ बलात्कार किया और उनकी प्रेमिका को धमकाते हुए उन्हें माफी मांगने वाला वीडियो बनाने के लिए मजबूर किया। गिरफ्तारी की पूर्व संध्या पर उन्होंने मॉस्को चौराहे पर अपनी कविता 'मुझे मार डालो, मिलिशिया आदमी!' (Kill me, militia man!) का पाठ किया था। रूस में इस स्थान को सोवियत काल से ही विरोध का केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में रूसी प्रशासन-सरकार से असंतुष्ट लोग जमा होते रहे हैं।