एक छोटे से बंकर में कई छात्र फंस गए थे।
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कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि यूक्रेन में हजारों लोग रूस की बमबारी से बचने के लिए बंकरों में छिपे हुए हैं। जिन्हें बंकरों में जगह नहीं मिली उन्होंने अंडरग्राउड मेट्रो स्टेशनों में शरण ली। ऐसे में इस बात की दिलचस्पी जगती है कि
आखिर ये बंकर तैयार कैसे होते हैं जिससे युद्ध के समय दुश्मनों से हिफाजत की जा सकती है?
एक सैन्य ढांचे वाले छिपने की जगह को आम तौर पर बंकर कहा जाता है। बंकर अक्सर सरहदों पर मिलते हैं, जो दुश्मनों के हमले से किसी देश की हिफाजत और मोर्चेबंदी का काम करते हैं।
बंकर युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, रसायनों और विकिरण जैसे सभी प्रकार के खतरों के खिलाफ लोगों की रक्षा कर सकते हैं। ये आमतौर पर छुपा कर रखे जाते हैं, ताकि दुश्मनों की नजर उस पर न पड़े।
पहले विश्वयुद्ध के बाद से ही पूरे यूरोप में हजारों की तादाद में बंकर्स हैं। दूसरे विश्वयुद्ध में जब आसमान में बांबर्स प्लेन मौत बनकर घूम रहे थे तब इन्हीं बंकर्स में कई दिनों तक छिप कर लोगों ने अपनी जान बचाई थी।
‘बंकर्स इरा’
यूरोप में इस टाइम पीरियड को बंकर्स इरा भी कहा जाता है। इतना ही नहीं, जर्मनी का तानाशाह हिटलर भी हार के बाद एक बंकर में ही छिप कर बैठा था। जहां उसने दुश्मनों के हाथ आने के डर से खुद को गोली मार ली।
इस बंकर में नहीं होगा परमाणु हमले का भी असर
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अल्बानिया में बने बंकर
- फोटो : Social media
अल्बानिया में बने बंकर
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