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प्रतिबंधों पर रूसी जवाब: 100 साल में नहीं हुआ बौद्धिक संपदा अधिकारों पर ऐसा हमला

Mon, 21 Mar 2022 05:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

अब रूसी अधिकारियों ने कहा है कि पश्चिमी कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का उनके देश में जल्द ही उल्लंघन शुरू हो जाएगा। इससे रूसी कंपनियां कई उत्पादों को सस्ते में अपने देश के उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा पाएंगी। पुतिन के आदेश जारी करने के बाद एक ब्रिटिश कंपनी ने उसे एक रूसी कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी...
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व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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यूक्रेन पर हमले के बाद लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का जवाब देने के लिए रूस ने एक ऐसा कदम उठाया है, जैसा पिछले एक सदी में किसी देश ने नहीं किया। उसने बौद्धिक संपदा अधिकारों को निशाना बनाया है। हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस महीने के आरंभ में ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिया था, लेकिन उसके दूरगामी परिणामों को अब समझा जा रहा है।

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पुतिन ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि रूसी कंपनियां अब ‘अमित्र देशों’ की कंपनियों के पेंटेट को मानने के लिए मजबूर नहीं होंगी। वे उन देशों की कंपनियों की तरफ से रजिस्टर्ड कराए गए यूटिलिटी मॉडल्स और इंडस्ट्रियल डिजाइंस का पालन करने के लिए भी बाध्य नहीं होंगी। इस तरह अमेरिकी और यूरोपीय देशों की कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार अब रूस में मान्य नहीं रह गए हैं। इसका मतलब है कि रूसी कंपनियां पेटेंट या औद्योगिक डिजाइन के बदले पश्चिमी कंपनियों को बिना फीस का भुगतान किए संबंधित वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन कर सकेंगी।

पश्चिमी देश बोले- रूस कर रहा पहले से चोरी

पश्चिमी मीडिया की चर्चाओं में इसे बौद्धिक चोरी (इंटेलेक्चुअल पाइरेसी) को वैध करना बताया गया है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस में ऐसी चोरी पहले से की जा रही थी। पिछले साल अमेरिका सरकार ने रूस को निगरानी वाले देशों की सूची में डाल दिया था। इस सूची में उन देशों को रखा जाता है, जिनके बारे में शक होता है कि वे अमेरिकी कंपनियों की बौद्धिक संपदा का पर्याप्त संरक्षण नहीं कर रहे हैँ।

व्लादिमीर पुतिन ने हालिया कदम पश्चिमी देशों की तरफ से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया है। जानकारों का कहना है कि पिछली एक सदी में किसी देश ने बौद्धिक संपदा पर ऐसा हमला किया हो, उसकी कोई मिसाल नहीं है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जरूर अमेरिका ने अपने दुश्मन देशों की कंपनियों की कॉपीराइट और पेटेंट अधिकारों का पालन न करने के लिए ट्रेडिंग विथ इनमी एक्ट बनाया था। युद्ध के बाद पराजित जर्मन कंपनियों को अपने ट्रेड मार्क अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस की कंपनियों को देने के लिए मजबूर किया गया।

ब्रिटिश कंपनी पहुंची रूसी कोर्ट

अब रूसी अधिकारियों ने कहा है कि पश्चिमी कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का उनके देश में जल्द ही उल्लंघन शुरू हो जाएगा। इससे रूसी कंपनियां कई उत्पादों को सस्ते में अपने देश के उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा पाएंगी। पुतिन के आदेश जारी करने के बाद एक ब्रिटिश कंपनी ने उसे एक रूसी कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।

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अब ये सवाल उठाया गया है कि क्या रूस का ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। क्या इससे अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन हुआ है। रूस भी उन देशों में शामिल है, जिसने विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के गठन के लिए हुई संधि पर दस्तखत किए थे। बताया जाता है कि कुछ देश इस रूसी आदेश को डब्ल्यूटीओ में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि रूसी विशेषज्ञों का कहना है कि रूस सुरक्षा संबंधी अपवाद के प्रावधान के आधार पर अपने इस कदम का डब्ल्यूटीओ में बचाव करने की स्थिति में है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब इस प्रावधान का डब्ल्यूटीओ में किसी देश ने सहारा नहीं लिया है। इसलिए यह देखने की बात होगी कि इस मामले में डब्ल्यूटीओ के जज क्या फैसला देते हैँ।

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