एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, रूस के ऊर्जा उप मंत्री सर्गेई मोकानिकोव और आर्थिक विकास मंत्रालय के मैक्सिम रेशेतनिकोव के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री मंत्री सर्वानंद सोनोवाला के साथ एक बैठक के दौरान इस कॉरिडोर को लेकर रूस की राय से अवगत कराया। सोनोवाल आठवीं पूर्वी आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ व्लादिवोस्तोक में हैं।
इस दौरान सोनोवाल ने उन्हें चेन्नई में पूर्वी समुद्री गलियारे पर भारत-रूसी कार्यशाला के लिए आमंत्रण दिया। ताकि रूस के सुदूर पूर्व और भारत के बंदरगाह अधिकारियों, रूसी रेलवे और शिपिंग कंपनियों, कोकिंग कोयला व्यापार ट्रांसपोर्टरों के बीच आदि के बीच इस इस गलियारे पर मंथन हो सके। यह कार्यशाला 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2023 तक चेन्नई में प्रस्तावित है।
नए युग की होगी शुरुआत
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि पूर्वी समुद्री गलियारे से भारत-रूस के बीच व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत होगी। सोनोवाल ने कहा कि 2015 में समुद्र तट और जलमार्गों की पूरी क्षमता के इस्तेमाल के उद्देश्य के साथ सागरमाला पहल शुरू की गई थी। अभी इसके तहत 2035 तक कार्यान्वयन के लिए 65 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की 802 परियोजनाएं हैं, जिनमें 14.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की 228 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
परिवहन समय घटेगा, समुद्री कारोबार बढ़ेगा
- दोनों देशों के बीच समुद्र के रास्ते कारोबार का समृद्ध इतिहास रहा है। यह कॉरिडोर विकास और निवेश सहयोग के साथ समुद्री कारोबार में अपार संभावनाएं बढ़ाएगा।
- अभी यूरोप के रास्ते भारत से सुदूर पूर्व रूस तक माल परिवहन में तकरीबन 40 दिनों का समय लगता है जो इस कॉरिडोर के बनने से घटकर 24 दिन ही रह जाएगा।
- मुंबई और रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के बीच मौजूदा व्यापार मार्ग 8,675 समुद्री मील का है और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग में यह दूरी 5,600 समुद्री मील रह जाएगी।
- यानी 20-25 नॉट (37-46 किमी/घंटा) की सामान्य क्रूजिंग गति से सफर करने वाला एक बड़ा कंटेनर जहाज इस दूरी को 10 से 12 दिनों में तय करने में सक्षम होगा।