संधि का लक्ष्य पारस्परिक सीमाओं पर या उसके पास सैनिकों को जमा करने से शीत युद्ध के प्रतिद्वंद्वी देशों को रोकना था। संधि पर नवंबर 1990 में हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन इसके दो साल बाद तक इसका पूर्ण अनुमोदन नहीं किया गया था।
रूस शीतयुद्ध के दौर के एक अहम सुरक्षा समझौते से खुद के बाहर होने का इरादा जाहिर करने के आठ साल बाद मंगलवार को इससे अलग हो गया। ‘यूरोप में पारंपरिक सशस्त्र बल संधि’ की राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से निंदा करते हुए प्रस्तावित विधेयक को रूसी संसद ‘ड्यूमा’ के दोनों सदनों की ओर से मंजूरी दिए जाने के बाद यह घटनाक्रम हुआ।
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि संधि से औपचारिक रूप से बाहर होने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसने अमेरिका और इसके सहयोगी देशों को अपने इस कदम के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा, हमने यूरोप में पारंपरिक शस्त्र नियंत्रण की व्यवहार्यता को बहाल करने के तरीकों पर वार्ता के लिए द्वार खुले रखे थे। लेकिन हमारे विरोधियों ने इस अवसर का लाभ नहीं उठाया।
संधि का लक्ष्य पारस्परिक सीमाओं पर या उसके पास सैनिकों को जमा करने से शीत युद्ध के प्रतिद्वंद्वी देशों को रोकना था। संधि पर नवंबर 1990 में हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन इसके दो साल बाद तक इसका पूर्ण अनुमोदन नहीं किया गया था। रूस-अमेरिकी भागीदारी वाले शीत युद्ध के दौर की कई बड़ी संधियों में से यह एक है।