रूस यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) को एक अधिक ठोस राजनीतिक और आर्थिक गुट बनाने की कोशिशों में जुट गया है। बताया जाता है कि पश्चिमी देशों की तरफ से उस पर बढ़े दबाव के बाद रूस ने ये कोशिश शुरू की। इसके तहत ईएईयू में शामिल देश अपने बीच कारोबार शुल्क घटाने और बाकी नीतियों में तालमेल बनाने पर विचार कर रहे हैं। इस समूह में रूस, अर्मेनिया, बेलारूस, कजाखस्तान और किर्गीजस्तान शामिल हैं।
बीती एक जुलाई को इन देशों ने वर्क विदाउट बॉर्डर नाम के सिस्टम की शुरुआत की। यह एक डिजिटल प्लैटफॉर्म है, जिसके जरिए ईएईयू में शामिल पांचों देशों के लोग रोजगार ढूंढ सकेंगे और किसी दूसरे देश में जाकर काम कर सकेंगे। एक जुलाई से यह शुरुआत भी हुई कि इन पांचों देशों में दवाएं समान नियमों के तहत रजिस्टर्ड की जाएंगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूरोपियन यूनियन (ईयू) की तरह ही ईएईयू के सदस्य देश भी अपनी संप्रभुता के कुछ हिस्से ईएईयू को सौंप रहे हैं।
इस बीच ये खबर भी है कि ईएईयू और इंडोनेशिया के बीच मुक्त व्यापार समझौते की संभावना का अध्ययन करने पर सहमति बन गई है। ये अध्ययन अगले सितंबर से शुरू हो जाएगा। इससे साफ है कि ईएईयू देशों का मकसद मुक्त कारोबार को खुद तक सीमित रखना नहीं है। बल्कि वे आने वाले समय में आसपास के और भी देशों को खुद से जोड़ने की कोशिश करेंगे। वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में ईएईयू देशों और इंडोनेशिया के बीच आपसी व्यापार 2.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इंडोनेशिया ने एक अरब डॉलर का निर्यात इन देशों को किया। जबकि उसने इन देशों से 1.28 अरब डॉलर की सामग्री का आयात किया।
जानकारों के मुताबिक इसके बावजूद ये कहना मुश्किल है कि ईएईयू में शामिल देश एक मजबूत आर्थिक ताकत हैं। गौरतलब है कि रूस और कजाखस्तान आज भी अपने तेल और गैस निर्यात पर निर्भर हैं। उधर बेलारूस इन देशों से ऊर्जा आयात पर निर्भर है। किर्गीजस्तान मध्य एशिया के सबसे गरीब देशों में एक है। 2018 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अर्मेनिया को कैसकस क्षेत्र का सबसे गरीब देश बताया था। ऐसी सूरत में इन देशों के बीच आपसी व्यापार से उन्हें कोई बहुत ज्यादा ताकत हासिल नहीं होगी।
मगर पर्यवेक्षकों का कहना है कि रूस की योजना ईएईयू में शामिल बाकी देशों को साथ लेकर एशिया-पैसिफिक इकॉनमिक को-ऑपरेशन (एपेक) के साथ मुक्त व्यापार की तरफ बढ़ना है। एपेक में 21 देश शामिल हैं। रूस एपेक का सदस्य है। माना जा रहा है कि ईएईयू को इससे जोड़ने पर इस संगठन के बीच रूस का वजन बढ़ेगा। एपेक देशों का दुनिया के कुल जीडीपी में योगदान 60 फीसदी है। उधर मध्य एशिया में रूस उज्बेकिस्तान के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। फिलहाल, क्यूबा और माल्दोवा के साथ-साथ उज्बेकिस्तान को भी ईएईयू में पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है।
रूस का कहना है कि वह पूर्व सोवियत राज्यों के साथ पारस्परिक लाभ का संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है। इसमें उसे कजाखस्तान का पूरा साथ मिल रहा है। पूर्व कजाख राष्ट्रपति नूर सुल्तान नजरवायेव ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘पश्चिमी देश नहीं चाहते कि मध्य एशियाई देश एकजुट हों। वे हमें रूस और चीन से अलग करना चाहते हैं।’ नजरबायेव अब राष्ट्रपति नहीं हैं, लेकिन कजाखस्तान में उन्हें आज भी एक प्रभावशाली नेता माना जाता है। बताया जाता है कि ईएईयू को अधिक सक्रिय और ठोस संगठन बनाने में वे रूस का पूरा साथ दे रहे हैं।