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सड़क पर संघर्ष : 25 तस्वीरों में देखें यूक्रेन का मंजर, रूस ने रिहाइशी इमारतों पर दागीं मिसाइलें, लोगों ने उठाईं राइफलें

Sun, 27 Feb 2022 04:32 AM IST
Jeet Kumar न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, कीव/संयुक्त राष्ट्र/वाशिंगटन।

सार

दो दिनों के घमासान के बाद हुई झड़पों में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं और पुलों, विद्यालयों और अपार्टमेंट की इमारतों को भारी नुकसान हुआ है। धमाकों और बंदूकों की आवाज से दहल रहे कीव का भविष्य अधर में है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
रूसी सैनिकों ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर धावा बोल दिया। अफसरों ने लोगों से छिपने की अपील भी की लेकिन सड़कों पर घमासान शुरू हो गया। हालात बेहद आक्रामक हैं और देश में आम नागरिकों ने राइफलें थाम ली हैं और वे जंग को तैयार हैं। जबकि तबाही की आशंका में हजारों लाखों लोगों का पलायन भी जारी है। रोमानिया, पोलैंड, मोलडोवा स्लोवाकिया और हंगरी में शरण ले रहे हैं। 

राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने युद्धविराम की अपील कर अपने हताश बयान में कहा, देश के कई शहरों पर हमले हो रहे हैं। शनिवार को रूसी सेना ने यूक्रेन के मेलितोपोल शहर पर कब्जे का दावा किया लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं कि युद्ध में यूक्रेन का कितना हिस्सा किसके नियंत्रण में है। 

हालांकि यूक्रेन की रिहाइशी इमारतों पर शनिवार को मिसाइलें दागने का दावा भी यूक्रेनी प्रशासन ने किया है। इस बीच राइफल थामे यूक्रेनी सड़कों पर गोलियां चला रहे हैं। एक तेज रफ्तार बख्तरबंद वाहन से रूसियों द्वारा चलाई गई गोलियों के चलते एक नागरिक की मौत हो गई है। यूक्रेन ने 18 से 60 साल के लोगों से संघर्ष का आग्रह किया है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध। - फोटो : ANI
ट्रेनों से खींचकर उतारे गए पलायन करते पुरुष
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी ‘यूएनएचसीआर’ के अनुमान के मुताबिक यूक्रेन में एक लाख से ज्यादा लोगों ने घर छोड़ दिया है। एजेंसी को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़े तो करीब 40 लाख लोग दूसरे देशों में शरण लेने मजबूर हो सकते हैं। फिलहाल यूक्रेन से पलायन कर  रहे लोग रोमानिया, पोलैंड, मोलडोवा स्लोवाकिया और हंगरी में शरण ले रहे हैं। खबरें हैं कि पुरुषों को देश की सीमा से बाहर जाने से रोका जा रहा है। कई पुरुषों को सीमा पार जाती ट्रेनों से खींचकर बाहर निकाला गया ताकि वे रूसी सेना से मुकाबला कर सकें। बच्चों और महिलाओं को पलायन करने दिया जा रहा है। 
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यूक्रेन में मार्शल लॉ का एलान - फोटो : पीटीआई
यूक्रेन की महिला सांसद कीरा ने उठाई राइफल
यूक्रेन की रक्षा करने के लिए अब सांसदों ने भी हथियार उठा लिए हैं। शनिवार को यूक्रेन की एक सांसद कीरा रूडिक ने अपनी एक तस्वीर ट्विटर पर साझा की जिसमें वह बंदूक पकड़े हुए नजर आ रही हैं। 36 वर्षीय महिला सांसद वॉयस पार्टी की सदस्य और 2019 से सांसद हैं। 

रूडिक ने सीएनएन को बताया कि हमें कलाश्निकोव राइफलें दी गईं और अगर रूसी सेना कीव में घुसी तो हम उनसे मुकाबला करेंगे। मुझे नहीं पता कि आप सुन पा रहे हैं या नहीं लेकिन मेरे पीछे यहां गोलीबारी हो रही है। कीरा ने कहा कि यहां रुकना मेरा दायित्व है। मैंने और मेरी सहयोगी ने हथियार उठा लिए हैं। सांसद बनने से पहले कीरा स्मार्ट सिक्योरिटी कंपनी ‘रिंग’ में सीओओ थीं, जिसे 2018 में अमेजन ने अधिकृत कर लिया।

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यूक्रेन में युद्ध के हालात बीच राजधानी कीव में एक कार चालक को रोककर पूछताछ करता एक पुलिसकर्मी। - फोटो : PTI
रूसी सैनिकों को रोकने के लिए पुल के साथ खुद को बम से उड़ाया
रूस-यूक्रेन में जारी जंग के बीच एक यूक्रेनी बहादुर सैनिक की जमकर चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन सेना के जवान विटाली वलोडिमिरोविच शाकुन ने रूसी सैनिकों को अपने देश में घुसने से रोकने के लिए पुल के साथ खुद को भी बम से उड़ा लिया। 

दरअसल, रूसी सेना जब क्रीमिया के पास खेर्सन इलाके में तेजी से बढ़ रही थी तब विटाली ने खुद आगे बढ़कर उस पुल को उड़ा दिया जिसके जरिये रूसी सैनिक शहरी इलाके में पहुंच सकते थे। विटाली क्रीमियाई इस्तमुस पर मरीन की एक बटालियन में एक इंजीनियर था। पुल को उड़ाने का काम विटाली ने स्वेच्छा से किया है।
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यूक्रेन ने पकड़े रूस के सैनिक - फोटो : witter/DmytroKuleba
रोम स्थित रूसी दूतावास पहुंचे पोप, जंग पर जताई चिंता
ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने असाधारण पहल करते हुए रोम स्थित रूसी दूतावास जाकर यूक्रेन में जारी जंग रोकने की अपील की और युद्ध को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। इसके बाद पोप ने यूक्रेन के एक शीर्ष ग्रीक कैथोलिक नेता को आश्वासन दिया कि वह इस युद्ध को रोकने के लिए जो कुछ कर सकते हैं, करेंगे। 

पोप की इस पहल को इसलिए असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि आम तौर पर सभी राष्ट्राध्यक्ष और राजनयिक पोप से मुलाकात करने के लिए वेटिकन आते हैं। कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत वेटिकन के विदेश मंत्री को रूस के राजदूत को तलब करना चाहिए था। लेकिन वे खुद रूसी दूतावास पहुंचे।
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यूक्रेन के पूर्व हैवीवेट चैंपियन और कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को आधिकारिक तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध में शामिल हो गए हैं। - फोटो : Twitter : @Fentuo_
मतभेद दूर करने के लिए बातचीत ही ‘एकमात्र रास्ता’ : भारत
भारत ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के ‘आक्रामक बर्ताव’ की कड़े शब्दों में निंदा करने वाले यूएनएससी के प्रस्ताव पर हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से पेश किया गया था। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने युद्ध को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में अमेरिका और अल्बानिया द्वारा पेश मसौदा प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इसे ऑस्ट्रेलिया, एस्टोनिया, फिनलैंड, जॉर्जिया, जर्मनी, इटली, सहित संयुक्त राष्ट्र के 67 सदस्य देशों के एक ‘क्रॉस रीजनल’ समूह ने सह प्रस्तावित किया था। 
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यूक्रेन में सेना के एक ट्रक को बम से उड़ाए जाने के बाद मौके का मुआयना करता जवान। - फोटो : PTI
भारत, चीन और यूएई मतदान से दूर रहे
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यूक्रेन संकट को लेकर हुई आपात बैठक के दौरान भारत, चीन और यूएई मतदान से दूर रहे। वहीं अल्बानिया, ब्राजील, फ्रांस, गाबोन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको, नार्वे, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पारित नहीं हो सका क्योंकि परिषद के स्थायी सदस्य रूस ने इस पर वीटो किया। तिरुमूर्ति ने मतदान पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा, यूक्रेन के हालिया घटनाक्रम से भारत बेहद विचलित है। हम अपील करते हैं कि सारे प्रयास हिंसा और युद्ध को तत्काल रोकने की दिशा में होने चाहिए।

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पोलैंड की कोर्कजोवा सीमा पर यूक्रेन से आए शरणार्थियों का मार्गदर्शन करता एक जवान। - फोटो : PTI
भारत ने इसलिए बनाई दूरी
संयुक्त राष्ट्र में तिरुमूर्ति ने कहा, लोगों की जिंदगी की कीमत पर कोई भी हल नहीं निकल सकता। उन्होंने खेद जताया कि कूटनीति का रास्ता त्याग दिया गया है। हमें उस पर लौटना चाहिए और इन्हीं कारणों से भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान से दूरी बनाने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा, सभी सदस्य देशों को रचनात्मक रास्ता तलाशने के लिए इन सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।

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यूक्रेन की राजधानी कीव में सड़क किनारे एक सैन्य ट्रक के जलने के बाद हथगोले एकत्र करता एक जवान। - फोटो : PTI
भारत-रूस के संबंध अमेरिकी-रूसी रिश्तों से अलग : अमेरिका
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में यूक्रेन पर रूस के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव पर मतदान से बाहर रहने को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने कहा है कि भारत-रूस के रिश्ते अमेरिकी और रूसी संबंधों से अलग हैं। इसमें परेशानी को कोई बात नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, भारत के साथ अमेरिका के अहम हित और मूल्य जुड़े हुए हैं।

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यूक्रेन में जंग के बीच के सिपाही। - फोटो : PTI
नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाएं
इसके साथ ही अमेरिका ने कहा है कि उसने रूस के साथ संबंध रखने वाले हर देश से नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को कहा है। प्राइस ने कहा, भारत के साथ हमारे अहम हित जुड़े हुए हैं। हम भारत के साथ अहम मूल्य साझा करते हैं, और हम जानते हैं कि भारत-रूस संबंध उन रिश्तों से अलग हैं जो हमारे और रूस के बीच हैं। और सही में इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है। 

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यूक्रेन की सड़क पर जारी संघर्ष के दौरान मीडिया कर्मी को तस्वीर लेने से रोकता एक जवान। - फोटो : PTI
संबंधों का रचनात्मक इस्तेमाल करें
उन्होंने कहा, भारत के रूस से मजबूत रिश्ते हैं, जो हमारे यकीनन नहीं हैं। भारत-रूस में रक्षा-सुरक्षा के क्षेत्र में संबंध हैं, जो हमारे बीच नहीं हैं। हमने हर देश से कहा है कि जिनके संबंध हैं और जो लाभ ले सकते हैं वे उसका इस्तेमाल रचनात्मक तरीके से करें। प्राइस ने कहा कि अमेरिका की भारत के साथ व्यापक रणनीति साझेदारी है।

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यूक्रेन से पलायन करते लोग। - फोटो : PTI
भारतवंशी सांसद रो खन्ना भारत के फैसले से नाखुश
प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर भारत द्वारा यूएनएससी के प्रस्ताव पर हुए मतदान में भाग न लेने पर नाखुशी जताई। उन्होंने कहा, चीन की मौजूदा विस्तारवादी योजनाओं के खिलाफ नई दिल्ल के साथ अमेरिका खड़ा रहेगा न कि रूस। खन्ना ने ट्वीट किया, राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी भी 1962 में चीन के आक्रमण के खिलाफ भारत के साथ खड़े रहे थे। भारत के लिए पुतिन के खिलाफ स्वतंत्र आवाज उठाने का वक्त आ गया है। इससे दूर रहना स्वीकार्य नहीं है।

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यूक्रेन में बम फटने के बाद उठता धुआं। - फोटो : PTI
अमेरिका ने पुतिन, रूसी विदेश मंत्री लावरोव पर प्रतिबंध लगाए
अमेरिका ने एक असाधारण कदम उठाते हुए रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव पर प्रतिबंध लगाए हैं। साथ ही उन्हें यूक्रेन पर बिना उकसावे के और गैरकानूनी रूप से हमला करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार भी ठहराया। रूस की सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि ये ताजा प्रतिबंध उन कार्रवाइयों से संबद्ध हैं जिसके तहत अमेरिका और उसके साझेदारों ने इस सप्ताह मॉस्को के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों के खिलाफ प्रतिबंधों समेत रूस की वित्तीय प्रणाली के अहम ढांचे को निशाना बनाया था। बयान के मुताबिक, अमेरिका ने अपने सहयोगियों तथा साझेदारों के साथ मिलकर पुतिन तथा लावरोव पर प्रतिबंध लगाकर यूक्रेन पर रूस द्वारा अनुचित, बिना उकसावे के और पूर्व नियोजित हमले की बलपूर्वक प्रतिक्रिया देना जारी रखा है।

कहा, पुतिन -लावरोव लोकतांत्रिक रूप से संप्रभु देश यूक्रेन पर रूस द्वारा बिना उकसावे के और गैरकानूनी तरीके से हमला करने के लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार हैं। अमेरिका ने रूसी रक्षामंत्री सर्गेइ शोइगु और रूसी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, प्रथम रक्षा उपमंत्री और सेना के जनरल वैलरी गेरासिमोव पर भी प्रतिबंध लगाए।

छोटे समूह में शामिल हुए पुतिन
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का किसी देश के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाना बेहद दुर्लभ मामला है। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति पुतिन, उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन जैसे तानाशाह समेत बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंका और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के छोटे से समूह में शामिल हो गए हैं। वित्तमंत्री जेनेट एल येलेन ने कहा, हम रूस पर और प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं।

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यूक्रेन में जारी जंग के दौरान सेना के जवान। - फोटो : PTI
यूक्रेन के 1.2 लाख नागरिकों ने सीमापार कर पोलैंड में ली शरण
रूसी सैनिकों की राजधानी कीव में बढ़ती तादाद के बीच यूक्रेन के करीब 1.20 लाख नागरिक देश की सीमा पार कर पड़ोसी मुल्क पोलैंड में शरण ले चुके हैं। पोलैंड ने संकट के इस दौर में बिना किसी शर्त यूक्रेन के नागरिकों को अपने यहां शरण दी है। पड़ोसी मुल्कों में शरण की आस लेकर कई लोग पूरी रात मीलों पैदल चलकर सीमा तक पहुंचे। सरकार ने सीमाओं पर खास कैंप लगाए हैं जो इन नागरिकों की सीमा पार जाने में मदद कर रहे हैं। 

इनमें से कई के रिश्तेदार, करीबी जो दूसरे देशों में हैं अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए इन कैंपों मे पहुंचे। मुश्किल वक्त से गुजर रहे यूक्रेन के साथ कई पश्चिमी देश खड़े हैं। एक सरकारी एजेंसी के मुताबिक पोलैंड समेत अन्य पड़ोसी देशों में शरण लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लोग जैसे मौका लग रहा है सीमाओं की ओर बढ़ रहे हैं। 

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रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तबाह हुई इमारत। - फोटो : PTI
20 घंटे इंतजार के बाद रोमानिया पहुंची
एक परिवार ने पश्चिमी यूक्रेन के चेर्नेवित्सि में 20 घंटे से अधिक समय तक इंतजार किया। इसके बाद उसे सीमा पार कर रोमानिया के साइरेट पहुंचने का मौका मिला। यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में शरण ले रहे इन परिवारों के बच्चों का बुरा हाल है। अपने बड़ों, दादा दादी व नाना नानी को छोड़कर जाना इनके लिए कष्टकारी है। सीमा पर इन बच्चों को अपने घर और बड़े बूढ़ों के लिए रोते बिलखते देखा गया। 

इन देशों में ले रहे शरण
यूक्रेन के लोग पोलैंड, मोलडोवा, हंगरी, रोमानिया और स्लोवाकिया में शरण ले रहे हैं। सबसे ज्यादा लोग पोलैंड पहुंचे हैं। वहीं कुछ ने बेलारूस में भी शरण ली है। हालांकि बेलारूस से भी कुछ रूसी सैनिक यूक्रेन में घुसे हैं। 

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युद्ध के दौरान जवान। - फोटो : PTI
यूक्रेन को 35 करोड़ डॉलर के हथियार देगा अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय को शुक्रवार को निर्देश दिया कि अमेरिकी शस्त्र भंडार से यूक्रेन को 35 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त हथियार मुहैया कराए। बाइडन ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को विदेश सहायता कानून के तहत यूक्रेन को अपनी रक्षा करने के लिए ये हथियार देने के लिए कहा है। ब्लिंकन ने कहा कि यूक्रेन को हथियारों की यह तीसरी मंजूरी अभूतपूर्व है। इसके तहत एंटी आर्मर, छोटे हथियार, बख्तरबंद कवच और कई तरह की अन्य युद्ध सामग्री भेजी जाएगी।

वहीं, यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से जेवलिन एंटी टैंक सिस्टम और स्टिंगर मिसाइलों की मांग की है ताकि रूसी विमानों को मार गिराया जा सके। इस मांग पर अमल करते हुए जर्मनी ने यूक्रेन को 1000 एंटी टैंक सिस्टम और 500 स्टिंगर मिसाइलें देने की घोषणा की है। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने कहा, यूक्रेन पर रूसी हमला एक टर्निंग प्वाइंट है। पुतिन की हमलावर सेना के खिलाफ अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को हर संभव सहायता देना हमारा कर्तव्य है।

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युद्ध की वजह से खस्ताहाल हुई इमारत। - फोटो : PTI
हथियार न उठाएं यूक्रेनी: रूस
यूक्रेन की राजधानी पर कब्जे का इंतजार लंबा होते देख रूस ने शनिवार को यूक्रेनी नागरिकों को धमकी दी है कि वह हथियार उठाने की अपने राष्ट्रपति की अपील पर अमल न करें अन्यथा उन्हें परिणाम भुगतना पड़ेगा। इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन की सेना से बगावत करने का आह्वान किया था। दूसरी ओर कीव में सेना में भर्ती होने वाले यूक्रेनी नागरिकों की कतार लंबी होती जा रही है।

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युद्ध के दौरान एक जवान। - फोटो : PTI
डेनमार्क के रिपोर्टर-फोटोग्राफर की गोली लगने से मौत
पूर्वी यूरोप रिपोर्टिंग करने गए डेनमार्क के टेबलॉयड इकस्त्रा-ब्लाडेटके एक फोटोग्राफर और पत्रकार की शुक्रवार सुबह गोलियां लगने से मौत हो गई। टेबलॉयड में छपी खबर के मुताबिक, उसके पत्रकार स्टीफन वीचर्ट और फोटोग्राफर ईमिल फिल्टेनबोर्ग मिक्किलसेन खरकीव शहर से करीब 90 किलोमीटर दूर ओहटिरक शहर के पास कार से जा रहे थे। तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। डेनमार्क के विदेश मंत्री जोप्पे कोफोड ने इस घटना के संबंध में ट्विटर पर कहा कि यह इस बात का सूचक है कि पत्रकारिता किस कदर खतरनाक होती जा रही है। यूक्रेन में खबरें पहुंचाने के लिए कम कर रहे पत्रकारों का जीवन हर पल संकट में है।

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युद्ध के दौरान जवान। - फोटो : PTI
बंकरों में छिपे भारतीय छात्रों का दृश्य विचलित करने वाला: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूक्रेन में युद्ध के बीच भारतीय छात्रों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया, बंकरों में छिपे भारतीय छात्रों के दृश्य विचलित करने वाले हैं। कई छात्र भारी हमले की चपेट वाले पूर्वी यूक्रेन में फंसे हैं। मैं उन छात्रों के चिंतित परिवार के सदस्यों के साथ खड़ा हूं। मैं दोबारा भारत सरकार से इन छात्रों को तत्काल वापस लाने की व्यवस्था करने की अपील करता हूं।

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सैटेलाइट तस्वीर में नीपर नदी के किनारे का दृश्य। - फोटो : ANI
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
अमेरिका की एक निजी कंपनी ने सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से खुलासा किया है कि रूस ने यूक्रेन पर काफी हद तक कब्जा जमा लिया है। शनिवार को ली गईं ताजा सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि रूस ने यूक्रेन के नोवा काखोवका में नीपर नदी पर काखोवका जलविद्युत संयंत्र के पास अपनी सेना के जवानों को एकत्र किया है। 

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युद्ध के दौरान उजड़ा घर। - फोटो : PTI
बाइडन ने मांगे संसद से साढ़े छह अरब डॉलर
बाइडन प्रशासन ने रूसी हमले के खिलाफ शुरुआती मदद के लिए अमेरिकी संसद से 6.4 अरब डॉलर मांगे हैं। बताया जा रहा है कि इस राशि का मोटे तौर पर सैन्य और मानवीय सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार रक्षा विभाग के लिए 3.5 अरब डॉलर तो यूक्रेन, पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोपीय देशों में अमेरिकी सहायता व अन्य कार्यक्रमों के लिए 2.9 अरब डॉलर का आवंटन चाहती है। इस राशि का मानवीय, ऊर्जा और आर्थिक सहायता व रूसी साइबर हमलों को नाकाम करने के लिए भी उपयोग किया जाना है। हालांकि, पहले यह सहायता 10 अरब डॉलर के आसपास बताई जा रही थी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : PTI
चेक गणराज्य: 85 लाख डॉलर के हथियार और गोला-बारूद भेजेगा
चेक रक्षा मंत्रालय ने कहा, यूक्रेन को भेजे जाने वाले सैन्य साजो-सामान में मशीन गन, असॉल्ट राइफलें और अन्य हल्के हथियार शामिल हैं। आगे भी सैन्य मदद जारी रहेगी। स्लोवाकिया भी 26 लाख यूरो के सैन्य साजो-सामान भेजेगा।

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यूक्रेन-रूस यु्द्ध के बीच लौटे भारतीय। - फोटो : PTI
नीदरलैंड 200 हवाई रक्षा रॉकेट पहुंचाएगा
नीदरलैंड जल्द से जल्द यूक्रेन की हवाई रक्षा मजबूत करेगा। शनिवार को सरकार ने संसद में बताया, यूक्रेन के आग्रह के बाद नीदरलैंड उसे 200 हवाई रक्षा रॉकेट मुहैया कराने जा रहा है। इससे पहले राइफल, रडार सिस्टम, माइन डिटेक्शन रोबोट समेत अन्य कई उपकरण व हथियार कीव की मदद के लिए भेजे जा चुके हैं। नीदरलैंड सरकार कहा, वह अपने दूतावास कर्मचारियों को पश्चिमी यूक्रेन से निकालकर पोलैंड के ज़ारोस्ला में तैनात करने जा रही है।

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यूक्रेन-रूस यु्द्ध के बीच फंसे बेटे से वीडियो कॉल पर बात करते भारतीय मां-बाप। - फोटो : pti
आक्रमण रोकने वाले उपकरण देगा फ्रांस 
फ्रांस सरकार ने आक्रमण रोकने वाले सैन्य उपकरण देने का वादा किया है। वहीं, हमला करने वाले हथियार भेजने पर अभी विचार किया जा रहा है। फ्रांस के सैन्य प्रमुख के प्रवक्ता ने कहा कि इस वक्त यूक्रेन को हथियार, उपकरणों की आपूर्ति काफी मुश्किल हो रही है।
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यूक्रेन-रूस विवाद पर रेत से आकृति बनाता कलाकार। - फोटो : PTI
टेनिस खिलाड़ी सर्गेई सेना में भर्ती
यूक्रेन में टेनिस के खिलाड़ी यूक्रेन के टेनिस खिलाड़ी सर्गेई स्टाखोवस्की का कहना है कि वह रूस के आक्रमण से लड़ने के लिए अपने देश की सैना में शामिल हो गए हैं। इधर, प्रतिबंध लगाए जाने के बाद एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि रूस अब वैश्विक तौर आर्थिक और वित्तीय स्थिति के मामले में अलग-थलग पड़ गया है।
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