फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रूस-अमेरिका शिखर वार्ता : बाइडन व पुतिन शिखर वार्ता में अपने  राजदूतों को वापस भेजने पर सहमत

Thu, 17 Jun 2021 05:17 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन के लिए बुधवार को जिनेवा के लेकसाइड विला में थे। इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच वार्ता हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं। बैठक के बाद प्रेसवार्ता में पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस साइबर सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श शुरू करेंगे। पुतिन के बाद जो बाइडन प्रेसवार्ता कर रहे हैं। बैठक शुरू होने से पहले दोनों नेता कुछ समय के लिए मीडिया के समक्ष आए थे और इसे दो महान शक्तियों के बीच की बैठक करार देते हुए कहा था कि आमने-सामने की बैठक हमेशा बेहतर होती है।
विज्ञापन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच पहली शिखर वार्ता संपन्न हो गई। बुधवार को करीब चार घंटे तक चली वार्ता के दौरान दोनों नेताओं के बीच रूस और अमेरिका में तनाव के मुद्दों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। विश्व के दो शीर्ष नेताओं की बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित बैठक के साथ ही बाइडन का एक हफ्ते का यूरोपीय दौरा भी समाप्त हो गया। दोनो नेता पहली शिखर वार्ता में इस बात पर राजी हुए कि दोनों देश अपने-अपने राजदूतों को एक दूसरे की राजधानियों में वापस भेजेंगे। गौरतलब है कि तल्खी के बीच दोनों देशों ने अपने-अपने राजदूतों को इस साल के शुरू में बुला लिया था।

विज्ञापन


बाइडन ने कहा कि वह पारंपरिक गठबंधनों को फिर से मजबूत करना चाहते हैं, जो शीत युद्ध के दिनों में अमेरिका की स्थिति को सुदृढ़ करते थे। बैठक से पहले स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गव पारमेलिन ने दोनों नेताओं का स्वागत किया और उन्हें सफल बातचीत की शुभकमानाएं दीं। बैठक के बाद 78 वर्षीय अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ‘दो महान शक्तियों’ ने उम्मीद से पहले ही बैठक संपन्न की। चार घंटे तक चली बैठक दो हिस्सों में हुई। बैठक के दूसरे हिस्से में 65 मिनट की बातचीत में दोनों पक्षों के अधिकारी भी शामिल रहे। पुतिन और बाइडन बैठक कक्ष में जाने से पहले हाथ हिलाकर अभिवादन किया। वहीं बैठक स्थल से वापस लौटते से बाइडन में पत्रकारों को थम्प्स अप किया।

अमेरिका और रूस के बीच स्विट्जरलैंड की राजधानी में शिखर वार्ता शुरू होने से पहले दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस दौरान दोनों देशों को महाशक्तियों के रूप में वर्णित किया। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, आमने-सामने मिलना हमेशा बेहतर रहता है।
विज्ञापन


बाइडन ने कहा, मॉस्को की स्थिति उल्लेखनीय है और अमेरिका के साथ ज्यादा स्थिर संबंध बनाने के लिए काम जारी रहना चाहिए। बाइडन ने अमेरिका और रूस को विश्व की दो महान शक्तियां बताया। पुतिन के साथ अपने शिखर सम्मेलन की शुरुआत में बाइडन का रूस को महान शक्ति कहना इसलिए भी अहम है क्योंकि वे पूर्व में मॉस्को को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में बताते रहे हैं। बैठक से पहले बाइडन से रूस के बारे में तीन सवाल पूछे गए। पहला- रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नावेलनी पर उनका क्या रुख है? दूसरा- यूक्रेन यदि नाटो में शामिल हुआ तो अमेरिका क्या करेगा? और तीसरा- क्या वे पुतिन पर भरोसा करते हैं? इस पर बाइडन ने सिर हिलाया और वे अपने दस्तावेजों की तरफ देखने लगे। बैठक के दौरान दोनों नेता गंभीर होकर एक-दूसरे से आपसी और वैश्विक समस्याओं पर बात करने लगे।

वार्ता से पहले पुतिन ने की चीन की तारीफ 
बहुप्रतीक्षित शिखर वार्ता से एक दिन पूर्व बाइडन ने जहां पुतिन को ‘काबिल विरोधी’ बताया वहीं रूसी राष्ट्रपति ने भी बैठक से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ की और परोक्ष रूप से अमेरिका के को चेताया। बाइडन ने न्यूयॉर्कर पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में रूस के राष्ट्रपति से उनकी अमेरिका के उपराष्ट्रपति रहते हुए होने वाली मुलाकात पर कहा था, मैं आपकी आंखों में देख रहा हूं और मुझे नहीं लगता कि आपकी कोई आत्मा भी है। इसके 10 साल बाद पुतिन को भले ही वह घटना याद नहीं रहने का वे दावा कर रहे हैं लेकिन उन्होंने अमेरिका का जिक्र करते हुए प्रतिद्वंद्वी चीन की तारीफ की। बता दें कि यह शिखर वार्ता ऐसे वक्त पर हो रही है, जब दोनों देशों के नेताओं का मानना है कि अमेरिका-रूस के रिश्ते पहले कभी इतने खराब नहीं रहे। बाइडन ने अमेरिकी हितों पर रूस समर्थित हैकरों के साइबर हमलों को लेकर पुतिन की कई बार आलोचना की है, जबकि पुतिन का कहना है कि उनके देश ने न तो अमेरिकी चुनाव में दखल दिया और न ही किसी प्रकार के साइबर हमले किए।

साइबर हमले व मानवाधिकार मुद्दे उठा सकते हैं बाइडन
दोनों नेता रूस और अमेरिका के राष्ट्रपति के बतौर पहली बार आमने सामने की मुलाकात करेंगे। दोनों पक्षों को इस बैठक से कोई खास उम्मीद नहीं है। बाइडन का कहना है कि यदि दोनों देश अपने संबंधों में अंतत: स्थिरता ला पाते हैं, तो यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम होगी। पहले, बाइडन, पुतिन और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन व रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव एक अपेक्षाकृत अंतरंग बैठक करेंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के पांच-पांच वरिष्ठ सहयोगी बैठक में शामिल होंगे। बैठक में बाइडन अमेरिकी चुनाव में कथित रूसी साइबर हमले समेत मानवाधिकार के मुद्दों को उठा सकते हैं। 

पुतिन ने अमेरिका पर लगाए आरोप
बाइडन के साथ होने वाली बातचीत के नतीजों पर पुतिन ने कहा कि एक अमेरिकी की तरह वे (बाइडन) अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में भी पूर्वानुमान और स्थिरता चाहते हैं। इन्हीं दो बातों पर दो देशों के अच्छे रिश्ते निर्भर भी करते हैं। लेकिन अमेरिका विश्व के दूसरे देशों में जो कर रहा है, उससे स्थिरता नहीं आ सकती। पुतिन ने अफगानिस्तान, मध्य-पूर्व, सीरिया, लीबिया में अमेरिका के मनमाने रवैये का हवाला देते हुए अपनी बात को सही ठहराया। रूस में विपक्षी नेता एलेक्सी नावेलनी से जुड़ मानवाधिकार के मुद्दे पर पुतिन ने पलटवार कर पूछा कि क्या अमेरिका में सियासी विरोधियों से निपटने के लिए कानून नहीं है।

बैठक दो सत्रों में हुई

यह बैठक दो सत्रों में हुई। बैठक का पहला सत्र 93 मिनट तक चला। इसके बाद 45 मिनट के बाद 65 मिनट का दूसरा सत्र चला। अब दोनों नेता अलग-अलग प्रेसवार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक जिनेवा के लेकसाइड विला में हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं।

रूसी राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद बाइडन ने कहा कि दोनों नेता दो ताकतवर देशों के बीच संबंधों के प्रबंधन की एक अलग जिम्मेदारी साझा करते हैं, ऐसे संबंध दो स्थाई और उम्मीद के मुताबिक हों। बाइडन ने कहा कि हमारा एजेंडा कोविड-19 से लड़ाई समेत अमेरिका की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, दुनिया के साथ संबध फिर स्थापित करना और अमेरिकी नागरिकों की रक्षा करना है। 

अमेरिका का एजेंडा रूस या अन्य के खिलाफ नहीं: बाइडन
बाइडन ने कहा कि जहां हमारे बीच मतभेद हैं, मैं चाहता हूं कि राष्ट्रपति पुतिन यह समझें कि मैं जो कहता हूं वह क्यों कहता हूं और जो मैं करता हूं वह क्यों करता हूं और हम ऐसे कदमों को लेकर किस तरह प्रतिक्रिया देंगे जो अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। मैंने राष्ट्रपति पुतिन को बताया कि मेरा एजेंडा रूस के खिलाफ या किसी अन्य के खिलाफ नहीं है। यह अमेरिकी लोगों के लिए है।

'कोई गलती न हो इसलिए आमने-सामने मिलना जरूरी था'
वहीं, इस सवाल के जवाब में कि अगर चुनाव में गड़बड़ी या अमेरिका के खिलाफ कोई और साइबर हमला होता है तो क्या परिणाम होंगे, बाइडन ने कहा, 'वह (पुतिन) जानते हैं कि इसके क्या परिणाम होंगे। वह जानते हैं कि मैं कार्रवाई करूंगा।' बाइडन ने कहा कि हमारा आमने-सामने मिलना जरूरी था जिससे किसी तरह की कोई गलती न हो या यह समझने में गड़बड़ी न हो कि मैं क्या कहना चाहता हूं। मैंने वही किया जो मैं करने आया था।

साइबर सुरक्षा पर विचार-विमर्श शुरू करेंगे दोनों देश: पुतिन
बैठक के बाद पुतिन ने एक प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ यूक्रेन को लेकर चर्चा की। यूक्रेन के नाटो में शामिल होने को लेकर पुतिन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस पर चर्चा करने लायक कुछ है। पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस के राजदूत अपनी-अपनी राजनयिक पोस्ट पर लौट जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सवाल कि ऐसा कब होगा, यह पूरी तरह से तकनीकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस साइबर सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श शुरू करेंगे।

'याद नहीं है बाइडन के साथ एक दशक पहले की मुलाकात'
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि जो बाइडन ने मुझे व्हाइट हाउस में नहीं बुलाया क्योंकि इस तरह की बैठक के लिए स्थितियों का सही होना बहुत जरूरी है। पुतिन ने बाइडन के साथ हुई बैठक को रचनात्मक, मौलिक और उत्पादक करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर कहा कि मुझे एक दशक पहले की वह मुलाकात याद नहीं है जब कथित तौर पर तत्कालीन अमेरिकी उप राष्ट्रपति बाइडन का कहना है कि उन्होंने पुतिन की आंखों में देखा था और उन्हें कोई आत्मा नहीं दिखी थी।

नवलनी को सजा मिली क्योंकि वह उसी के लायक थे: पुतिन
प्रेसवार्ता के दौरान पुतिन ने कहा कि विपक्ष के नेता एलेक्सी नवलनी को जेल की सजा सुनाई गई क्योंकि वह उसके ही लायक थे। पुतिन के कट्टर विरोधी माने जाने वाले नवलनी को जर्मनी से लौटने के बाद जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। नवलनी नर्व एजेंट हमले के कारण बीमार पड़ गए थे। उन्होंने इस हमले के लिए क्रेमलिन को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि रूस के अधिकारी इस आरोप को खारिज करते हैं। बता दें कि नवलनी को 2014 में गबन के एक मामले में दोषी करार दिया गया था।

इस मामले में दोषी करार दिए जाने के तहत मिली सजा के निलंबन के दौरान शर्तों का उल्लंघन करने पर नवलनी को फरवरी में ढाई वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई थी। पुतिन ने कहा कि नवलनी को अपनी सजा की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए दंड मिलना था और जब वह रूस लौटे तब उन्हें यह पता था कि उन्हें जेल में डाला जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह ही मास्को की एक अदालत ने नवलनी द्वारा बनाए गए संगठनों को कट्टरपंथी करार देते हुए उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

बातचीत शुरू करने की जरूरत : यूशाकोव
पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी यूशाकोव ने कहा कि मॉस्को एवं वॉशिंगटन में तनाव के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण है लेकिन उम्मीदें ज्यादा नहीं हैं। यूशाकोव ने इस हफ्ते संवाददाताओं से कहा था कि द्विपक्षीय संबंध जब बहुत बुरे दौर में हैं तब इस तरह की पहली बैठक हो रही है। दोनों पक्ष महसूस करते हैं कि लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की जरूरत है।

यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब दोनों देशों के नेताओं का मानना है कि अमेरिका और रूस के संबंध पहले कभी इतने खराब नहीं रहे। पिछले चार महीनों से दोनों नेताओं ने एक दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी की है। बाइडन ने अमेरिकी हितों पर रूस समर्थित हैकरों के साइबर हमलों को लेकर पुतिन की कई बार आलोचना की है, जबकि पुतिन का कहना है कि उनके देश ने न तो अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप किया और न ही किसी प्रकार के साइबर हमले किए।

बैठक से पहले दोनों नेताओं ने मिलाए हाथ

बैठक से पहले दोनों ही नेताओं ने कैमरे के सामने हाथ मिलाए। इस दौरान स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन भी मौजूद थे। बहरहाल, अब दोनों ही राष्ट्राध्यक्ष अपने 'मतभेदों' को मिटाने के लिए बैठक में चर्चा कर रहे हैं। पारमेलिन ने दोनों नेताओं का अपने देश में स्वागत किया था और इसके बाद वे महल में गए। बताया जा रहा है कि यह वार्ता चार से पांच घंटे तक चल सकती है। बता दें कि संवाददाताओं के सामने फोटो खिंचाते समय दोनों एक-दूसरे से नजरें चुराते रहे। 

इससे पहले पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वार्ता 'सकारात्मक' होगी। वहीं बाइडन ने उनसे कहा कि आमने-सामने मुलाकात हमेशा अच्छी होती है। जब एक संवाददाता ने पूछा कि क्या पुतिन पर विश्वास किया जा सकता है तो उन्होंने हां में सिर हिलाया।

दोनों नेताओं के साथ बैठक के दौरान शीर्ष राजनयिक और अनुवादक भी रहे। बुधवार को कई घंटे तक चलने वाली दो दौर की बैठक में अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बाइडन ने एक दशक में पहली बार रूस के राष्ट्रपति से मुलाकात की। पिछली बार वह मार्च 2011 में पुतिन से तब मिले थे जब रूस के प्रधानमंत्री थे और बाइडन उपराष्ट्रपति। तब उन्होंने पुतिन को 'हत्यारा' और 'विरोधी' करार दिया था। उनके बीच व्यापार एवं हथियार नियंत्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

बाइडन ने कहा था कि उन्हें पुतिन के साथ 'सहयोग' वाले क्षेत्रों को तलाशने की उम्मीद है लेकिन वह साइबर अपराध, अमेरिकी चुनावों में रूस का हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर उनसे जिरह करेंगे। शिखर सम्मेलन में सामरिक स्थिरता, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कोरोना वायरस महामारी और आर्कटिक जैसे विषय होंगे। पुतिन और बाइडन यूक्रेन, सीरिया और लीबिया जैसे क्षेत्रीय संकटों पर भी चर्चा कर सकते हैं। साथ ही वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अफगानिस्तान पर भी विचार-विमर्श करेंगे।

रूस-अमेरिका संबंधों में स्थिति काफी कठिन

दोनों पक्षों को इस बैठक से कोई खास उम्मीद नहीं है। बाइडन का कहना है कि यदि दोनों देश अपने संबंधों में अंतत: स्थिरता ला पाते हैं, तो यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम होगी। बाइडन ने कहा है कि अमेरिका और रूस अगर अपने संबंधों में 'स्थिरता और गंभीरता' लाते हैं तो यह महत्वपूर्ण कदम होगा। अमेरिका को अपना कट्टर विरोधी मानने वाले व्यक्ति के साथ वार्ता से पहले राष्ट्रपति की तरफ से यह उदार वक्तव्य है।

बाइडन ने इस हफ्ते की शुरुआत में संवाददाताओं से कहा था कि हमें निर्णय करना चाहिए कि क्या सहयोग करना हमारे हित में, दुनिया के हित में है और देखना चाहिए कि हम ऐसा कर सकते हैं अथवा नहीं। और जिन क्षेत्रों में सहमति नहीं बनती है वहां स्पष्ट कीजिए कि गतिरोध क्या है। पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने बुधवार को एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि गतिरोध टूटने की उम्मीद नहीं है और रूस-अमेरिका संबंधों में स्थिति काफी कठिन है।

शिखर सम्मेलन से पहले पेसकोव ने कहा था कि बहरहाल, तथ्य यह है कि दोनों राष्ट्रपति बैठक करने पर सहमत हुए हैं और समस्याओं के बारे में खुलकर बातचीत की शुरुआत की है जो अपने आप में एक उपलब्धि है।

पुतिन पर भरोसा नहीं करते बाइडन: व्हाइट हाउस

उधर, व्हाइट हाउस ने कहा है कि बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन यह संकेत नहीं दे रहे थे कि वह व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा करते हैं जब उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल में सिर हिलाकर जवाब दिया था। यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहे थे क्योंकि वहां बहुत से लोग शोर कर रहे थे और किसी को साफ तौर पर सुनना संभव नहीं था।

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार बाइडन और पुतिन की बैठक से पहले फोटो-ऑप के दौरान एक रिपोर्टर ने बाइडन से सवाल पूछा था कि क्या वह अपने रूसी समकक्ष पर भरोसा करते हैं। रिपोर्टर का कहना है कि बाइडन ने मेरी आंखों में देखा और सकारात्मक रूप से अपना सिर हिलाया। व्हाइट हाउस की कम्युनिकेशन डायरेक्टर केट बेडिंगफील्ड ने एक ट्वीट में कहा कि राष्ट्रपति स्पष्ट रूप से किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहे थे। 
विज्ञापन

संयुक्त प्रेसवार्ता नहीं करेंगे बाइडन और पुतिन

बाइडन और पुतिन की बहुचर्चित बैठक के बाद दोनों नेता पारंपरिक बैठकों की तरह संयुक्त प्रेसवार्ता नहीं करेंगे। आम तौर पर जब दो देशों के नेता मिलते हैं तो बैठक के बाद संयुक्त प्रेसवार्ता करते हैं, जिसमें वो बैठक के दौरान हुई चर्चाओं के बारे में जानकारी देते हैं और मीडिया के सवालों के उत्तर देते हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच के संबंधों को देखते हुए यह बहुत आश्चर्यजनक नहीं है।

कहा जा रहा है कि संयुक्त प्रेसवार्ता न करने पर व्हाइट हाउस के अधिकारियों की ओर से जोर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक सम्मेलन को लेकर बातचीत के दौरान रूस ने संयुक्त प्रेसवार्ता के लिए जोर दिया था। लेकिन, अमेरिका ने इसका विरोध किया था क्योंकि वे उस स्थिति से बचना चाहते हैं जो 2018 के एक सम्मेन में हेलसिंकी में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बनी थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें