अटॉर्नी जनरल खान ने सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया था कि भारत सरकार पाकिस्तान की अदालत के समक्ष मुकदमे पर आपत्ति जता रही है। उसने हाईकोर्ट की सुनवाई के लिए वकील नियुक्त करने से भी इनकार करते हुए कहा कि यह संप्रभु अधिकारों का आत्मसमर्पण करने के समान है। वृहद पीठ ने बाद में तीन पन्नों का एक लिखित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि किसी भी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करना किसी मामले में सहायता के लिए अदालत के सामने पेश होने से काफी अलग है।
आदेश में कहा गया था कि इस समय अदालत केवल अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कार्यवाही कर रही है। अदालत ने कहा था कि वह केवल आईसीजे के आदेश को लागू करने का एक तरीका निकालने की कोशिश कर रही है और इसे भारत के ध्यान में लाने की जरूरत है ताकि उसकी भी मौजूदगी रहे और वह कार्यप्रणाली एवं निर्णय के कार्यान्वयन की प्रक्रिया के बारे में अपनी आपत्ति व्यक्त कर सके।
पिछले हफ्ते दिया था जाधव को अपील का अधिकार
पाकिस्तान सरकार ने पिछले सप्ताह जाधव को अपील का अधिकार देने के लिए विपक्ष के हंगामे और बहिष्कार के बीच नेशनल असेंबली में एक विधेयक पारित किया था। संसद के निचले सदन ने अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (समीक्षा एवं पुनर्विचार) विधेयक, 2020 को बृहस्पतिवार को पारित किया था। विधेयक का लक्ष्य कथित भारतीय जासूस जाधव को आईसीजे के फैसले के अनुरूप राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराना है।