संयुक्त राष्ट्र में नई दिल्ली के दूत ने पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ में सुरक्षा परिषद को बताया कि भारत को आतंकवादी समूहों द्वारा सीमा पार आतंकवाद से अत्यधिक नुकसान हुआ है, जो ड्रोन के उपयोग सहित अपनी सीमाओं के पार से अवैध हथियारों की तस्करी करते हैं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में विश्व निकाय से आतंकवादी समूहों और उनके - प्रायोजकों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता बरतने का आह्वान किया। यूएन में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि छोटे व हल्के हथियारों की अवैध तस्करी सशस्त्र और आतंकियों द्वारा संघर्ष को बाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने नाम लिए बिना पाकिस्तान और चीन पर निशाना साधा।
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कंबोज ने छोटे हथियारों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक खुली बहस के दौरान कहा- भारत, सीमा पार आतंकवाद और अवैध हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकी गुटों द्वारा की जाने वाली हिंसा से पीड़ित है। आतंकियों के पास ये हथियार सरकारी समर्थन के बिना संभव नहीं हैं।
आतंकी पनाह दाताओं पर कार्रवाई करें
सुरक्षा परिषद में तस्करी के मार्गों की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देकर कंबोज ने कुछ ऐसे देशों के विरुद्ध कार्रवाई का आह्वान किया, जो आतंकियों को पनाह देना जारी रखे हैं। भारत ने अवैध तस्करी को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्रवाई कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय अनुरेखण उपकरण के कार्यान्वयन का समर्थन किया।
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आतंकवादियों की मदद कर रहा कोई
उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठनों के पास से मिले हथियार से साफ है कि उनकी कोई मदद कर रहा है। वह बिना किसी देश की मदद के बिना इतने बड़े स्तर पर हथियार नहीं जुटा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देश आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह देना जारी रखे है। इन लोगों न केवल गंभीर अपराध किए हैं, बल्कि जालसाजी और विरोधी-राज्य की मुद्रा के प्रसार, सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने के लिए हथियारों, ड्रग्स और अन्य साधनों की आपूर्ति जैसे माध्यमों से अपने विरोधी-राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाना जारी रखा है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर
उन्होंने कहा, 'हमें सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी समूहों द्वारा इन अवैध हथियारों का उपयोग करके की गई हिंसा के कारण बहुत नुकसान हुआ है, जिसमें अब ड्रोन का उपयोग भी शामिल है। आतंकवादियों के बेड़े में बढ़ते हथियारों को देखकर साफ है कि यह किसी देश की मदद के बिना नहीं फल फूल सकते हैं।' उन्होंने डायवर्जन प्वाइंट्स और ट्रैफिकिंग मार्गों की पहचान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।