फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कौन है इराक में बसे हुए ये यजीदी?

विज्ञापन
विज्ञापन
सुन्नी जेहादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के शिकार लोगों में 50,000 आबादी का वह समूह भी है, जिसने उत्तर-पश्चिमी इराक़ के पहाड़ों पर शरण ले रखी है।
विज्ञापन


घेराबंदी के कारण यज़ीदियों को खाने और पीने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अचानक दुनिया की दिलचस्पी इस बेहद गुमनाम धर्म के बारे में जगी है। लेखिका डायना डार्क बता रही हैं कि कौन हैं इस रहस्यमयी धर्म के अनुयायी।
Trending Videos

यज़ीदियों की अजीबोग़रीब मान्यताओं के बारे में

अनूठी धार्मिक मान्यताओं के कारण यज़ीदियों को अक्सर ग़लत ढंग से 'शैतान के उपासक' कह दिया जाता है। पारंपरिक रूप से यज़ीदी उत्तर-पश्चिमी इराक़, उत्तर-पश्चिमी सीरिया और दक्षिण-पूर्वी तुर्की में छोटे-छोटे समुदायों में रहते रहे हैं।

उनकी मौजूदा संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। आकलनों के मुताबिक़ उनकी तादाद 70 हज़ार से लेकर पांच लाख तक है। अपमान, उत्पीड़न और डराए जाने से पिछली एक सदी में उनकी तादाद में भारी गिरवाट आई है।

धर्म परिवर्तन करके यजीदी नहीं बना जा सकता

द्रूज़ जैसे अन्य अल्पसंख्यक धर्मों की तरह कोई भी धर्मांतरण करके यज़ीदी नहीं बन सकता। सिर्फ़ इस धर्म में पैदा होकर ही यज़ीदी बना जा सकता है।

यज़ीदियों पर अत्याचार उनके नाम की वजह से हुई ग़लतफ़हमी के कारण है। इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी समूहों को लगता है कि यह धर्म उमैयद राजवंश के दूसरे ख़लीफ़ा और मुसलमानों में बेहद अलोकप्रिय शासक यज़ीद इब्न मुआविया (647-683) से निकला है।

क्या है यजीदी का मतबल?

हालांकि शोध से पता चलता है कि यज़ीदियों का यज़ीद या ईरानी शहर यज़्द से कोई लेना-देना नहीं। उनका संबंध फ़ारसी भाषा के 'इज़ीद' से है, जिसके मायने फ़रिश्ता या देवता हैं।

इज़ीदिस के मायने हैं 'देवता के उपासक' और यज़ीदी भी ख़ुद को यही कहते हैं। यज़ीदियों की कई मान्यताएं ईसाइयत से मेल खाती हैं।

बाइबल-क़ुरान को मानने वाले

वे बाइबल और क़ुरान दोनों को मानते हैं। पर उनकी ज़्यादातर परंपराएं मौखिक हैं। उनकी बहुत सी मान्यताएं मुसलमानों और ईसाइयों से मिलती-जुलती हैं। मान्यताओं में गोपनीयता को लेकर यह ग़लतफ़हमी भी है कि जटिल यज़ीदी धर्म पारसी धर्म से जुड़ा है। यज़ीदी भी सूर्य की उपासना करते हैं और उनकी कब्रों का मुंह पूर्व दिशा में होता है।

उपवास और कुर्बानी

पीर (पादरी) पवित्र जल से बच्चों का धर्म संस्कार (बपतिस्मा) करते हैं। शादियों में पादरी रोटी को दो हिस्सों में तोड़कर पति-पत्नी को देते हैं। लाल जोड़ा पहने दुल्हनें ईसाइयों के चर्च में जाती हैं। दिसंबर में यज़ीदी तीन दिन का उपवास करते हैं और पीर के साथ शराब पीकर उपवास तोड़ते हैं। 15-20 सितंबर के बीच मोसुल के उत्तर में स्थित लालेश में वो शेख आदी की दरगाह पर सालाना इकट्ठा होते हैं और नदी में नहाते हैं। वे जानवरों की क़ुर्बानी भी देते हैं और बच्चों का ख़तना करते हैं।

मोर के उपासक

वे अपने ईश्वर को याज़्दान कहते हैं। उन्हें इतना ऊपर माना जाता है कि उनकी सीधे उपासना नहीं की जाती। उन्हें सृष्टि का रचियता माना जाता है, लेकिन रखवाला नहीं। याज्दान से सात महान आत्माएं निकलती हैं जिनमें मयूर एंजेल जिसे मलक ताउस कहा जाता है, सबसे महान हैं। उन्हें दैवीय इच्छाएं पूरा करने वाला माना जाता है।

मोक्ष और पुनर्जन्म में विश्वास

ईसाइयत के शुरुआती दिनों में मयूर पक्षी को अमरत्व का प्रतीक माना जाता था। मलक ताउस को भगवान का ही दूसरा रूप माना जाता है। इसलिए यज़ीदियों को एकेश्वरवादी भी माना जाता है। यज़ीदी दिन में पांच बार मलक ताउस की उपासना करते हैं। मलक ताउस का अन्य नाम शायतन भी है, जिसका अरबी में मतलब 'शैतान' है। और इसी वजह से उनकी छवि 'शैतान का उपासक' की बन गई।

मोक्ष और पुनर्जन्म में विश्वास
यज़ीदी मानते हैं कि आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में दाख़िल होती है और अंत में मोक्ष पाती है। इसलिए वे पुनर्जन्म में यक़ीन रखते हैं।

यज़ीदी के लिए धर्म निकाला सबसे दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है क्योंकि ऐसा होने पर उसकी आत्मा को मोक्ष नहीं मिलता। इसलिए उनमें धर्म परिवर्तन का सवाल ही नहीं उठता।
विज्ञापन

खाली गांव आबाद होने लगे

सीरिया और इराक़ से लगे दक्षिण पूर्वी तुर्की के दूरस्थ इलाक़ों में यज़ीदियों के खाली गांव फिर आबाद होने लगे हैं क्योंकि तुर्की सरकार यज़ीदियों को परेशान नहीं करती।

सदियों के उत्पीड़न के बावजूद यज़ीदियों ने अपना धर्म नहीं छोड़ा, जो दर्शाता है कि वे अपनी पहचान और धार्मिक चरित्र को लेकर कितने दृढ़ हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें