लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही
- फोटो : amar ujala
मध्य प्रदेश की सैन्य छावनी महू में रण संवाद 2025 संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस सेमिनार में देशभर से सैन्य अफसर मौजूद रहे। बैठक में युद्ध कौशल, आधुनिक तकनीक और सैन्य नीति पर मंथन हुआ। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हुए हमले के बाद यह रण संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
सुबह साढ़े 9 बजे रण संवाद शुरू हुआ। इस संवाद में लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने कहा कि रण संवाद का उद्देश्य युद्ध कला और युद्ध संचालन के लिए खुद को तैयार करना है। इससे दक्षता बढ़ती है। रण संवाद विश्वास पर आधारित है। जो युद्ध का प्रशिक्षण देते है। युद्ध को अंजाम देते है। उन्हें युद्ध के प्रमाणों की सामूहिक जिम्मेदारी भी उठाना पड़ती है।
संवाद हमारी संस्कृति का हिस्सा
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संवाद भारत की परंपरा है। भारत वह धरती है जो युद्ध के लिए तैयार रहती है और जरुरत पड़ने पर सुलह को भी महत्व देती है। संवाद की कमी टकराव की वजह बनती है। युद्ध में भी संवाद के रास्ते खुले रखना जरुरी है। भारतीय परंपरा में युद्ध और संवाद हमेशा जुड़े है। युद्ध से पहले संवाद करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। हमारी संस्कृति में संवाद युद्ध से अलग नहीं है।
सिंह ने युद्ध में आधुनिक तकनीक ड्रोन, एआई, सैटेलाइट निगरानी आधारित युद्ध प्रणाली पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अब युद्ध का स्वरुप बदल गया है। देश की रक्षा सीमा पर सिर्फ सैनिक ही नहीं करते बल्कि आधुनिक तकनीक विकसित करने वाले वैज्ञानिक, हथियार प्रणाली बनाने वाले उद्योगपति और अगली पीढ़ी को युद्ध के लिए तैयार रहने वाले शिक्षक भी करते है।