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चीन के 'अलीबाबा' के खजाने में कहां से आता है सोना?

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अलीबाबा के संस्थापक जैक मा बेशक चीन के सबसे अमीर आदमी हैं। अलीबाबा शायद आज की कारोबारी दुनिया में वो नाम है जो शायद आपने सुना न हो।
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चीन के इंटरनेट बाजार में इसके दबदबे के बावजूद विश्व स्तर पर ये कंपनी अभी तक ज्यादा कामयाबी हासिल नहीं कर पाई है।

लेकिन अगले हफ्ते इस कंपनी के न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में पहुंच जाने से तस्वीर बदल सकती है और इसका नाम भी फेसबुक, अमेजन और ईबे जैसी कंपनियों के साथ लिया जा सकता है।

अलीबाबा करता क्या है

इससे ज्यादा आसान ये बताना है कि अलीबाबा क्या नहीं करता है। वर्ष 1999 में जैक मा ने alibaba.com के नाम से अपना बिजनेस शुरू किया। ये वेबसाइट चीन (और अन्य देशों) के निर्यातकों को दुनिया भर में फैली 190 कंपनियों से जोड़ती है।

इसकी मदद से ब्रिटेन में बैठा एक कारोबारी ये पता लगा सकता है कि चीन में उसके लिए कौन माल तैयार कर सकता है।

लेकिन अलीबाबा की वेबसाइट का सिर्फ यही काम नहीं है। अलीबाबा taobao.com भी चलाती है जो चीन की सबसे बड़ी शॉपिंग वेबसाइट है और इसकी एक अन्य वेबसाइट tmall.com चीन में उभरते हुए मध्यम वर्ग के लिए ब्रांडेड चीजें मुहैया कराती है।

अलीबाबा की पहुंच बहुत आगे

अलीबाबा की पहुंच यही खत्म नहीं हो जाती है। ये एक ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम alipay.com भी चलाती है जो PayPal की तरह काम करता है।

चीन में ट्विटर जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट सिना वाइबो में भी इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। साथ ही यूट्यूब जैसे वीडियो शेयरिंग वेबसाइट Youku Tudou में भी इसकी अहम हिस्सेदारी है। ये कंपनी ऑनलाइन मार्केटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और लोजिस्ट सेवाएं भी मुहैया कराती है।

हाल ही में इसने चीन में सबसे कामयाब फुटबॉल क्लब क्वांजो एवरग्रांड में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है और फ‌िल्म बिजनेस में भी उसने दबदबा हासिल कर लिया है। और अंत में अलीबाबा का इरादा बैकिंग के क्षेत्र में उतरने का भी है।

इसे इतनी कामयाबी कैसे मिली

अलीबाबा को जब 1999 में शुरू किया गया तो इसमें 18 लोग काम करते थे लेकिन अब दुनिया भर में इसके लिए 22 हजार लोग काम करते हैं और इंटरनेट से होने वाले कारोबार के एक बड़े हिस्से पर उसका नियंत्रण है

चीन में होने वाले ऑनलाइन कारोबार के 80 प्रतिशत हिस्से पर अलीबाबा का कब्जा है।

चीन में 60 करोड़ लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं जबकि देश की आबादी एक अरब तीस करोड़ है। इसके मुकाबले अमरीका में 27.7 करोड़ और यूरोप में 54.6 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं।

अलीबाबा के लिए अच्छी खबर

अलीबाबा ने तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन बाजार का इस्तेमाल स्मार्टफोन तकनीक में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए किया है। अब चीन के 75 प्रतिशत मोबाइल बाजार पर इसी का नियंत्रण है।

रिसर्च संस्था फोरेस्टर का अनुमान है कि चीन में 2017 तक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ कर 74 करोड़ हो जाएगी।

और अलीबाबा के लिए अच्छी खबर ये है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अब उनके फोन खरीद रहे हैं। चीन की इंटरनेट सोसाइटी के अनुसार पैसों का ऑनलाइन लेन-देन 2015 तक बढ़ कर 1.45 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।

अलीबाबा पैसे कैसे बनाता है

ईबे के विपरीत अलीबाबा किसी तरह की लिस्टिंग फीस नहीं लेता है बल्कि इसकी ज्यादातर आमदनी विभिन्न वेबसाइटों पर मिलने वाले विज्ञापनों से होती है।

अमरीकी नियामकों की तरफ से जारी ताजा जानकारी के अनुसार 27.9 करोड़ सक्रिय खरीददार और 85 लाख सक्रिय विक्रेता हर साल अलीबाबा की ऑनलाइन सेवाएं लेते हैं और इस तरह सालाना 14.5 अरब ऑर्डर दिए जाते हैं।

ऐसे में ये समझना मुश्किल नहीं है कि विज्ञापन देने वालों के लिए अलीबाबा की वेबसाइटें इतनी आकर्षक क्यों हैं। चूंकि कंपनी ग्राहकों को कारोबारियों से जोड़ती है तो उसके लिए थोड़ा सा कमिशन भी लेती है। ऐसे में इस सिस्टम को काम करने के लिए किसी बड़े तामझाम या इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती है।

दूसरी कंपनियों के मुकाबले कहां है

ऑनलाइन शॉपिंग को मापने के लिए अकसर ग्रॉस मर्चेंडाइज़ वॉल्यूम (जीएमवी) का इस्तेमाल होता है। इसमें इस बात का हिसाब रखा जाता है कि कितना माल बिका।

अलीबाबा ने बताया कि इस साल जून तक उसने 296 अरब डॉलर का जीएमवी हासिल किया। ये पिछले ईबे जीवीएम का लगभग चार गुना है। अमेजन अपने जीवीएम आंकड़े प्रकाशित नहीं करती लेकिन उद्योग जगत का अनुमान है कि पिछले साल ये 100 अरब डॉलर रहा।

इन सब शॉपिंग वेबसाइटों का राजस्व प्रत्येक ऑनलाइन सेल पर लगने वाली फीस और परसेंटेज आता है। इस मामले में अलीबाबा दोनों बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों से पीछे है।

लेकिन अलीबाबा का आकर्षक बिजनेस मॉडल बहुत से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन यानी उसकी कुशलता अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों से कहीं ज्यादा है।
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कंपनी का बॉस कौन है

हर कंपनी का बॉस न तो लेदर के कपड़े पहनेगा और न ही विग लगाएगा और न ही उसके होठों पर आप लिपस्टिक और नाक में छल्ला देखेंगे। जॉन एल्टन का गाना 'कैन यू फील द लव' गाते हुए भी आपको कम ही बॉस मिलेंगे।

लेकिन अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ये सब करते हैं। और ये किया उन्होंने कंपनी की 10वीं वर्षगांठ पर। मा ने ये कंपनी 1999 में 60 हजार डॉलर की राशि के साथ शुरू की जो उन्होंने दक्षिणी चीन में अपने 80 दोस्तों से जुटाई थी।

अब उनकी संपत्ति 22 अरब डॉलर बताई जाती है, ब्लूमबर्ग के मुताबिक कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 7.3 प्रतिशत है।

जनवरी में मा ने घोषणा की कि वो कंपनी के मुख्य कार्यकारी का पद छोड़ रहे हैं और तब से कंपनी की ज‌िम्मेदारी अलीबाबा के लंबे समय से कर्मचारी रहे जोनाथन लु चाओशी संभाल रहे हैं।

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