संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक
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काबुल की सत्ता पर तालिबान का कब्जा होना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चिंता की बात है। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पिछली बैठकों में तालिबान का ही मुद्दा छाया रहा लेकिन, अब यूएनएससी ने अफगानिस्तान को लेकर अपना प्रस्ताव पास कर दिया है। भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला न्यूयॉर्क पहुंचे थे।
13 देशों ने किया समर्थन
भारत की अध्यक्षता में यूएनएससी की ओर से पारित किए गए प्रस्ताव को 13 देशों का समर्थन मिला। वहीं रूस व चीन ने खुद को अलग रखा। प्रस्ताव पास करते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अफगानिस्तान प्रत्यक्ष रूप से भारत के लिए महत्व रखता है। इसलिए, तालिबान को इस प्रस्ताव के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी होगी।
आंतक के खिलाफ नहीं होगा जमीन का इस्तेमाल
तालिबान को औपचारिक मान्यता देने से पहले सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि वह अफगानिस्तान की जमीन को आतंक का अड्डा नहीं बनने देगा। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रस्ताव में यह बात साफ तौर पर कही गई है कि तालिबान अफगानिस्तान की जमीन को किसी भी अन्य देश के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल नहीं होने देगा। इतना ही नहीं अफगानिस्तान में किसी भी तरह का आतंकी प्रशिक्षण या किसी देश के खिलाफ हमले की योजना तैयार नहीं की जाएगी।
अफगानियों व भारतीयों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक यूएनएससी का प्रस्ताव अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों व अफगानी नागरिकों के लिए मददगार साबित होगा। प्रस्ताव में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि भारतीय नागरिकों के साथ ही साथ वे अफगानी, जो भारत आना चाहते हैं वे सुरक्षित तरीके से भारत की यात्रा कर सकें। प्रस्ताव के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि तालिबान को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो अफगानी या अन्य विदेशी 31 अगस्त के बाद अफगानिस्तान से बाहर आना चाहते हैं, उन्हें पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी।
सुरक्षा परिषद रखेगी अफगानिस्तान पर नजर
सुरक्षा परिषद ने साफ किया कि हम अफगानिस्तान के मुद्दे पर बैठक करते रहेंगे और यह तय करेंगे कि अफगानिस्तान की सीमा का प्रयोग आतंक के लिए न किया जाए, साथ ही वहां की जमीनी हकीकत और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर परिषद की नजर रहेगी।