शोध के अनुसार परंपरागत एंटीबायोटिक दवाइयों के विपरीत यह रसायन जीवाणुओं को प्रतिरोध विकसित करने से रोकता है। इलाज की ऐसी पद्धति जो जीवाणुओं को साथ मिलकर काम करने से रोक सके, एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोध की समस्या का समाधान उपलब्ध करा सकती है। शोधकर्ता इलाज के ऐसे जीवाणुरोधी तरीकों को लोकप्रिय बनाना चाहते हैं।
उनका मानना है कि संक्त्रस्मण से बचने के लिए इसे दवा या इंप्लांट पर परत चढ़ाकर उपयोग किया जा सकता है। इस रसायन को एंटीबायोटिक्स के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका कृषि, उद्योग और हमारे घरों में भी अलग-अलग तरीके से उपयोग हो सकता है। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं का दावा है कि भविष्य में एंटीबायोटिक्स का विकल्प तैयार करने में भी इनकी अहम भूमिका हो सकती है।