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UK: एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बावजूद शाही हवेली नहीं छोड़ेंगे एंड्रयू, भाई चार्ल्स का आदेश करेंगे अस्वीकार

Mon, 08 Jan 2024 08:03 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

एपस्टीन मामले से जुड़े कुछ लोगों के नाम उजागर किए गए हैं, जिसमें प्रिंस एंड्रयू का नाम भी शामिल है। इसके बाद ही राजा ने उन्हें एक छोटे घर में भेजने पर विचार किया है।
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प्रिंस एंड्रयू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने अपने भाई और राजकुमार प्रिंस एंड्रयू को जेफरी एपस्टीन मामले में फंसने के बाद शाही परिवार की जिम्मेदारियों से बेदखल करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही बताया जा रहा था कि एंड्रयू को शाही महल से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। हालांकि, अब एक रिपोर्ट की माने तो एंड्रयू अपने भाई के आदेश को अस्वीकार कर देंगे। बता दें, फिलहाल एंड्रयू अपनी पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन के साथ विंडसर में 30 कमरों वाले रॉयल लॉज में रह रहे हैं।

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एंड्रयू के एक करीबी सूत्र का कहना है कि प्रिंस और फर्ग्यूसन कहीं नहीं जा रहे हैं। राजा उन्हें बाहर नहीं निकाल सकते। 

गौरतलब है, हाल ही में एपस्टीन मामले से जुड़े कुछ लोगों के नाम उजागर किए गए हैं, जिसमें प्रिंस एंड्रयू का नाम भी शामिल है। इसके बाद ही राजा ने उन्हें एक छोटे घर में भेजने का विचार किया। इसके साथ ही राजा ने संपत्ति में सुरक्षा के लिए अपने वित्त पोषण को बंद करने का भी फैसला किया।

यह है मामला
गौरतलब है, 2021 में, ब्रिटिश महिला गिलैन मैक्सवेल को किशोरियों को बहलाने-फुसलाने का दोषी ठहराया गया था। इन किशोरियों को बहला फुसला कर अमेरिकी करोड़पति और फायनेंसर जेफरी एपस्टीन के पास भेजा जाता था। अमेरिका की एक अदालत में करीब एक महीने तक चली सुनवाई के बाद इस फैसले ने 14 साल की उम्र में यौन शोषण का शिकार हुईं पीड़िताओं को न्याय दिलाया था।
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ब्रिटेन के प्रिंस का नाम
इस मामले से जुड़े प्रमुख नामों में से एक ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू हैं। इन्हें कथित तौर पर एपस्टीन के सह-साजिशकर्ताओं में से एक माना जाता था। हालांकि, बाद में यह बेगुनाह साबित हुए। इनका कहना था कि वह एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों के बारे में कुछ नहीं जानते थे।

साल 2019 में हुआ था मामला दर्ज
इस घटना का खुलासा चार महिलाओं ने किया था, जो 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और न्यू मैक्सिको में एपस्टीन के महलनुमा घरों में यौन शोषण की शिकार हुई थीं। छह में से पांच मामलों में मैक्सवेल को साल 2021 में दोषी ठहराने से पहले न्यायाधीशों ने पूरे पांच दिनों तक विचार-विमर्श किया था। इन महिलाओं ने आरोप लगाया था कि एपस्टीन के पास भेजने के लिए मैक्सवेल उन्हें बहलाती-फुसलाती थी। पीड़ित महिलाओं ने न्याय पाने के लिए अदालतों में वर्षों तक लड़ाई लड़ी। एपस्टीन पर साल 2019 में यौन शोषण का एक मामला दर्ज हुआ था। गिरफ्तार किए जाने के लगभग एक महीने बाद एपस्टीन ने मैनहट्टन जेल की कोठरी में आत्महत्या कर ली थी।

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