सलवान मोमिका जैसा व्यक्ति हर दिन पैदा नहीं होता है। एक इराकी सशस्त्र संगठन का नेता रहा मोमिका इस्लामिक विचारों और मान्यताओं का आलोचक था। पिछले साल कुरान जलाने के बाद दुनियाभर में उसने एक अलग पहचान बना ली थी। अब एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि उसकी संदिग्ध हालातों में मौत हो गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। सलवान मोमिका वो शख्स था, जो स्वीडन में बार बार कुरान जला रहा था, जिसकी वजह से दुनिया भर में प्रदर्शन हो चुके हैं।
कौन हैं सलवान मोमिका?
37 साल का सलवान मोमिका इराकी ईसाई शरणार्थी है। वह अप्रैल 2018 में स्वीडन आया था और अप्रैल 2021 में शरणार्थी का दर्जा मिला था। वह अपने फेसबुक पर खुद को नास्तिक और लेखक बताता था। मोमिका ने साल 2023 में 28 जून को उस वक्त दुनिया को चौंका दिया, जब उन्होंने मुसलमानों की पवित्र पुस्तक कुरान की एक प्रति पर हमला किया और फिर उसे स्टॉकहोम की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने जला दिया। उनके एक दोस्त ने इस पूरे दृश्य को फिल्माया था। कुरान को ईद-उल-अजहा के दिन जलाया था। इसकी वजह से पूरी दुनिया में उसकी आलोचना की गई थी।
सलवान की मौत
एक रेडियो चैनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार को बताया कि सलवान मोमिका की मौत हो चुकी है। हालांकि थोड़ी देर बाद एक और पोस्ट कर बताया कि इस खबर की पुष्टि होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि जिस पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी गई थी, वह अब हटा दिया गया है।
इससे पहले कहा गया कि इराकी शरणार्थी और इस्लामी आलोचक सलवान सबा मट्टी मोमिका नॉर्वे में मरा हुआ मिला। मोमिका स्वीडन में प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता था, जहां उसने सार्वजनिक रूप से कुरान को कई बार जलाया था।
ईरान से भागकर स्वीडन होते हुए नॉर्वे पहुंचा
सलवान मोमिका स्वीडन से नॉर्वे जाने के बाद से ही काफी चर्चा में था। उसे 2021 में स्वीडिश रेजिडेंसी परमिट दिया गया था। मोमिका शरण की तलाश में 2018 में इराक से बाहर चला गया था। इसके अलावा, पूर्व मुसलमानों के बीच भी सलवान मोमिका काफी चर्चित चेहरा बन गया था। आपको बता दें, कि इंटरनेट की मदद से पूर्व मुसलमानों के एक आंदोलन ने दुनिया भर में अपनी पकड़ बना ली है। सलवान मोमिका ने 27 मार्च को पोस्ट किया था, कि 'आज मैंने स्वीडन छोड़ दिया और अब नॉर्वे में अधिकारियों की सुरक्षा में हूं।'
जब जलाया था कुरान तब कब क्या हुआ?
28 जून- मोमिका ने स्टॉकहोम की सेंट्रल मस्जिद के सामने दो स्वीडिश झंडे लहराए फिर उसका राष्ट्रीय गान गाया। इसके बाद उसने कुरान फाड़कर उसे आग में झोंक दिया।
29 जून- तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोवन ने इस घटना को लेकर स्वीडिन की निंदा की और कहा कि उनका देश इस तरह की भड़काने वाली कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
2 जुलाई- 57 इस्लामी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने और मिलजुलकर कदम उठाने की जरूरत है।स्वीडन ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ये इस्लामोफोबिया है।
3 जुलाई- पोप फ्रांसिस ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि वो इससे गुस्से में है।
7 जुलाई- कुरान जलाए जाने की घटना के खिलाफ इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में रैलियां की गईं।
11 जुलाई- मुस्लिम देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन में इसके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।
12 जुलाई- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने नफरत और धर्मांधता के खिलाफ प्रस्ताव को मंजूरी दी।