सीरिया में किए गए हमले को लेकर इस्राइल के सैन्य प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हागरी ने कहा कि इस्राइल में एक नौसैनिक अड्डे पर हुआ एक ड्रोन हमला ईरान ने कराया था। हालांकि, इसमें कोई घायल नहीं हुआ। इस बीच, अकबरी ने बदला लेने की कसम खाई।
इस्राइल ने सोमवार को सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया। इससे दूतावास का एक खंड पूरी तरह ध्वस्त हो गया। वहीं, ईरान के दो शीर्ष सैन्य जनरल और पांच अन्य अधिकारियों को भी मार गिराया। इस्राइल ने अबतक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जबकि इसके सैन्य प्रवक्ता ने ईरान पर ही आरोप लगाए हैं कि उसने इस्राइल पर सोमवार को ड्रोन हमले करवाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल ने दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर छह मिसाइलें दागीं।
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आइए जानते हैं अबतक क्या कुछ हुआ-
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस्राइल ने सोमवार को सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया। इस हमले में मारे गए लोगों में तीन वरिष्ठ कमांडर शामिल थे। यह घटना दमिश्क के माजेह जिले में हुई।
सीरिया के विदेश मंत्री फैसल मेकदाद ने हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि हम इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसने दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाया और कई निर्दोष लोगों की हत्या कर दी।
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ईरान के राजदूत हुसैन अकबरी ने बताया कि दूतावास की इमारत को निशाना बनाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि उनका आवास सबसे ऊपर की दो मंजिलों पर है। हालांकि, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
इस्राइल के हमले में सेना के सलाहकार और ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजी) के कमांडर मोहम्मद रेजा जाहादी समेत सात लोगों की मौत हुई है। जनरल जाहादी ने 2016 तक लेबनान और सीरिया में ईरान के एलिट कुद्स फोर्स का नेतृत्व किया था। हालांकि, इस्राइल ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहता है, पर यह पहली बार है जब उसने दूतावास पर हमला किया है।
इस्राइल ने इस हमले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चार इस्राइली अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर स्वीकार किया कि हमले को इस्राइल ने ही अंजाम दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनयिक एवं दूतावास परिसरों की अनुल्लंघनीयता के मूलभूत सिद्धांत का उल्लंघन है। उसने कहा कि तेहरान के पास निर्णायक जवाब लेने का अधिकार सुरक्षित है।
ईरानी दूतावास पर हुए हमले पर लेबनानी समूह हिजबुल्ला ने जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है। समूह ने एक बयान में कहा जबतक अपराध का बदला नहीं ले लिाया जाएगा तब तक शांति से नहीं बैठेंगे। वहीं, रूस के साथ-साथ ईराक, जॉर्डन, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित मुस्लिम देशों ने भी हमले की निंदा की।
हमले में मारे गए लोगों में हाजी रहीमी भी शामिल हैं। इन्हें कुद्स फोर्स का समन्वयक बताया जाता है। हमले में हुसैन अमन इलाही, मेहदी जलालाटी, मोहसिन सेदाघाट, अली अगाबाबी और अली सालेही रूजबहानी की भी मौत हो गई। ईरान का कहना है कि हवाई हमले के लिए एफ-35 युद्धक विमानों का इस्तेमाल किया गया था। अकबरी ने कहा, 'यह शायद पहली बार है जब यहूदी शासन ने ईरान दूतावास की आधिकारिक इमारत पर हमला करने की अनुमति दी है।'
इस्राइल के सैन्य प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हागरी का कहना है कि इमारत में महज एक वाणिज्य दूतावास नहीं था, बल्कि एक नागरिक सुविधा के रूप में कुद्स बलों का सैन्य ठिकाना बना हुआ था। उन्होंने कहा कि इस्राइल में एक नौसैनिक अड्डे पर हुआ एक ड्रोन हमला ईरान ने कराया था। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। इस बीच, अकबरी ने बदला लेने की कसम खाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। वाशिंगटन में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक विश्लेषक स्टीवन कुक ने कहा कि ईरान हिजबुल्ला को इस्राइल पर अपने हमलों को बढ़ाने का निर्देश दे सकता है। आईआरजीसी ईराक और सीरिया में युद्ध पर लगे प्रतिबंधों में ढिलाई दे सकता है। इससे अमेरिकी सेना फिर से खतरे में पड़ सकती है। ईरानी हिजबुल्ला को इस्राइल पर अपने हमलों को बढ़ाने का निर्देश भी दे सकते हैं, जो अधिक साहसी और अधिक संख्या में बढ़ रहे हैं।'
इस्राइल सात अक्तूबर से गाजा में एक लंबा युद्ध लड़ रहा है, क्योंकि हमास ने देश के अंदर 1200 लोगों को मार डाला था। तब से जवाबी हमलों में हजारों फलस्तीनी मारे गए हैं। इस्राइल को निशाना बनाने वाले कई आतंकवादी समूह कथित तौर पर ईरान द्वारा समर्थित हैं।