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अमेरिका: दूर नहीं हुई हैं बाइडन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज की राह की रुकावटें

Wed, 14 Jul 2021 10:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषकों का कहना है कि ये सवाल खड़ा हुआ है कि अब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का क्या होगा, जिस पर रिपब्लिकन सीनेटरों के एक गुट के साथ राष्ट्रपति ने सहमति बनाई थी...
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटरों के बीच राष्ट्रपति जो बाइडन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर एक नई सहमति बनी है। इसके मुताबिक इस पैकेज को पहले घोषित छह ट्रिलियन डॉलर से घटा कर 3.5 ट्रिलियन डॉलर का कर दिया जाएगा। इस पैकेज को सीनेट के रिकॉन्सिलिएशन नियम के तहत पारित कराया जाएगा। इस नियम के तहत किसी बिल को साधारण बहुमत से पारित कराया जा सकता है। 100 सदस्यीय सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 50 सदस्य हैं। इसके अलावा उप-राष्ट्रपति का वोट भी उसके पास है। इस सहमति का मतलब है कि राष्ट्रपति बाइडन रिपब्लिकन पार्टी को नजरअंदाज कर सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज को पारित कराने पर तैयार हो गए हैं।

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लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि असल में इस सहमति से हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के पारित होने की राह में भी नई कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। इससे रिपब्लिकन पार्टी के और नाराज हो जाने का खतरा है, जिसके कई सीनेटर 1.2 ट्रिलियन के हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर राजी हो गए थे। इसके अलावा नए पैकेज पर बनी आम सहमति से कुछ कंजरवेटिव डेमोक्रेटिक सीनेटर भी नाराज हुए, तो फिर रिकॉन्सिलिएशन नियम से भी नए पैकेज का पारित होना कठिन हो जाएगा।

सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैकॉनेल ने मंगलवार को साफ कहा कि वे डेमोक्रेटिक पार्टी को यह इजाजत नहीं देंगे कि वह अमेरिका को समाजवादी देश बना दे। मैकॉनेल और दूसरे रिपब्लिकन सीनेटर इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के लिए टैक्स बढ़ा कर धन जुटाने के कड़े विरोधी रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटरों के बीच अभी बनी सहमति में यह साफ नहीं किया गया है कि पैकेज का खर्च कहां से जुटाया जाएगा। कुछ सीनेटरों ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि ये खर्च टैक्स वसूली के सिस्टम को अधिक कुशल बना कर और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से जुटाया जाएगा।
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रिपब्लिकन पार्टी का एक विरोध यह भी रहा है कि राष्ट्रपति बाइडन ने अपने पैकेज में सड़क, पुल आदि जैसे हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के अलावा जलवायु परिवर्तन रोकने की योजनाओं, पारिवारिक सहायता कार्यक्रमों और हेल्थ केयर योजनाओं जैसे सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी इसका हिस्सा बना दिया। हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के लिए उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटरों से सहमति बनाई, जबकि 3.5 ट्रिलियन डॉलर के सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज को वे अलग पारित करने की कोशिश कर रहे हैँ।

विश्लेषकों का कहना है कि इस बनी सहमति के बावजूद सभी डेमोक्रेटिक सीनेटरों को इसके पक्ष में मतदान करने के लिए राजी करना राष्ट्रपति बाइडन की सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ ही ये सवाल खड़ा हुआ है कि अब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का क्या होगा, जिस पर रिपब्लिकन सीनेटरों के एक गुट के साथ राष्ट्रपति ने सहमति बनाई थी। सीनेटर में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में हार्ड और सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेजों को पारित कराने के प्रयास साथ-साथ चलेंगे। लेकिन पर्यवेक्षकों का आकलन है कि रिपब्लिकन सीनेटर इसलिए हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर राजी हुए थे, क्योंकि उन्हें अनुमान था कि उसके बाद बाइडन प्रशासन सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान को छोड़ देगा।

रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के कंजरवेटिव सीनेटरों की आपत्ति यह भी है कि अगर टैक्स नहीं बढ़ाया गया, तो फिर मुमकिन है कि पैकेज पर खर्च के लिए सरकार और कर्ज ले। इससे पहले से ही बढ़ रही मुद्रास्फीति की स्थिति और गंभीर हो सकती है। कंजरवेटिव खेमे इसकी इजाजत देने लिए भी तैयार नहीं हैं। 

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ब्रिटेन में आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक खाद्य वस्तुओं और मोटर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के चलते महंगाई लगभग तीन सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को कहा कि मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जून में बढ़कर 2.5 फीसदी हो गई, जो इससे पिछले महीने 2.1 फीसदी थी। जून की दर अगस्त, 2018 के बाद सबसे अधिक है, जब मुद्रास्फीति 2.7 फीसदी हो गई थी।

मुद्रास्फीति की दर बैंक ऑफ इंग्लैंड के दो फीसदी के लक्ष्य से काफी अधिक है, जिसके बाद अनुमान जताया जा रहा है कि ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कीमतों के दबाव को कम करने के लिए जल्द कोई कदम उठा सकता है। कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से उबरने के बाद दुनिया के कई देश मुद्रास्फीति में तेजी से बढ़ोतरी का अनुभव कर रहे हैं। अमेरिका में मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वहां वार्षिक मुद्रास्फीति दर 13 साल के उच्च स्तर 5.4 फीसदी पर पहुंच गई है।
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