इन दिनों न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 78वां सत्र चल रहा है। इस सत्र में मंगलवार को अपने संबोधन में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के साथ संबंध बहाली की बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन के साथ संघर्ष नहीं चाहता है। उनका प्रशासन बीजिंग के साथ अपने तनावपूर्ण संबंधों को 'जिम्मेदारी से प्रबंधित' करना चाहता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन उन मुद्दों पर चीन के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, जहां प्रगति हमारे सामान्य प्रयासों पर निर्भर करती है।
महासभा में अपने संबोधन में बाइडन ने कहा कि जब बात चीन की आती है, तो मैं स्पष्ट और सुसंगत रहना चाहता हूं। हम अपने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदारी से प्रबंधित करना चाहते हैं ताकि यह संघर्ष में न बदल जाए। बाइडन ने कहा कि मेरे कहने का तात्पर्य है कि हम जोखिम कम करने के पक्ष में हैं, चीन के साथ संबंध तोड़ने के नहीं।
बाइडन की ये टिप्पणियां तब आई हैं जब अमेरिकी अधिकारी चीन का दौरा और चीनी मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं। साथ ही बाइडन प्रशासन ने संघर्ष से बचने के लिए बीजिंग के साथ संचार के नियमित चैनल को बनाए रखा है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। उनके अलावा, ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन और वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो दोनों ने सरकार और व्यापार अधिकारियों के साथ बैठकों के लिए हाल ही में चीन की यात्रा की है।
इस बीच, चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की। ब्लिंकन ने एक्स पर पोस्ट करके इस मुलाकात के बारे में बताया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'हमारे द्विपक्षीय संबंधों को जिम्मेदारी से प्रबंधित करने और वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों को संबोधित करने के बारे में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ मेरी एक स्पष्ट और रचनात्मक बैठक हुई।'
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी ने भी मंगलवार को न्यूयॉर्क शहर में 78वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर उपराष्ट्रपति झेंग से मुलाकात की। इस दौरान सीओपी 28 को बढ़ावा देने सहित जलवायु संकट से निपटने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रयासों के महत्वपूर्ण महत्व पर चर्चा की गई।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में अमेरिकी हवाई क्षेत्र में चीनी जासूसी गुब्बारे और यूक्रेन के खिलाफ रूस के समर्थन और व्यापार विवादों को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया था।