नवाज शरीफ लंदन में चार साल का आत्म-निर्वासन समाप्त करने के बाद पिछले महीने पाकिस्तान पहुंचे थे। इसके बाद इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने एवनफील्ड अपार्टमेंट और अल-अजीजिया भ्रष्टाचार मामलों में उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपीलों को बहाल कर दिया, लेकिन सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की। नवाज सुरक्षात्मक जमानत पर हैं।
इसके अलावा, नवाज शरीफ को चुनाव लड़ने के लिए 2028 तक अयोग्य ठहराया गया था। इसके लिए भी उन्हें अदालत से क्लीन चिट की जरूरत है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के वरिष्ठ नेता मियां जावेद लतीफ ने कहा, चुनाव की घोषणा होने के साथ ही अल-अजीजिया और एवनफील्ड मामलों में नवाज की अपीलों पर जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए ताकि वह चुनाव लड़ने के लिए बेदाग साबित हो सकें। लतीफ को शरीफ का करीबी माना जाता है।
पीएमएल-एन सुप्रीमो 2019 में लाहौर की कोट लखपत जेल में सात साल कैद की सजा काट रहे थे, जब उन्हें लाहौर उच्च न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर चार सप्ताह के लिए लंदन जाने की अनुमति दी थी। उन्हें लंदन जाने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया गया था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बीच नवाज के आने के बाद से उन्हें एक तरह से 'प्रधानमंत्री पद के लिए नामित' प्रोटोकॉल दिया गया है क्योंकि उनकी पार्टी के आगामी चुनावों के बाद सत्ता में लौटने की संभावना है।
सैन्य प्रतिष्ठान के साथ शरीफ के स्पष्ट समीकरण को देखते हुए जेल में बंद इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने आरोप लगाया है कि 'लंदन प्लान' के तहत पीएमएलएन सैन्य प्रतिष्ठान के आशीर्वाद से सत्ता में आएगी। उधर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि वह नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे।