ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने रविवार को कहा कि सरकार एक लेखा घोटाले में मुआवजे की प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है, जिसमें सैकड़ों उप-डाकपालों पर धोखाधड़ी का आरोप लगया गया था। इनमें से कई भारतीय मूल के भी हैं।
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में सुनक से 1990 के दशक में हॉरिजोन नाम की त्रुटिपूर्ण आईटी प्रणाली से जुड़े इस ऐतिहासिक घोटाले के बारे में पूछा गया। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि न्याय मंत्री मामले में इस बात को देख रहे हैं कि गलत तरह से दोषसिद्धियों को पलटने और मुआवजा देने की प्रक्रिया को कैसे तेज किया जा सकता है।
सरकार औपचारिक रूप से पोस्ट ऑफिस लिमिटेड का स्वामित्व रखती है। उसने प्रभावित हुए कई उप-डाकपालों को मुआवजे के रूप में लाखों पाउंड का भुगतान किया है। लेकिन कई अन्य अभी वर्षों से इसका इंतजार कर रहे हैं।
सुनक ने कहा, जाहिर है कि यह कुछ ऐसा है जो नब्बे के दशक में हुआ था। लेकिन, वास्तव में इसे देखना और इसके बारे में दोबारा सुनना यह दिखाता है कि यह प्रभावित लोगो के लिए न्याय का कितना भयावह पतन है। यह महत्वपूर्ण है कि अब उन लोगों को वह न्याय मिले, जिसके वे हकदार हैं। इसी को लेकर मुआवजे की योजनाएं हैं।
उन्होंने कहा, सरकार ने पहले ही हजारों लोगों को लगभग 150 मिलियन पाउंड का भुगतान किया है। बेशक, लोग यथाशीघ्र धन प्राप्त करना चाहते हैं, इसीलिए मुझे लगता है कि 600,000 ब्रिटिश पाउंड तक का अंतरिम भुगतान किया जा सकता है। प्रभावित किसी भी व्यक्ति के लिए तीन अलग-अलग योजनाएं उपलब्ध हैं और उन्हें आगे आना चाहिए।