प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कहा कि सामाजिक मेलजोल काफी अहम है। नस्ल, भाषा और धर्म पारंपरिक तौर पर सिंगापुर से अलग नहीं हो सकता। सिंगापुर की साझा पहचान के लिए काफी कोशिशें की गई हैं और देश हमेशा बाहरी ताकतों का सामना करेगा।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग 15 मई को अपने पद से इस्तीफा देंगे। लूंग ने अपने अंतिम भाषण में एकजुटता की अपील की और कहा कि सिंगापुर के लोग चीन और भारत के साथ अपनी जातीय जड़ों को नकार नहीं सकते हैं। बता दें, लूंग की जगह उप प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग लेंगे।
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सामाजिक मेलजोल काफी अहम
मई दिवस रैली के दौरान ली ने कहा, 'सामाजिक मेलजोल काफी अहम है। नस्ल, भाषा और धर्म पारंपरिक तौर पर सिंगापुर से अलग नहीं हो सकता। सिंगापुर की साझा पहचान के लिए काफी कोशिशें की गई हैं और देश हमेशा बाहरी ताकतों का सामना करेगा, जो कि अपनी आबादी के अलग-अलग वर्गों को अलग दिशाओं में खींचते हैं।'
प्रधानमंत्री ली ने कहा, 'हम अपनी विविध जातीय जड़ों और धार्मिक लगाव को खत्म नहीं कर सकते, जिनमें चीन के साथ चीनी सिंगापुरी, भारत में अपने विभिन्न पैतृक घरों वाले भारतीय सिंगापुरी, हमारे शेष क्षेत्र के मलय और वैश्विक मुस्लिम उम्मा शामिल हैं।'
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ऐतिहासिक धरोहरों को खोना नहीं चाहते
72 साल के ली ने कहा कि यह खतरा हो सकते हैं, लेकिन फिर भी हम इन समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को खोना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नस्लीय और धार्मिक सद्भाव प्रगति पर एक काम जारी रहेगा, लेकिन सिंगापुर को अन्य संभावित विभाजनों के प्रति भी सचेत रहना चाहिए।
सिंगापुर की प्रणाली विश्वास के मजबूत आधार पर टिकी हुई
उन्होंने कहा कि सिंगापुर की प्रणाली विश्वास के मजबूत आधार पर टिकी हुई है, पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) सरकार इसे बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इसलिए हर बार आम चुनाव में पीएपी को लोगों का साथ मिलता है।