अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार को कहा है कि उसे ऐसी किसी भी जांच के बारे में नहीं पता है, जो ये पता करने के लिए गठित की गई थी कि पाकिस्तान ने 27 फरवीर को अपना एफ-16 लड़ाकू विमान खोया या नहीं। पेंटागन का ये बयान उस रिपोर्ट के बिलकुल विपरीत है, जिसमें बिना पहचान के रक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान ने अपना एफ-16 लड़ाकू विमान नहीं खोया है।
गुरुवार को अमेरिका की पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' ने ये खबर प्रकाशित की थी। पत्रिका में लिखा था कि पाकिस्तान के पास मौजूद एफ-16 विमानों की अमेरिका ने गिनती की है। इसमें यह पता चला है कि उनमें से एक भी विमान कम नहीं है। पत्रिका ने अमेरिकी रक्षा विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से ये बात कही थी। इस रिपोर्ट में इन अधिकारियों की पहचान नहीं बताई गई।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता का कहना है, "विभाग ऐसी किसी भी जांच के बारे में नहीं जानता है।"
जब विभाग से सवाल पूछा गया कि इस रिपोर्ट को वह खारिज करेंगे या इसकी पुष्टि, तो उन्होंने खुद को इस रिपोर्ट से दूर रखा। विभाग का कहना है, "हम सरकार के दूसरी सरकार के साथ हुए समझौतों के बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कह सकते।"
इस मामले पर भारतीय वायुसेना का कहना है, "नौशेरा सेक्टर में हवाई झड़प के दौरान भारतीय वायुसेना के मिग 21 बाइसन विमान ने एक एफ-16 को मार गिराया था।"
वायुसेना ने कहा कि इस बात के उसके पास सबूत हैं। पत्रिका ने यह दावा तब किया है जब भारत 28 फरवरी को एफ-16 द्वारा दागी गई एम्राम मिसाइल के टुकड़े भी अमेरिका के सामने रख चुका है।
गौरतलब है कि पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर बम गिराए थे। भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने भारत के सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला कर दिया था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना का मुंहतोड़ जवाब दिया।
भारत ने पाकिस्तान का एफ-16 लड़ाकू विमान गिरा दिया था। जब अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान बेचा था, तो कहा था कि वह इसका इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ नहीं करेगा जबकि उसने भारत के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया।
अमेरिका ने एफ-16 बेचते वक्त पाकिस्तान से कहा था कि वह आतंक के खिलाफ और अपनी आत्मरक्षा के लिए ही इसका इस्तेमाल करेगा। वहीं अगर उसे किसी देश के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल करना है तो पहले अमेरिका से इसकी मंजूरी लेनी होगी।