पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू-कश्मीर के शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ बृहस्पतिवार को हुई बैठक को शुक्रवार को 'नाटक' और 'पीआर कवायद' बताया है। जबकि दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक में राज्य के विभिन्न दलों के 14 नेता शरीक हुए थे। उन्होंने सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत की थी और उनसे कहा था कि केंद्र की प्राथमिकता वहां जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना है।
पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर पर नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के एक दिन बाद कहा, 'मेरे विचार से यह एक नाटक था और यह नाटक क्यों था? क्योंकि इसे अधिक से अधिक जनसंपर्क कवायद कहा जा सकता है, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।'
विशेष दर्जे पर अस्पष्ट बयान
कुरैशी ने कहा कि उस बैठक में कश्मीरी नेताओं ने 'एक स्वर से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की।' उन्होंने कहा, 'नेताओं को उनकी मांग का कोई ठोस जवाब नहीं मिला और इसके बजाय कहा गया कि कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने के बारे में उचित समय पर फैसला किया जाएगा, जो एक अस्पष्ट बयान है।'
हुर्रियत को आमंत्रित नहीं किया गया
पाक विदेश मंत्री ने कहा कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नेतृत्व को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। कुरैशी ने दावा किया कि भारत कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव का प्रयास कर रहा है जो पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसके दीर्घकालिक प्रभाव होंगे।
भारत के साथ कोई 'बैक डोर' चैनल नहीं
भारत के साथ परदे के पीछे की कूटनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत के साथ ऐसा कोई संवाद नहीं चल रहा है, लेकिन उन्होंने पुष्टि की कि खुफिया स्तर पर संपर्क हुआ है। उन्होंने कहा, 'कोई ‘बैक-डोर चैनल’ नहीं है, लेकिन खुफिया स्तर पर क्षेत्रीय स्थिति को लेकर संपर्क है, लेकिन कोई ‘बैक-डोर चैनल’ नहीं है।