दुनिया भर में मनी लांड्रिंग और आतंकी वित्त पोषण पर नजर रखने वाले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को इस बार भी कोई राहत नहीं दी है। पाकिस्तानी मीडिया के रिपोर्ट के अनुसार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान बरकरार रहेगा।
लगातार रखी जाएगी पाकिस्तान पर नजर : प्लेयर
एफएटीएफ के अध्यक्ष मारकस लेयर ने कहा कि पाकिस्तान पर लगातार नजर रखी जाएगी। हालांकि पाकिस्तान ने कुल 26 बिंदुओं में से 26 पर कदम उठाए हैं, लेकिन कई मानकों पर उसे असरदार व प्रभावी कदम उठाना हैं। खासकर मनी लांड्रिंग की जोखिम अधिक है। इसके कारण संगठित अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। उनका कहना है कि अभी एक बड़ा काम संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी करार दिए गए संगठनों और उनके आकाओं के खिलाफ जांच और सजा देने का है, जिसे पाकिस्तान को पूरा करना है।
पाकिस्तान एफएटीएफ की सिफारिशों पर अमल करने में विफल रहा है। पाकिस्तान में विदेशों से और घरेलू स्तर पर लगातार आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद मिलती रही है। बता दें, पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में डाला गया था। इसके बाद अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुए एफएटीएफ की समीक्षा के दौरान भी उसे कोई राहत नहीं दी गई, जबकि वह इसके लिए लगातार कोशिश करता रहा।
पाकिस्तान को पूरी उम्मीद थी कि वह आतंकवाद संबंधी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर आ जाएगा। एफएटीएफ की बैठक 21 जून से शुरू हुई थी। 25 जून को वोटिंग हुई। इससे उसे तगड़ा झटका लगा। पाकिस्तान को दिवालिया हो रही अपनी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए ग्रे लिस्ट से बाहर निकलना जरूरी था, लेकिन उसने वो उपाय नहीं किए जो, एफएटीएफ चाहता था। एफएटीएफ में 37 देश और 2 क्षेत्रीय संगठन हैं।