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'पाकिस्तान में सुजाताओं की लाइन लगी हुई है'

Mon, 02 Feb 2015 01:29 PM IST
वुसतुल्लाह खान/बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
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मुझे भारत की पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह से कोई हमदर्दी नहीं क्योंकि जहां मैं रहता हूं वहां ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं।
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पाकिस्तान के तीसरे गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद को चौथे गवर्नर जनरल इस्कंदर मिर्जा ने डंडा-डोली करके उनके घर पहुंचवा दिया और फिर अपने पद की शपथ ले ली।

इन्हीं इस्कंदर मिर्जा को उन्हीं के मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर जनरल अयूब खान ने पांच अफसर आधी रात को भिजवा के एक टाइप किया हुआ त्यागपत्र सामने रख दिया और त्यागपत्र पर भरा पिस्तौल भी पेपरवेट के तौर पर रख दिया। और एक प्लेन स्लीपिंग सूट पहने हुए मिर्जा साहब को थमा दिया कि सत्ता छोड़ दें।

अगली सुबह उन्हें तेहरान जाने वाली फ्लाइट पर यह कहकर सवार कर दिया गया कि जहां रहो खुश रहो। और फिर एक दिन सदर अयूब खान से उन्हीं के कमांडर इन चीफ याहया खान ने ये कहकर इस्तीफा मांग लिया कि सर मुझे और मुश्किल में न डालें... आपकी हमारे दिल में बहुत इज्जत है...
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भीगी बिल्ली क्या करे?

फिर इन्हीं याहया खान को बांग्लादेश के अलग होने के बाद अफसरों ने घेर कर गालियां दीं और वो भीगी बिल्ली बने सारा शासन जुल्फ‌िकार अली भुट्टो के हवाले करके बगैर झंडे की गाड़ी में अपने भाई के घर पहुंचा दिए गए।

और फिर तीन महीने बाद भुट्टो साहब ने अपने ही बनाए हुए कमांडर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल गुल हसन को एक सरकारी काम से पिंडी से लाहौर बुलवाया।

कार में भुट्टो साहब के दो वफादार गुलाम मुस्तफा खर और हफीज पीरजादा भी सवार थे। उन्होंने लाहौर में गाड़ी जनरल गुल हसन के घर के सामने रुकवाई और टाटा करते हुए ड्राइवर से कहा, 'चल भाई।'

और फिर इन्हीं भुट्टो साहब को उन्हीं के बनाए हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल ज‌िया-उल-हक ने कहा, सर मैं बहुत मजबूर हूं... मुझे माफ कर दीजिएगा.... ये जो सामने हेलिकॉप्टर खड़ा है न वो आपको मरी ले जाएगा.... वहां आपका बहुत ख्याल रखा जाएगा... और फ‌िर भुट्टो साहब के साथ जो हुआ वो तो आप जानते ही हैं...
प्रधानमंत्री से भूतपूर्व...
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मंत्री जी आज भी कुर्सी पर झूल रहे हैं..

और फिर इन ज‌िया-उल-हक‌ साहब ने अपने ही हाथ से मोहम्मद खान जुनेजो को प्रधानमंत्री बनाया और जब जुनेजो साहब वाकई अपने आपको प्रधानमंत्री समझने लगे तो फिलीपींस की सरकारी यात्रा से वापसी पर प्रधानमंत्री का विमान पिंडी में उतरा और उन्हें बताया गया कि अब वो प्रधानमंत्री के साथ भूतपूर्व जोड़ लें।

कुछ इसी तरह का मिलता जुलता काम श्रीमती बेनजीर भुट्टो और श्रीमान नवाज शरीफ के साथ दो-दो दफा हुआ। और जिसने दूसरी दफा नवाज शरीफ को विदा किया उसी परवेज मुशर्रफ के साथ आसिफ अली जरदारी ने हाथ दिखा दिया। और मुशर्रफ साहब को दूसरी पारी ठीक तरह से शुरू करने से पहले ही गॉर्ड ऑफ ऑनर पेश करके राष्ट्रपति भवन से हंसते-खेलते रुख्सत कर दिया।

जब ऐसे ऐसे दिग्गजों के साथ ये हो सकता है तो आम-साम अफसर लोग किस गिनती शुमार खाते में हैं....

पिछले ही महीने पाकिस्तान में पेट्रोल अचानक गायब हो गया... पेट्रोलियम मंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने मीडिया से कहा कि वो इस स्कैंडल पर शर्मिंदा हैं। मगर हुआ क्या... नीचे के तीन अफसर बलि चढ़ गए.... और शर्मिंदा मंत्री जी आज भी कुर्सी पर झूल रहे हैं....

तो फिर मैं सुजाता सिंह से काहे को हमदर्दी करूं.... होंगी वो बड़ी ईमानदार और अच्छी अफसर, पर थीं तो अफसर ही ना... बड़े बड़े देशों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती ही रहती हैं....
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