पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार रात से रविवार सुबह तक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक संकट और गहरा गया। तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल करने के लिए अंतिम सांस तक लड़ने का ऐलान कर दिया है। वहीं, राजनीतिक गतिरोध के चलते बिगड़ते हालात पर पाकिस्तानी सेना ने भी गहरी चिंता जाहिर की है। रविवार रात सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ और शीर्ष कमांडरों की आपात बैठक के बाद जारी बयान में सेना ने लोकतंत्र का समर्थन किया है, लेकिन शनिवार रात की हिंसा पर नाखुशी जाहिर की है।
रविवार रात रावलपिंडी में सेना मुख्यालय में शीर्ष कमांडरों की बैठक के बाद जारी बयान में सेना ने कहा है कि राजनीतिक टकराव और इसकी वजह से हिंसा में मौतें होना चिंता की बात है। प्रदर्शनकारियों पर फिर बल प्रयोग से स्थिति और बिगड़ सकती है। 1947 में पाकिस्तान की आजादी के बाद आधे समय तक सत्ता संभालने वाली सेना ने कहा है कि संकट का समाधान बिना समय गंवाए राजनीतिक स्तर पर ही किया जाना चाहिए। सैन्य कमांडरों की यह बैठक वैसे सोमवार को होने वाली थी, लेकिन स्थिति बिगड़ती देख आपात बैठक बुलाई गई।
सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जारी झड़पों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 500 अन्य घायल हो गए। हालांकि मौलवी कादरी ने अपने सात समर्थकों के मारे जाने का दावा किया है। कई पत्रकार भी घायल हुए हैं। इस्लामाबाद में हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। बवाल बढ़ने के बाद स्टाफ के साथ लाहौर गए नवाज शरीफ रविवार को इस्लामाबाद लौट आए। शरीफ ने राजनीतिक संकट पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया है।