पाकिस्तान में चुनाव पर नजर रखने वाली एक एक स्वतंत्र निगरानी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2018 के आम चुनाव में पूरे देश में हुए मतदान में कुल 16.7 लाख वोट खारिज किए गए हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2013 के आम चुनाव में खारिज मतों की तुलना में 11.7 फीसदी ज्यादा है। साल 2013 में 15 लाख वोट खारिज किए गए थे।
निगरानी संस्था फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (एफएएफईएन) ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट जारी की।
अगर मतपत्र पर यह साफ नहीं होता कि मतदाता ने किस उम्मीदवार के नाम पर निशान लगाया है या एक से अधिक नामों पर निशान लगाया गया हो तो मतपत्र खारिज कर दिया जाता है।
पाकिस्तान निर्वाचन आयोग के मुताबिक 10 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत वोटर हैं लेकिन सिर्फ 51 फीसदी ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (एफएएफईएन) की जारी की गई रिपोर्ट इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र (आईसीटी) समेत पाकिस्तान के चार प्रांतों में समूची मतदान प्रक्रिया की निगरानी पर आधारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2013 में आईसीटी क्षेत्र में खारिज वोटों की तुलना में इस बार करीब दोगुनी संख्या में वोट खारिज हुए।
इसके अनुसार बलूचिस्तान में खारिज मतों की संख्या में 40 फीसदी, खैबर पख्तूख्वा (केपी) में 30.6 फीसदी, सिंध में सात फीसदी और पंजाब में 6.6 फीसदी इजाफा हुआ।