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कैसे ऐसे बनती है पाकिस्तानी सरकार और क्या है यहां जम्हूरियत का सियासी गणित

Wed, 25 Jul 2018 04:05 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पाकिस्तान चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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पाकिस्तान में मतदान चल रहा है। करीब साढ़े तीन हजार उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया जा रहा है।  पाकिस्तान में हो रहे इसबार के चुनाव पिछले कई चुनावों से अलग हो रहे हैं और कहा ये भी जा रहा है कि चुनाव आयोग इसे साफ सुथरा कराने की कोशिश में जुटा है। पहली बार यहां विकलांग और जेल में बंद कैदियों को भी मतदान करने का मौका दिया जा रहा है। 

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वहीं महिला शक्ति को पहचानते हुए चुनाव आयोग ने विशेष गाइडलाइन तैयार की है जिसमें कहा गया कि अगर किसी भी पोलिंग स्टेशन पर कुल मतदान में पांच फीसदी महिलाएं वोट नहीं डालती हैं तो वह केंद्र का चुनाव कैंसिल मााना जाएगा।

कई बदलावों के साथ यह चुनाव काफी खास माना जा रहा है। अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम फिलहाल जेल में हैं और पार्टी अध्यक्ष शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री के प्रबल उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
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ये भी पढ़ें- Live पाकिस्तान चुनाव 2018: मतदान के दौरान बम ब्लास्ट में 31 की मौत, आईएसआईएस ने ली जिम्मेदारी

वहीं क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान भी इस बार प्रधानमंत्री बनने की होड़ में शामिल हैं।  बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो भी दोनों प्रधानमंत्री उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। अब देखना यह है कि पाकिस्तान चुनाव की प्रक्रिया कैसी है।

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यह चुनाव कुछ मायनों में भारत जैसा है

pakistan election
उम्मीदवार और सीटों का बंटवारा
 
इस चुनाव में 3,459 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें 171 महिलाएं हैं। चुनाव में करीब 10.596 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, जो इन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने के लिए घरों से निकल चुके हैं। योग्य मतदाताओं में 4.67 करोड़ महिलाएं हैं, जबकि 5.92 करोड़ पुरुष मतदाता हैं।

नेशनल एसेम्बली पाकिस्तान की संसद का निचला सदन है, जिसकी सदस्य संख्या 342 है। लेकिन इसके केवल 272 सीटों के लिए चुनाव होता है, जबकि 70 सीटें अल्पसंख्यक समुदाय, महिलाओं और धार्मिक समुदाय के लिए आरक्षित होती हैं। 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं।

पाकिस्तान की नेशनल एसेम्बली यानी भारत की लोकसभा। जिसके सदस्यों का चुनाव मतदान के जरिए देश की जनता करती है। जिस तरह भारत में सबसे अधिक मत पाने वाला विजेता होता है वैसे ही पाकिस्तान में भी नेशनल एसेम्बली के चुनाव के लिए उसी 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' सिस्टम का इस्तेमाल होता है
  • पाकिस्तान में आज भी मतदान बैलेट पेपर के जरिये होता है जबकि भारत में पिछले एक दशक से वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग से कराया जा रहा है। 
  • भारत में अभी वन नेशन-वन इलेक्शन की बात की जा रही है जबकि पाकिस्तान में नेशनल एसेंबली और प्रोविंसियल एसेंबली चुनाव साथ-साथ होता है। 
  • पाकिस्तान में पंजाब जनसंख्या के मामले में सबसे बड़ा प्रांत पंजाब है पहले यहां 148 सीटें थीं जो अब 141 रह गई हैं।  
  • सिंध आज भी 61 सीटों के साथ जबकि इस्लामाबाद कैपिटल टेरीटरी होने के बावजूद वहां तीन सीटें ही हैं।  
  • खैबर पख्तून में चार सीटे हैं और बलूचिस्तान में दो और सीटों का इजाफा हुआ है।
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ऐसे बनती है पाकिस्तानी सरकार
  • राष्ट्रपति का चयन इलेक्टोरल कॉलेज करता है, राष्ट्रपति का चुनाव अगस्त 2018 में होने वाला है। 
  • सीनेट का कार्यकाल 6 साल का होता है और तीन वर्ष में इसके सदस्यों के लिए चुनाव होता है । सीनेट में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष प्रमुख होते हैं। इसका कार्यकाल 5 साल का होता है। इस चुनाव के जरिए देश का अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता का चयन होता है। 
  • नेशनल एसेंबली में  342 सीटें हैं जिसमें 272 सामान्य सीटें हैं 10 सीटें  अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं जबकि 60 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं।

पाकिस्तान में  4 राज्य और 2 क्षेत्र है इसमें सीटों का बंटवारा इस प्रकार है
  • 39 सीटें खैबर पख्तूनख्वा,12 फाटा, 3 इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र, 141 पंजाब, 61 सिंध और 16 बलोचिस्तान में हैं।
  • सीनेट में 104 सीटें हैं जिसमें 56 सामान्य सीटें,6 टेक्नोक्रेट और उलेमा सीटें, 16 महिला सीट, 4 अल्पसंख्यक सीट, 4 फेडरल कैपिटल और 8 फाटा की हैं।
  • सरकार बनाने और बहुमत के लिए किसी राजनीतिक दल को 137 सामान्य सीटों पर चुनाव जीतना आवश्यक है।
  • पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव नहीं कराये जाते हैं।
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