पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में बुधवार को ईशनिंदा की आरोपी एक ईसाई महिला की फांसी की सजा को पलट दिया और उसे बरी कर दिया। अपने पड़ोसियों के साथ विवाद के दौरान इस्लाम का अपमान करने के आरोप में साल 2010 में आसिया बीबी को दोषी करार दिया गया था।
उन्होंने हमेशा खुद को बेकसूर बताया हालांकि बीते आठ वर्ष में उन्होंने अपना अधिकतर समय एकांत कारावास में बिताया। बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को लेकर समर्थन बेहद मजबूत है और आसिया बीबी के मामले ने लोगों को अलग-अलग धड़ों में बांट दिया है।
अब लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों में राजनीतिक पार्टियों के भी नेता शामिल हैं। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने जी. टी. रोड सहित करीब 21 सड़कों को ब्लॉक कर दिया है और नारेबाजी कर रहे हैं।
कराची में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने टायर भी जलाए हैं। इस मामले के खिलाफ बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी है। साथ ही सार्वजनिक जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी गई है।
इससे पहले पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने सुबह अपना फैसला सुनाया। पीठ ने इस नतीजे पर पहुंचने के करीब तीन सप्ताह बाद इस संबंध में फैसला सुनाया। फैसला आने में हो रही देरी को देखते हुए ईशनिंदा विरोधी प्रचारकों ने प्रदर्शन की धमकी दी थी।
जस्टिस निसार ने फैसले में कहा, 'उनकी दोषसिद्धि को निरस्त किया जाता है और अगर अन्य आरोपों के तहत जरूरी नहीं हो, तो उन्हें फौरन रिहा किया जाये।'
गौरतलब है कि आसिया बीबी पर आरोप था कि उन्होंने 14 जून 2009 को शेखूपुरा में फल बीनते समय तीन अन्य महिलाओं से चर्चा के दौरान मोहम्मद साहब को लेकर तीन व्यंग्यात्मक और अपमानजनक बयान दिए थे।
इसके बाद साल 2010 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनायी थी, जिसे 2014 में लाहौर उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। बहरहाल, हिंसा की आशंका को देखते हुए इस्लामाबाद में सुनवाई के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किये गये थे।