फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदुओं की हिफ़ाज़त करनी होगी: नवाज़ शरीफ़

Sun, 23 Mar 2014 03:05 PM IST
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में सिंध में एक हिंदू मंदिर पर हमले के साथ भारतीय आम चुनावों से जुड़ी ख़बरें भी प्रमुखता पा रही हैं। वहीं भारत में कई अख़बारों ने भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी खींचतान पर संपादकीय लिखे हैं।
विज्ञापन


आम चुनावों के मौक़े पर बीजेपी में टिकटों पर मचे घमासान पर नई दिल्ली से छपने वाले रोज़नामा ख़बरें लिखता है चूंकि बीजेपी की हालत बेहतर दिख रही है तो उसके लिए टिकटों की मारामारी है।

अख़बार के अनुसार बीजेपी तो ये कह सकती है कि उसकी हालत उन पार्टियों से अच्छी है जिनमें नेता चुनावी मैदान छोड़ कर भाग रहे हैं, लेकिन टिकटों के लिए इस तरह की खींचतान नुकसानदेह साबित हो सकती है क्योंकि असंतुष्ट अंदरूनी ज़ख़्म दे सकते हैं।
विज्ञापन


आडवाणी को चौकीदार से लुटने का डर

उधर राष्ट्रीय सहारा ने लिखा है कि बीजेपी के बुज़ुर्ग नेता आडवाणी की अपनी ही पाली हुई पार्टी ने उनके इस आग्रह को ख़ारिज कर दिया कि उन्हें गांधीनगर की बजाय भोपाल से टिकट दिया जाए। अख़बार के अनुसार क्या विडंबना है जो आडवाणी कभी मोदी को अपने चुनाव क्षेत्र का चौकीदार समझते थे,आज उन्हें उसी चौकीदार से लुट जाने का डर सता रहा है।

पार्टी में आज उस नेता का अपमान हो रहा है, जिसने दो सांसदों की पार्टी को 80 सांसदों वाली पार्टी बनाया। 'हमारा समाज' का संपादकीय है - ख़ुशवंत सिंह, एक दिया बुझ गया। अख़बार लिखता है कि उन्होंने क़लम की गरिमा को बरक़रार रखते हुए वही लिखा जो उनके मन में आया।

कई बार वो विवादों में भी आए लेकिन उन्होंने कभी किसी ताक़त या व्यक्ति के सामने घुटने नही टेके। अख़बार के अनुसार क़लम का ये मतवाला आज विदा हो गया है। सदियों में खुशवंत सिंह जैसे क़लमकार पैदा होते हैं, उनके जाने से पत्रकारिता और साहित्य में निश्चित रूप से ख़ला पैदा हो गया है।

बातचीत और धमाके साथ-साथ नहीं

उधर, पाकिस्तान में तालिबान से फिर बातचीत की कोशिशें हो रही हैं। इस पर 'नवाए वक़्त' लिखता है कि हर किसी ने इन प्रयासों का समर्थन किया है लेकिन बातचीत और धमाके साथ-साथ नहीं चल सकते हैं।

अख़बार कहता है कि एक तरफ़ बातचीत के लिए जगह तय की जा रही है तो दूसरी तरफ़ उत्तरी वज़ीरिस्तान में हुए हमले में चार महिलाओं समेत छह लोग मारे गए हैं। तालिबान अगर गंभीर है तो अपनी कार्रवाइयां बंद करे क्योंकि बातचीत के प्रयास शुरू होते ही सेना ने अपना अभियान बंद कर दिया है।

दैनिक ख़बरें ने अपने पहले पन्ने पर एक तस्वीर छापी है जिसमें एक मरे हुए बैल को देखा जा सकता है। ये तस्वीर है सिंध प्रांत के थर पारकर ज़िले की जहां इन दिनों गंभीर सूखा पड़ रहा है। इस इलाक़े में भुखमरी से दर्जनों बच्चे मर चुके हैं।

गैस और पेट्रोल के दाम लाएंगे राहत

'औसाफ़' का संपादकीय है - रुपये की कीमत में हुई वृद्धि वास्तविक है या फिर अस्थायी।

अख़बार लिखता है कि डॉलर सस्ता होने के कई कारण हैं लेकिन आम लोगों को राहत तो तब मिलेगी जब बिजली, गैस और पेट्रोल के दाम कम होंगे।

अख़बार के मुताबिक़ जब तक सब लोग अपना प्रत्यक्ष टैक्स ईमानदारी से अदा नहीं करेंगे तब तक मुद्रा बाज़ार अविश्वास की स्थिति का शिकार रहेगा

भारत में दंगे सुनने में आते ही रहते हैं

जंग ने पिछले दिनों सिंध प्रांत में एक हिंदू मंदिर को जलाने की घटना पर संपादकीय लिखा है। जिसमें प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का ये बयान भी है कि हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की रक्षा की जानी चाहिए।

अख़बार कहता है कि हिंदू और मुसलमान दंगे और अल्पसंख्यकों पर हमले होना भारत में ख़ूब सुनने को मिलते हैं लेकिन अब इनका पाकिस्तान में आना दुर्भाग्यपूर्ण है।

अख़बार का कहना है कि ज़रूरी है कि मामले की पूरी जांच हो और उन लोगों को बेनकाब किया जाए जिन्होंने सिंध में दंगों की साज़िश रची।

विज्ञापन

'बीपीएल को ऊपर उठाया जाए'

दैनिक एक्सप्रेस ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है कि विकीलीक्स ने कभी भाजपा नेता नरेंद्र मोदी को ईमानदार नहीं बताया है। फर्ज़ी पोस्टर को लेकर हुए इस विवाद की ख़बर और भी कई अख़बारों में है।

दैनिक आज ने बीते दिनों दिए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ के भाषण पर संपादकीय लिखा है। इसमें नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि ज़रूरत इस बात की है कि हथियारों की दौड़ में पड़ने के बजाय ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को ऊपर उठाया जाए।

अख़बार के अनुसार जहां तक ग़रीबी और अज्ञानता का सवाल है तो पाकिस्तान में ज़रूरत इस बात की है कि कदम उठाने से पहले ठोस रणनीति बनाई जाए, तभी उनका कोई फ़ायदा होगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें