पिछले महीने पीओके में भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक का असर पाकिस्तान में अब तक बना हुआ है। भारत की सैन्य कार्रवाई न सिर्फ आतंकियों, बल्कि उन्हें पनाह देने वाली नवाज सरकार के लिए भी बुरे दिन लेकर आई है। आलम यह है कि पाक सरकार को खुद की सेना से अल्टीमेटम मिला है। पांच में से दिन दो बीत गए हैं।पाकिस्तान के अखबार डॉन ने सूत्रों के हवाले यह खबर दी है कि नवाज सरकार अब दिन गिन रही है।
दरअसल, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद वैश्विक स्तर पर हुई थू-थू को झेलने के बाद पाक पीएम नवाज शरीफ ने पिछले दिनों रावलपिंडी में सेना के साथ एक बैठक की थी। नवाज ने सेना से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था। नवाज ने कहा था कि अगर अब भी आतंकियों के खिलाफ कदम नहीं उठा गया भारत का उद्देश्य सफल हो जाएगा, पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा। बैठक में पाक सेना प्रमुख राहील शरीफ और नवाज के भाई शाहबाज शरीफ भी मौजूद थे। शाहबाज पंजाब प्रांत के सीएम हैं।
सेना और पाक सरकार के बीच हुई इस बात को पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लीक कर दिया था। मीडिया में खबर आने के बाद से हड़कंप मचा है। सेना और सरकार दोनों अखबार की खबर को मनगढ़ंत और झूठा करार दिया। पाक सरकार ने खबर छापने वाले डॉन के पत्रकार सिरिल अलमिदा के देश से बाहर जाने तक पर पाबंदी लदा दी थी, हालांकि बाद में उसे खारिज कर दिया। पाक सेना ने नवाज से सारे मामले की पड़ताल के लिए कहा था, और पांच दिन के भीतर जानकारी मुहैया कराने की बात कही थी।
नवाज और सेना पर बंटा पाक मीडिया
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मीडिया में खबर है कि सेना से मिले अल्टीमेटम के बाद नवाज शरीफ परेशान हैं। उनसे सफाई देते नहीं बन रही है। वहीं, डॉन के संपादक ने साफ किया है कि उन्हें जानकारी सेना और सरकार के ही सूत्रों से मिली है और एकदम सही है।
अखबार की दावा है कि नवाज शरीफ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते है, लेकिन सेना उन्हें ऐसा नहीं करने दे रही। नवाज मजबूर हैं।
उधर, दुनिया भर की आलोचना झेल रहे पाकिस्तान की मीडिया भी एकमत नहीं दिख रही है। नवाज सरकार, सेना और मुल्क के हालात को लेकर मीडिया में अलग-अलग राय है। डॉन जहां सरकार की तरफदारी करता दिख रहा है तो वहीं पाकिस्तान के कई न्यूज चैनल सेना के रुख का समर्थन कर रहे हैं।
एक टीवी बहस में पत्रकार ने यहां तक बोल दिया ''इनकी काबिलियत छोटू गैंग को पकड़ने की है नहीं, ये जैश के आतंकियों को कहां से पकड़ेंगे? जिस गुलु बट्ट के पास एक बंदूक थी, उसको तो ये पकड़ नहीं सके और इन्हें सेना बुलानी पड़ी।''
फिर तख्तापलट के साए में पाक?
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पाक सेना प्रमुख राहील शरीफ नवंबर में रिटायर हो रहे हैं। लेकिन पाक सरकार बखूबी जानती है कि राहील की विदाई उनकी इच्छा पर ही निर्भर करेगी। ऐसे में सेना के साथ बढ़ रहे मतभेद कहीं नवाज के लिए भारी न पड़ जाएं, यह आशंका बनी हुई है, क्योंकि पाकिस्तान में सेना द्वारा तख्ता पलट कोई नई बात नहीं है।
उधर, जनता में राहील शरीफ की छवि अच्छी बताई जाती है। पाकिस्तान में पिछले दिनों सामाजिक संगठनों द्वारा राहील के समर्थन में पोस्टर-बैनर तक लगाए थे।
वहीं, नवाज शरीफ के लिए एक सिरदर्दी यह भी है कि विपक्ष पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद उनके पीछे हाथ धोकर पड़ा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने तो भारत के खिलाफ बुलाई गई शरीफ की बैठक में जाने तक से इनकार कर दिया था। वहीं बिलावल भुट्टो नवाज को निशाना बनाकर यहां तक कह चुके हैं ''मोदी का जो यार है, गद्दार है... गद्दार है... गद्दार है... हालांकि यह नारा वायरल होने के बाद में बिलावल इससे किनारा करते दिखे। फिलहाल राहील शरीफ जब तक रिटायर नहीं हो जाते, नवाज शरीफ के लिए मुस्किल का दौर जारी रहने वाला है।