फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विरासत में मिला बदहाल पाकिस्तान तो इमरान कैसे बनाएंगे 'नया पाकिस्तान'

Sun, 29 Jul 2018 12:34 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
इमरान खान।
विज्ञापन

पाकिस्तान में आम चुनाव के नतीजे आ चुके हैं पीटीआई प्रमुख इमरान खान का वजीर-ए-पाकिस्तान बनाना लगभग तय हो चुका है। पीटीआई के वरिष्ठ प्रवक्ता फैसल जावेद खान ने बताया कि इमरान खान पाकिस्तान के स्वाधीनता दिवस आगामी 14 अगस्त को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। मौजूदा समय में पाकिस्तान की आबादी 20.7 करोड़ है। 1960 के बाद से अब तक पाकिस्तान की आबादी पांच गुना तक बढ़ चुकी है।

विज्ञापन


'नया पाकिस्तान' बनाने के वादे पर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीए-ए-इंसाफ आम चुनाव में 116 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान के आम चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान मुल्क के मौजूदा खतरनाक हालातों को कैसे संभालते हैं।

ये भी पढ़ें: इमरान खान ने जादुई नंबर (137) के लिए शुरू की कवायद, छोटे दलों के साथ करेंगे गठबंधन
विज्ञापन



जानकार कह रहे हैं कि आने वाले समय में इमरान खान के लिए नया पाकिस्तान का वादा निभा पाना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। क्योंकि इमरान ऐसे दौर में पाकिस्तान की कमान संभालने जा रहे हैं, जब कई मोर्चों पर देश की स्थिति बेहद ही खराब है। इतना ही नहीं, जानकार यह भी कह रहे हैं कि भारत भी पड़ोसी के नए नेतृत्व से ज्यादा उम्मीद न करे तो बेहतर होगा।

इमरान खान को फिलहाल पाकिस्तान की सेना का ‘लाडला’ माना जा रहा है लेकिन करीब छह साल पहले उन्होंने बयान दिया था कि पाकिस्तान में ‘सेना के दिन अब लद गए हैं।’ इमरान की पार्टी पीटीआई ऐसे समय में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है जब उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों और कई टिप्पणीकारों का मानना है कि पूर्व क्रिकेटर अब सेना के ‘लाडले’ बन गए हैं और सेना उनकी मदद के लिए पर्दे के पीछे रहकर काम कर रही है। ऐसे में इमरान के 2012 के बयान और उनके आज के रुख में बड़ा फर्क देखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें: 'पाकिस्तानी सेना को जूता पॉलिस करने वाला चाहिए था और इमरान उसके लिए सबसे बेहतर'

आखिर कैसे संभालेंगे गिरती अर्थव्यवस्था

इमरान खान के सामने पाकिस्तान की जीडीपी के स्तर को बेहतर करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। अर्थव्यवस्था के हिसाब से देखें तो पाकिस्तान एशिया का सबसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाला देश है। मौजूदा समय में पाकिस्तान की जीडीपी दुनिया में ४१वें स्थान पर है। जबकि टॉप टेन में एशिया के तीन देश शामिल हैं।

दूसरी ओर पाकिस्तानी करंसी के गिरते स्तर को भी रोकना इमरान खान के लिए बड़ी चुनौती होगी। पाकिस्तान की वर्तमान जीडीपी लगभग 300 अरब डॉलर बताई जा रही है जो कि भारत से तकरीबन आठ गुना कम है। वर्ल्ड बैंक ने तो 2019 में यह ग्रोथ रेट 5% रह जाने की बात कही है। जो 2017 में 5.7 फीसदी थी। इसके साथ-साथ पाकिस्तानी रुपया भी ऐतिहासिक गिरावट के दौर में है। देश आईएमएफ और चीन के कर्ज में डूबा हुआ है।

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में 14 अगस्त को पीएम पद की शपथ ले सकते हैं इमरान खान

5 साल में दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बेलआउट पैकेज लेने की स्थिति है। ऐसी भी खबरें हैं कि पाकिस्तान में अब कुछ ही हफ्तों के लिए विदेशी मुद्रा बची है। इस तरह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर देश की कमान इमरान खान को मिलने जा रही है।

आखिर कैसे रोक पाएंगे चरमपंथी गतिविधियां

पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों को लेकर समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हल्ला मचता रहता है। कुछ आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा बेहतर होने का दावा किया जा रहा था। मगर चुनाव के दौरान रैलियों में आतंकी हमलों ने इस सुरक्षा की पोल खोल दी। अलग-अलग हादसों में तकरीबन 180 लोग मारे गए। जानकार मानते हैं- ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पाकिस्तान ने कभी चरमपंथियोंं-आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार नहीं किया। जबकि बीते महीनों में अमेरिका ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए करोड़ों डॉलर की दी जाने वाली सहायता भी रोक दी है।

पाकिस्तान के डॉन अखबार ने पिछले साल रिपोर्ट दी थी कि देश में प्रतिबंधित 64 चरमपंथी संगठनों में से 41 किसी शख्स या समूह के यूजर प्रोफाइल के रूप में फेसबुक के सैकड़ों पन्नों में मौजूद हैं। देखना होगा कि इमरान खान चरमपंथियों और सांप्रदायिक्ता का मुकाबला कैसे करते हैं।  

 

बेलगाम हो चुके भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उठाना होगा ठोस कदम

तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से दो का शीर्ष नेतृत्व भ्रष्टाचार के मामलों में बुरी तरह से घिरा हुआ है। एक हैं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ अली जरदारी। दूसरे पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के अध्यक्ष रहे नवाज शरीफ। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज, उनकी बेटी मरियम और उनकी सरकार के मंत्री को तो इन आरोपों में सजा तक सुनाई जा चुकी है।

यह भी पढ़ें: विपक्षी दलों ने खारिज किए पाक आम चुनाव के नतीजे, सियासी खेमेबाजी तेज

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनके नीचे काम कर रहा सिस्टम किस तरह भ्रष्ट होगा। यही वजह है कि व्यवसाय स्थापित करने का महौल बताने वाले सूचकांक में भी पाकिस्तान 147वें स्थान पर है। चुनाव के दौरान इमरान खान ने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने इससे पहले कभी इतना कर्ज नहीं लिया है। इससे पहले कभी रुपए का स्तर इतना नीचे नहीं गिरा है। अब देखना होगा कि इमरान खान भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या कुछ ठोस कदम उठाते हैं।

पाकिस्तान में शून्य हो चुकी रोजगार दर
पाकिस्तान में मौजूदा दौर में रोजगार की दर लगभग शून्य प्रतिशत है। सरकार नए रोजगार नहीं दे पा रही है जबकि यहां बेरोजगारों की एक बड़ी फौज है। पाकिस्तान में जब-जब बेरोजगारी बढ़ी है, लोग चरमपंथ की तरफ आकर्षित हुए हैं। ऐसे में इस समय भी वहां चरमपंथ का प्रभाव ज्यादा है। यह इमरान खान के लिए एक सबसे बड़ी चुनौती होगा। पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की वजह से कोई निवेश नहीं करता है, बेरोजगारी की सबसे बड़ी वजह यह भी है।

आखिर पढ़ाई क्यों छोड़ रहे हैं बच्चे
2016 में पाकिस्तान में करीब 50 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। वर्तमान में भी प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों का औसत अन्य एशियाई देशों से कम है। बाल मजदूरों की संख्या पड़ोसी देशों की तुलना में ज्यादा है। यही वजह है कि इमरान के चुनावी एजेंडे में शिक्षा पर खर्च जीडीपी के 2% से बढ़ाकर 5% करने की बात थी।

देखना दिलचस्प होगा सेना-इमरान के बीच की केमिस्ट्री

pakistan army
पाकिस्तान जहां हमेशा सेना और इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई का दबदबा माना जाता है। जहां एक तरफ सेना पर आरोप लग रहे हैं कि वह चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशों में हैं तो वहीं दूसरी तरफ क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान सेना की कभी तारीफ करते हैं तो कभी आलोचना। इमरान और सेना के बीच कैसी केमेस्ट्री है, यह एक अजीब तरह का रहस्य बना हुआ है। वहीं कई विशेषज्ञ इस बात पर यकीन करते हैं कि कहीं न कहीं इमरान, सेना के चहेते हैं।

यह भी पढ़ें: जैसे भारत में आई थी मोदी लहर, वैसे ही पाक में इमरान की आंधी में ढह गए कई दिग्गज

71 साल के इतिहास में पाक ने लगभग आधा समय सैन्य शासन या सेना और जनता की चुनी सरकार की खींचतान के बीच बिताया है। यह खींचतान अब भी जारी है। नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से हटाने में भी सेना की ही भूमिका रही। उन्हें सेना के इशारे पर ही जेल भेजा गया। वरना उनका नाम 'पनामा पेपर्स' में सीधे तौर पर नहीं था। इतना ही नहीं, उन पर लगे आरोपों पर फैसला आने से पहले ही उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) पार्टी की अध्यक्षता भी छीन ली गई, जबकि यह संवैधानिक पद था ही नहीं। ऐसे में इमरान को जो पाकिस्तान मिला है, उस पर सेना का कठोर नियंत्रण है। सेना ऐसा नेतृत्व और सरकार चाहती है, जो उसकी कठपुतली हो। ना कि नवाज शरीफ जैसा प्रधानमंत्री, जो सेना को ही चुनौती देे। वैसे जब इमरान की जीत के पीछे ही सेना का हाथ बताया जा रहा है तो उनके लिए खुद बड़े निर्णय लेना मुश्किल होगा। कुल मिलाकर इमरान खान को नया पाकिस्तान बनाने के लिए मिला हैै ऐसा पाकिस्तान जहां घटती जीडीपी, शून्य रोजगार दर, बढ़ता चरमपंथ और भ्रष्टाचार ने काफी अंदर तक जड़ें जमा ली हैं।  

विश्व पटल पर आइडेंटिटी क्राइसिस के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान
इमरान खान पाकिस्तान का ऐसा चेहरा होंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री बनने से पहले ही कई देशों के लोग पहचानते हैं। इसके उलट उनका देश विश्व पटल पर आइडेंटिटी क्राइसिस के दौर से गुजर रहा है। यूरोप के अधिकांश देश व अमेरिका उसे गर्त में जा रहे देश के रूप में पहचानते हैं या फिर छवि आतंकी निर्यात करने वाले देश की है। एेसे में इस छवि से देश को बाहर लाना आसान नहीं होगा।


लेकिन जिद्दी हैं इमरान खान
इमरान भले ही सेना की संभावित पसंद हों लेकिन इमरान बहुत ही जिद्दी और सक्रिय नेता हैं। खान जनता के बीच बहुत ही लोकप्रिय हैं और उनका आत्मविश्वास उनके सकारात्मक गुणों में से एक है और वह सेना के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं क्योंकि वह आने वाले समय में शायद ही अथॉरिटी के आगे कभी झुकें और उनके तेवर देखकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता है कि वह सेना के इशारों पर चलेंगे।

बड़ा सवाल, भारत कैसी उम्मीद रखे इमरान खान से ?

pakistan and india
प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान ने कहा था कि भारत के लोग हमें अच्छे से जानते हैं और हम भारत के लोगों को। भारत एक कदम बढ़ाए, हम दो बढ़ाने को तैयार हैं। मगर चुनाव से पहले दिए उनके भाषणों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इमरान ने चुनाव से पहले कहा था कि हम नवाज शरीफ को बताएंगे कि मोदी को कैसा जवाब दिया जाना चाहिए।

परिणाम आने के बाद इमरान मीडिया से रूबरू हुए तो भारत का जिक्र कम ही किया। इसमें भी वे कश्मीर पर केंद्रित नजर आए। उन्होंने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए। कहा इस मुद्दे पर हम भारत से बात करेंगे। ऐसे में लगता नहीं कि इमरान शांति से जुड़े प्रयासों के बीच कश्मीर का राग न अलापें।

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में जीत का चेहरा बनीं ये महिलाएं

चुनाव बाद के अपने वक्तव्य में इमरान ने चीन को ज्यादा अहमियत दी। कहा कि चीन से रिश्तों को अधिक मजबूत करना होगा। चीन ने पाक में निवेश कर हमें आगे बढ़ने और तरक्की का मौका दिया है। इकोनॉमिक कॉरिडोर को तरक्की का मार्ग बनाया है। इससे यह साफ है कि इमरान चीन के इशारे पर चलेंगे।

इमरान खान खुद चरमपंथ से खासे प्रभावित हैं और चरमपंथी भारत को अपना दुश्मन घोषित करते हैं। इसके अलावा अगर इमरान सेना तथा आईएसआई (जिन्हें रियल स्टेट एक्टर कहा जाता है) के इशारों पर काम करते हैं तो भारत में शांति की राह में मुश्किलें बढ़ेंगी। क्योंकि सेना तथा आईएसआई भारत को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं।

विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह का कहना है कि कुल मिलाकर यही नजर आता है कि भारत के प्रति पाकिस्तान का नजरिया और रवैया बदलने वाला नहीं है। जानकार मानते हैं कि नवाज से तो थोड़ी-बहुत उम्मीद थी, लेकिन इमरान से नहीं है।  
 
इमरान खान पहले दोनों सीटें हारे थे अबकी बार पांचों सीटें जीते

1997 में यानी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की स्थापना के अगले ही साल इमरान खान ने नेशनल असेम्बली के लिए दो सीट मियांवाली और लाहौर से चुनाव लड़ा। वे दोनों सीट हार गए। इस बार उन्होंने इन क्षेत्रों की सीट सहित 5 सीटें जीती हैं।

1995 में इमरान ने इंग्लैंड की जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की। अगले साल सक्रिय राजनीति में आए, तभी से जेमिमा से उनके रिश्ते बिगड़ने लगे थे। पत्नी के यहूदी पिता पर विरोधी टिप्पणियां करने लगे थे।
विज्ञापन

पाकिस्तान में अब तक हुए चुनावों पर एक नजर

पाकिस्तान चुनाव
पहला आम चुनाव 1954: इस वक्त अप्रत्यक्ष चुनाव हुए थे।
दूसरा आम चुनाव 1962 : इस वक्त भी गैर दलीय आधारिक अप्रत्यक्ष चुनाव हुए थे।
तीसरा आम चुनाव 1970: अवामी लीग बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
चौथा आम चुनाव 1977: पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी (PPP)
5वां आम चुनाव 1985: पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PML)
6ठा आम चुनाव 1988: पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी (PPP)
7वां आम चुनाव 1990: इस्लामी जम्हूरी इत्तेहाद ( IJI)
8वां आम चुनाव 1993: पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी (PPP)
9वां आम चुनाव 1997: पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PMLN)
10वां आम चुनाव 2002: पाकिस्तान मुस्लिम लीग- क्वैद (PMLQ)
11 वां आम चुनाव 2008: पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी (PPP)
12वां आम चुनाव 2013: पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PMLN)
13वां आम चुनाव 2018: पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI)

पाकिस्तान में कब-कब हुआ तख्ता पलट
1947 में भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान में 11 साल बाद ही 1958 में जनरल अयूब खान ने तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी। कमांडर इन चीफ अयूब खान ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, मेजर जनरल इस्कांदेर मिर्जा को पद से हटा दिया। अयूब खान ने मॉर्शल लॉ लगा दिया और देश की गद्दी पर अपना कब्जा कर लिया। दो साल बाद अयूब ने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। पाकिस्तान पर अयूब का राज पूरे नौ साल चला। इस दौरान भारत के हाथों मिली करारी हार से अयूब खान की सत्ता कमजोर पड़ी और 1969 में जनरल यह्या खान ने तख्तापलट कर उन्हें हुकूमत से बेदखल कर दिया था।

इसके बाद जुल्फीकार अली भुट्टो पाक के प्रधानमंत्री बने। जियाउल हक को उन्होंने सेना प्रमुख बनाया, लेकिन जनरल जियाउल हक ने ही 1978 में भुट्टो का तख्ता पलट कर दिया। साल भर बाद ही भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया। 1988 में हक की विमान हादसे में मौत हो गई, लेकिन पाकिस्तान में फौजी हुकूमत कायम रही। दुनिया ने 1999 में फिर से पाकिस्तानी फौज की हुकूमत देखी जब तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ को बेदखल करके सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सत्ता हथिया ली।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें