पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
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आतंकियों को शरण देने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना झेल रहा पाकिस्तान अब खुद को पाक—साफ दिखाने की कोशिश में जुट गया है। इसी के चलते बुधवार को पाकिस्तानी संसद में एक विधेयक भी लाया गया।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में ग्रे सूची से व्हाइट सूची में आने के लिए पाक संसद में विधेयक भी लाया गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा, 'FATF से संबंधी यह विधेयक हमें ग्रे से सफेद सूची में लाने में मदद करेगा।' पाक अखबार डॉन के मुताबिक विपक्ष के हंगामे के बीच पाकिस्तान सरकार बुधवार को FATF से संबंधी दो विधेयक पास कराने में सफल रही।
पिछले महीने भारत ने कहा था कि आतंकियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करने की वजह से पाकिस्तान अभी FATF की ग्रे लिस्ट में ही रहने वाला है। पाक आतंकियों की शरणस्थली बना हुआ है और इमरान सरकार ने आतंकी फंडिंग के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, 'FATF के एक्शन प्लान की 27 चीजों में से 13 पर अभी तक पाक ने कार्रवाई नहीं की है। जबकि इसके लिए निर्धारित समयसीमा कब की खत्म हो चुकी है।' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का ग्रे सूची में बने रहना, इस बात का सबूत है कि उसने आतंकी फंडिंग के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।'
माना जा रहा है कि पाकिस्तान फरवरी 2021 तक ग्रे सूची में बना रह सकता है, चाहे वह अक्तूबर 2020 तक एक्शन प्लान की सारी शर्तों को पूरा कर दे। FATF की टीम पाक के सभी दावों की पुष्टि करने के बाद भी कोई फैसला लेगी।