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Pakistan: दुर्लभ खनिज सौदे पर आगे बढ़े अमेरिका-पाकिस्तान, नमूने की पहली खेप पहुंची; पीटीआई ने जताई आपत्ति

Mon, 06 Oct 2025 07:51 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।

सार

Pakistan: पाकिस्तान और अमेरिका दुर्लभ खनिजों के व्यापार और विकास के लिए एक नए समझौते पर काम कर रहे हैं, जिसमें अमेरिका की कंपनी 50 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। यह समझौता पाकिस्तान को वैश्विक खनिज बाजार से जोड़ने में मदद करेगा और आर्थिक विकास के अवसर बढ़ाएगा। वहीं, विपक्षी पार्टी पीटीआई ने इस समझौते पर आपत्ति जताई है और इसके विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
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डोनाल्ड ट्रंप, शहबाज शरीफ - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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पाकिस्तान और अमेरिका अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, क्योंकि दोनों देश दुर्लभ खनिजों के निर्यात के लिए एक समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। 
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50 करोड़ डॉलर के निवेश की योजना बना रही अमेरिकी कंपनी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी की कंपनी यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स (यूएसएसएम) ने सितंबर में पाकिस्तान के साथ एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। यूएसएसएम ने इस समझौते के तहत पहली बार खनिजों के नमूनों की एक खेप अमेरिका भेजी है। यह अमेरिकी कंपनी पाकिस्तान में खनिज प्रसंस्करण और विकास सुविधाओं की स्थापना के लिए करीब पचास करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। 

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'डॉन' अखबार ने अमेरिकी सूत्रों के हवाले से बताया कि यह खेप पाकिस्तान को दुर्लभ खनिज आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने की दिशा में अहम कदम है। यह क्षेत्र आज औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दुनियाभर में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

पहली खेप पर यूएसएसएम ने क्या कहा?
यह खेप पाकिस्तान में घरेलू स्तर पर फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गेनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) के सहयोग से तैयार की गई है। इसमें एंटिमनी, तांबे का सांद्र (कॉपर कंसन्ट्रेट) और धरती के नियोडिमियम व प्रसीओडिमियम जैसे दुर्लभ तत्व शामिल हैं। यूएसएसएम ने एक बयान में इस खेप को पाकिस्तान-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में 'एक मील का पत्थर' बताया। कंपनी ने कहा कि यह समझौता खनिज क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग का रोडमैप तय करता है।

यूएसएसएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) स्टेसी डब्ल्यू हैस्टी ने कहा कि यह पहली खेप यूएसएसएम और एफडब्ल्यूओ के बीच सहयोग के एक रोमांचक अध्याय की शुरुआत है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और दोस्ती को मजबूत करना है। डॉन के मुताबिक, यह समझौता पाकिस्तान को वैश्विक दुर्लभ खनिज बाजार में प्रवेश दिला सकता है, जिससे अरबों डॉलर की आय हो सकती है, रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिल सकता है।

पाकिस्तान के पास लगभग छह ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुमानित अप्रयुक्त खनिज भंडार है, जिससे यह दुनिया के सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधनों वाले देशों में आता है। अमेरिका के लिए यह साझेदारी आवश्यक कच्चे माल तक अधिक पहुंच सुनिश्चित करती है और साथ ही वह उन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है, जो वर्तमान में वैश्विक खनिज बाजार को नियंत्रित करते हैं।

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पीटीआई ने समझौते पर जताई आपत्ति
हालांकि, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस समझौते पर आपत्ति जताई है। पीटीआई के सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने सरकार से इन 'गोपनीय समझौतों' के सभी विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। अकरम ने यूएसएसएम की खेप और फाइनेंशियल टाइम्स की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें यह दावा किया गया था कि अमेरिका को पासनी बंदरगाह की पेशकश की गई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के 'लापरवाह, एकतरफा और गोपनीय समझौते' देश की पहले से ही नाजुक स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने मांग की कि इन सभी समझौतों को लेकर संसद और जनता को भरोसे में लिया जाए और इनका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। अकरम ने कहा कि पीटीआई ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगी जो जनता और देश के हितों के खिलाफ हो। 

इस बीच, डॉन ने बताया कि सैन्य सूत्रों ने फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में जिस प्रस्ताव का जिक्र किया गया है वह एक व्यापारिक विचार था, न कि कोई आधिकारिक नीति। अकरम ने एक ऐतिहासिक उदाहरण भी दिया और सरकार से आग्रह किया कि वह मुगल सम्राट जहांगीर के 1615 में ब्रिटिशों को सूरत बंदरगाह पर व्यापार की अनुमति देने के फैसले से सबक ले, जिसने आखिरकार उपनिवेशवाद का रास्ता खोला।
 

 
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