शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा ने कहा, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का संविधान कहता है कि हर दो साल में अध्यक्ष चुना जाएगा। जबकि, अन्य सदस्यों का चुनाव हर तीन साल में होगा। पार्टी के संविधान का उल्लंघन साबित हो गया है।
'डॉन' की खबर के मुताबिक, सीजेपी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ चुनाव आयोग (ईसीपी) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में पेशावर उच्च न्यायाय (पीएचसी) के फैसले को चुनौती दी गई थी। पीएचसी ने पीटीआई के लिए 'क्रिकेट बैट' चुनाव चिह्न बहाल कर दिया था।
खबर के मुताबिक, देश में आठ फरवरी को आम चुनाव होने हैं। ईसीपी आज सियासी दलों को चुनाव चिह्न आवंटित करेगी। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने पीटीआई को झटका दिया है। सीजेपी ने फैसला सुनाया कि पीटीआई के क्रिकेट बैट चुनाव चिह्न को बहाल करने के लिए उच्च न्यायालय का आदेश पहली नजर में त्रुटिपूर्ण था।
ईसीपी ने गुरुवार की पीएचसी के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। आयोग ने जेल में बंद इमरान खान की पार्टी के आंतरिक चुनावों को असंवैधानिक करार दिया था और उसके क्रिकेट बैट के चुनाव चिह्न को रद्द कर दिया था।
इसके बाद शुक्रवार को मामले पर सुनवाई के दौरान सीजेपी ने सवाल किया कि क्या पीएचसी ने पीटीआई के आंतरिक चुनाव को कानून के अनुरूप घोषित किया है। हमें सबसे पहले पार्टी के भीतर हुए चुनावों की समीक्षा करनी होगी। सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर शीर्ष अदालत की इस कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की गई।
पिछले महीने ईसीपी ने कहा था कि पीटीआई ने आंतरिक चुनाव में अपने संविधान और चुनाव कानूनों का पालन नहीं किया। आयोग ने अनियमितता का हवाला देते हुए 22 दिसंबर को पीटीआई को चुनाव चिह्न क्रिकेट बैट रखने से रोक दिया था।
ईसीपी ने इन उम्मीदवारों के आवेदन को नहीं किया स्वीकार
ईसीपी ने पीटीआई के उन उम्मीदवारों के आवेदनों को स्वीकार नहीं किया है, जो आम चुनाव में किसी अन्य पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। पीटीआई को उम्मीद थी कि शीर्ष अदालत पीएचसी के फैसले को निलंबित करेगा। इसलिए, उसने उन्हें प्लान बी के रूप में 'बल्लेबाज' के चुनाव चिह्न पर पीटीआई-नजरियाती (पीटीआई-एन) के लिए आवेदन करने के लिए कहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर अभी तक अपना फैसला नहीं सुनाया है। लेकिन, पीटीआई ने आम चुनावों में मुकाबले के लिए बने रहने के लिए प्लान बी का सहारा लिया है।