पिछले साल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार द्वारा जवाबदेही कानूनों में किए गए संशोधनों को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) उमर अता बंदियाल, न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन और न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह की तीन सदस्यीय पीठ ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति शाह बहुमत के फैसले से असहमत थे।
इन बदलावों को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार रोधी निगरानी संस्था राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के अधिकार क्षेत्र को 50 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों तक सीमित करने जैसे संशोधन संविधान के खिलाफ हैं। अदालत ने सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को बहाल किया।
पीठ ने कानूनों में किए गए संशोधनों के आलोक में जवाबदेही अदालतों द्वारा जारी फैसलों को अमान्य घोषित कर दिया और एनएबी को सात दिनों के भीतर संबंधित अदालतों को रिकॉर्ड भेजने का निर्देश दिया। गठबंधन सरकार ने राष्ट्रीय जवाबदेही (द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2022 के माध्यम से 1999 के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) अध्यादेश में कई बदलाव किए थे, जिसे इमरान खान ने पिछले साल जून में चुनौती दी थी।
इनमें एनएबी अध्यक्ष और महाभियोजक का कार्यकाल घटाकर तीन साल करना, भ्रष्टाचार रोधी निगरानी संस्था के अधिकार क्षेत्र को 50 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों तक सीमित करना और सभी लंबित जांच और सुनवाई संबंधित अधिकारियों को हस्तांतरित करना शामिल है।
53 से अधिक सुनवाइयों की लंबी कार्यवाही के बाद अदालत ने पांच सितंबर को मामले को समाप्त कर दिया और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसे मुख्य न्यायाधीश बंदियाल की सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले घोषित किया गया है। फरवरी 2022 में शीर्ष न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालने वाले बंदियाल 16 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगे।
फैसले के बाद इमरान खान के वकील शोएब शाहीन ने कहा कि संशोधनों को संविधान के अनुच्छेद 9 (व्यक्ति की सुरक्षा), 14 (व्यक्ति की गरिमा की उल्लंघन आदि) और 89 (अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति) का उल्लंघन घोषित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया,'ये संशोधन शरीफ परिवार के निजी वकीलों ने तैयार किए थे।' उन्होंने कहा कि ये बदलाव कुछ लोगों के फायदे के लिए किए गए थे।