पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सेना अधिकारी, न्यायाधीश जवाबदेही कानूनों के तहत 'पूरी तरह से उत्तरदायी' हैं।
पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि शक्तिशाली सशस्त्र बलों के सदस्य और संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीश किसी भी अन्य लोक सेवक की तरह जवाबदेही कानूनों के तहत "पूरी तरह से उत्तरदायी" हैं। डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मंसूर अली शाह ने शीर्ष अदालत के 15 सितंबर के फैसले पर असहमति जताई।
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जस्टिस शाह ने इस टिप्पणी के साथ जवाबदेही कानूनों में बदलाव को रद्द कर दिया। उन्होंने सरकारी कार्यालय धारकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को बहाल करने का आदेश भी पारित किया। इससे पहले 2-1 के बहुमत वाले फैसले में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने कुछ संशोधनों को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति शाह और इजाज उल अहसन ने डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय जवाबदेही अध्यादेश (एनएओ), 1999 में किए गए कुछ संशोधनों को रद्द कर दिया था। यह फैसला पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान की राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) कानूनों में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर आया था।
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न्यायमूर्ति बंदियाल और न्यायमूर्ति अहसन ने खान की याचिका को विचारणीय बताया था, जबकि न्यायमूर्ति शाह ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई थी। जस्टिस शाह के अनुसार, न केवल भ्रष्टाचार के मामले बल्कि पूछताछ और जांच भी बहाल की जानी चाहिए। सोमवार को जारी विस्तृत नोट में, न्यायमूर्ति शाह ने निष्कर्ष निकाला कि खान की याचिका में दम नहीं था।