पाकिस्तान ने कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाकिस्तान' से सम्मानित करने का फैसला किया है। इसे लेकर पाकिस्तानी सीनेट में प्रस्ताव स्वीकार हो गया है। सीनेट ने सरकार से यह भी कहा है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित एक विश्वविद्यालय का नाम भी गिलानी के नाम पर रखा जाए। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई कि गिलानी की जीवनगाथा को राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
गिलानी को यह सम्मान जम्मू-कश्मीर में वहां के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए दिया जा रहा है। पाक सीनेट ने प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहते हुए भारतीय सेना और सरकारों के खिलाफ आवाज उठाई और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की आवाज बने। वहीं, कहा यह भी जा रहा है पाक सरकार और आईएसआई लंबे समय से गिलानी को किनारे लगाना चाहती थी और यह फैसला उनके इस्तीफे के बाद स्थितियां सुधारने के लिए कदम भर है।
गिलानी को निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित करने के इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर भाजपा ने विरोध प्रकट किया है। जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रविंदर रैना ने इसे लेकर रहा कि हु्र्रियत और पाकिस्तान में कोई अंतर नहीं है। दोनों एक ही हैं। यहां हुर्रियत के नेता पाकिस्तान के इशारों पर ही चलते हैं और कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं, जिसका अंजाम जम्मू-कश्मीर के निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है और उनकी जान जाती है।