पाकिस्तान में निर्वाचन आयोग (ECP) आठ फरवरी को आम चुनाव कराने का एलान कर चुका है। हालांकि, इसी बीच सीनेट में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें आठ फरवरी के बाद चुनाव कराने की बात कही गई है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सीनेट से प्रस्ताव पारित होने के बाद निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीख में बदलाव कर सकता है। हालांकि, देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने अप्रत्याशित एकजुटता दिखाते हुए आम चुनाव न टालने की अपील की है।
किसने पेश किया प्रस्ताव, देरी के पक्ष में क्या दलीलें दी गईं?
सीनेट में चुनाव आठ फरवरी के बाद कराने का प्रस्ताव पारित होने के बाद अधिकांश राजनीतिक दलों ने दो टूक कहा है कि चुनाव पहले से निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 8 फरवरी को ही कराए जाएं। इन दलों का कहना है कि चुनाव की तारीख में बदलाव उन्हें मंजूर नहीं है। स्वतंत्र सीनेटर दिलावर खान की तरफ से पेश प्रस्ताव में कहा गया कि आठ फरवरी के आस-पास कड़ाके की ठंड होती है। देश में सुरक्षा को लेकर भी कई चिंताएं हैं। ऐसे में चुनाव आठ फरवरी के बाद कराना चाहिए। उन्होंने चुनाव में कम भागीदारी की आशंका भी जताई।
100 में केवल 14 सीनेटर मौजूद रहे; इमरान खान की पार्टी ने प्रस्ताव का विरोध किया
उन्होंने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की सीनेट से जो प्रस्ताव पारित हुआ है वह बाध्यकारी नहीं है। जो प्रस्ताव लाया गया उस समय 100 में से केवल 14 सदस्य ही सदन में मौजूद थे। प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने विरोध दर्ज कराया। पीटीआई नेता बैरिस्टर गौहर खान ने सुप्रीम कोर्ट से इस प्रस्ताव का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि 14 सीनेटरों की सहमति से पारित प्रस्ताव के आधार पर जनादेश हासिल करने की संवैधानिक प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने इस प्रस्ताव को देश के लोकतंत्र पर हमले जैसा करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना, संसद की पवित्रता का उल्लंघन
गौहर खान ने प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने अदालत की अवमानना का जिक्र करते हुए कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव में देरी के प्रयासों को प्रभावी तरीके से नाकाम करना होगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 8 फरवरी को चुनाव के संबंध में जो आदेश पारित किया गया है उसे लागू करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव से डरे हुए राजनीतिक पक्ष के लोगों ने असंवैधानिक प्रस्ताव पारित किया है। इससे संसद के ऊपरी सदन की पवित्रता का उल्लंघन हुआ है।
प्रस्ताव पर बिलावल भुट्टो की पार्टी का रूख
रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य प्रमुख दल पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) को असमंजस में देखा गया। सीनेट में मौजूद बेहरामानंद ने प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में मतदान नहीं किया। पीपीपी के सीनेटर शेरी रहमान ने कहा, उनकी पार्टी स्पष्ट रूप से ऐसे प्रस्ताव के खिलाफ है। पार्टी प्रमुख बिलावल भुट्टे-जरदारी की तरफ से उन्हें विशेष निर्देश मिले हैं। पार्टी 8 जनवरी को ही चुनाव चाहती है। उन्होंने कहा सीनेट से पारित प्रस्ताव कानून नहीं है। शुक्रवार को जुमे की नमाज और अवकाश के कारण थोड़े ही समय के लिए चलते हैं।
नवाज शरीफ की पार्टी ने भी कहा- चुनाव 8 फरवरी को ही कराए जाएं
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी- पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) ने भी कहा है कि पार्टी 8 फरवरी के चुनाव में कोई देरी नहीं चाहती। पार्टी प्रवक्ता मरियम औरंगजेब ने कहा कि पार्टी चाहती है कि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने आठ फरवरी को चुनाव का जो कार्यक्रम घोषित किया है, इसमें कोई बदलाव न हों। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी के अमीर सिराजुल हक ने भी सीनेट के प्रस्ताव को पाकिस्तान और लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह में अशांति के कारण चुनाव स्थगित करना उनके सामने आत्मसर्पमण करने जैसा होगा।
मंत्री ने चुनाव आयोग को निष्पक्ष बताया, प्रस्ताव के पीछे सरकार की भूमिका से इनकार
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कार्यवाहक सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव पर पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि चुनाव आठ फरवरी के बाद कराने के संबंध में उन्हें प्रधानमंत्री या संघीय कैबिनेट की तरफ से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। सोलांगी ने कहा कि सरकार चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान में अनुच्छेद 218 (3) के तहत चुनाव आयोग को चुनाव की तारीख का एलान करने या बदलाव करने का अधिकार मिला है।