पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत को पटरी पर लाने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ऐसे ऐसे कदम उठा रही है, जिससे पूरे देश में पहले से भी ज्यादा संशय और असंतोष की स्थितियां पैदा हो गई हैं। दुनिया के कई देशों ने अब पाकिस्तान को कर्ज़ देने से मना कर दिया है, ऐसे में सरकार ने तमाम अहम सरकारी कंपनियों को बेचने का मन बना लिया है। इसके लिए बाकायदा कैबिनेट ने एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत सरकार बिना रोक-टोक के सरकारी कंपनियों को बेच सकेगी और विधेयक को अदालत में चुनौती देने का प्रावधान भी नहीं रखा गया है। इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा।
दरअसल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने पाकिस्तान को नया कर्ज देने की मंजूरी अभी तक नहीं दी है, वहीं विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भी अपना हाथ खींच रखा है। हालत ये हो गई है कि अब शहबाज सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। सियासी तौर पर वह इसका ठीकरा अपनी पूर्ववर्ती सरकारों पर फोड़ते हैं और कहते हैं कि इमरान सरकार ने देश की पूरी अर्थव्यवस्था चौपट कर दी। हालांकि इस वक्त अभी भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को इमरान का ही समर्थक माना जाता है और कहा जाता है कि वह इमरान के इशारों पर ही काम करते हैं। लेकिन शहबाज सरकार को उम्मीद है कि वह इस विधेयक को अल्वी की मुहर लगवा लेंगे।
दरअसल इमरान खुद नहीं चाहते कि ऐसे फैसले अपनी सरकार में रहते हुए करते, इसलिए माना जा रहा है कि अल्वी को उनकी तरफ से भी हरी झंडी मिल जाएगी ताकि जनता के असंतोष का ठीकरा शहबाज़ सरकार पर ही फूटे और दूसरी तरफ सरकारी कंपनियों को बेचने का रास्ता भी साफ हो जाए। इसे वे चुनावी मुद्दा बना कर आगामी चुनाव में शहबाज की गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल सकते हैं।
फिलहाल देश को कर्ज से उबारने के लिए और शहबाज सरकार को ये जरूरी लग रहा है और उन्होंने कई बड़ी कंपनियों को बेचने की तैयारी कर रखी है। इन कंपनियों में ऑयल गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, पाकिस्तान पेट्रोलियम और मुरी गैस कंपनी पहले नंबर पर मानी जा रही है। एएनआई की खबरों के मुताबिक शरीफ सरकार इन कंपनियों को बेचकर दो से ढाई अरब डॉलर हासिल कर सकती है ताकि देश को कुछ महीनों के लिए दिवालिया होने से बचाया जा सके। पाकिस्तान सरकार तमाम देशों के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला चुकी है। यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात तक ने उसे आगे कर्ज देने से यह कहकर मना कर दिया था कि वह पहले पिछला कर्ज चुकाए तभी आगे बात बनेगी।
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो जहां यह पिछले साल दिसंबर तक 17.69 अरब डॉलर था, वह इस साल मई आते आते घटकर 10.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। जाहिर है स्थितियां जटिल हैं और शहबाज सरकार की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। इमरान खान ने इस विधेयक के पास होते ही सियासी बयानबाजी शुरू कर दी है, जबकि उनके कार्यकाल में भी कई एयरपोर्ट औऱ हाइवे को गिरवी रखने की खबरें आई थीं और तब भी यूएई ने उन्हें कर्ज देने से मना कर दिया था।