पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के अध्यक्ष फजल-उर-रहमान ने पाकिस्तानी सरकार पर हमला बोला है। बुधवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में संवैधानिक सरकार नहीं बची है। इतना ही नहीं उन्होंने पत्रकारों पर हमले करवाने व अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का आरोप भी सरकार पर लगाया है।
राजनैतिक संस्थाओं की तरह हो रहा संवैधानिक संस्था का प्रयोग
पाकिस्तान के द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक, नेशनल असेंबली में पत्रकारों से बात करते हुए फजल-उर-रहमान ने कहाकि, देश में संवैधानिक रूप से सरकार नहीं चल रही है। पत्रकारों व अभिव्यक्ति की आजादी पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे लोकतंत्र खतरे में आ गया है। उन्होंने कहाकि, एनएबी व एफआइए जैसी सरकारी संस्थाओं को राजनैतिक संस्थानों की तरह प्रयोग किया जा रहा है और इनका इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया को बताया कि पाकिस्तान के विपक्षी पार्टी के नेता शहबाज शरीफ को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी एनएबी ने उनके खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है।
दबाव बनाकर बंद की जा रही विपक्ष की आवाज
द डॉन ने पीएमएल-एन लीडर अता-उल्लाह-तरर के हवाले से लिखा है कि शहबाज शरीफ को क्लीन वॉटर केस में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, उनके खिलाफ आशियाना हाउसिंग घोटाले में मामला दर्ज हुआ था, इसके बाद रमजान शुगर मील की सीवर लाइन मामले में भी उनके जुड़े होने की पुष्टि हुई थी। अब इमरान नियाजी की ओर से नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो पर शहबाज शरीफ के खिलाफ नया मामला दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सरकार की ओर से संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके विपक्ष पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा देश के कई बड़े नेताओं व पत्रकारों पर संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके दबाव बनाया जा रहा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं रह गई है।
अंतराष्ट्रीय मीडिया वॉचडॉग ने जुलाई में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्रकारों की आजादी छीनने वाले शासकों में 37वें नंबर पर रखा था। इस खबर में यह भी बताया गया था कि प्रेस की आजादी को रोकने के लिए कैसे सेना व इंटेलीजेंस का प्रयोग किया जा रहा है। आरएसएफ के अनुसार पाकिस्तानी मिलिट्री द्वारा आम नागरिकों के अधिकारों पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके चलते पाकिस्तान में सशस्त्र बलों व आईएसआई का ही राज है।