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Pakistan: बदहाल पाकिस्तान ने रक्षा बजट 15 फीसदी बढ़ाया, 30% की बढ़ोतरी के साथ 2122 अरब रुपये का है बजट

Thu, 13 Jun 2024 06:03 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

बजट के पेश किए जाने से पहले ही गठबंधन के दोनों सहयोगियों में दरार देखने को मिली और पीपीपी के बिलावल भुट्टो जरदारी ने आरोप लगाया है कि बजट तैयार करने में उनकी पार्टी से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : ANI
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विस्तार
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पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने देश का वर्तमान वित्त वर्ष का बजट पेश किया जिसका आकार पिछले साल से करीब 30 फीसदी ज्यादा है। 18.9 (18,877 अरब) ट्रिलियन रुपये के इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस साल पाकिस्तान का रक्षा बजट 2122 अरब रुपये होगा। पिछले साल यह 1804 अरब रुपये था।

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बजट में अगले साल देश की अर्थव्यवस्था के 3.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। पिछले साल यह अनुमान 3.5 % था मगर पाकिस्तान लक्ष्य से चूक गया था और जीडीपी सिर्फ 2.38 फीसदी की दर से बढ़ी थी। इस बार वित्त मंत्री औरंगजेब ने बड़े पैमाने पर सख्त फैसले लिए हैं और कर का दायर बढ़ाया गया है। बजट में उधारी चुकाने पर सबसे अधिक 9700 अरब रुपये खर्च होंगे जबकि इसके बाद सबसे अधिक खर्च रक्षा पर ही किए जाने का प्रावधान है। देश में नए आम चुनावों के बाद पीएमएल-एन और पीपीपी गठबंधन सरकार का यह पहला बजट है।  

बजट से पहले खुलकर उभरी गठबंधन में दरार
बजट के पेश किए जाने से पहले ही गठबंधन के दोनों सहयोगियों में दरार देखने को मिली और पीपीपी के बिलावल भुट्टो जरदारी ने आरोप लगाया है कि बजट तैयार करने में उनकी पार्टी से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया। बिलावल ने सवाल किया कि क्या शहबाज शरीफ के नेतृत्व की सरकार अब भी उनके समर्थन को तरजीह देती है। इस विवाद के चलते पाकिस्तान की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सहयोगियों में पड़ी दरार खुलकर सामने आ गई है। ‘डॉन’ अखबार ने बताया कि पीपीपी ने संसद में बजट पेश किए जाने से पहले ही बिलावल संसदीय समिति की बैठक में यह आपत्ति जताई।  
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खान का यूटर्न, सरकार से करेंगे चर्चा
उजेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान ने यू-टर्न लेते हुए सियासी तनाव घटाने के लिए सरकार से बातचीत को हरी झंडी दे दी है। उन्होंने कुछ दिन पहले ही सत्तारूढ़ गठबंधन को दंतहीन कहकर उसके साथ वार्ता से इन्कार किया था।

उम्मीद थी कि हमारी सुनेंगे
सरकार के व्यवहार पर पीपीपी की ओर से नाराजगी जताते हुए सूचना सचिव शाजिया मारी ने कहा, हमने ऐसे हालात रोकने के लिए सरकार से संपर्क किया था। उम्मीद भी नहीं थी कि हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी।

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